राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोमवार को कीमती धातुओं की कीमतों में जोरदार वापसी देखने को मिली। आगामी शादी के सीजन को देखते हुए ज्वैलर्स की ओर से की गई ताजा खरीदारी और रुपये की रिकॉर्ड गिरावट के कारण घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में करीब 3 प्रतिशत का भारी उछाल दर्ज किया गया है।
कीमतों का ताजा अपडेट: सोना और चांदी के नए स्तर
ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, कीमती धातुओं के बाजार में सोमवार को जबरदस्त मांग देखी गई:
- चांदी: सफेद धातु यानी चांदी की कीमत में 7,000 रुपये या 3.04 प्रतिशत की भारी छलांग दर्ज की गई, जिसके बाद यह 2,37,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) के स्तर पर पहुंच गई। शुक्रवार को पिछले कारोबारी सत्र में यह 2,30,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।
- सोना: 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 3,700 रुपये या 2.5 प्रतिशत बढ़कर 1,51,500 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गई। पिछले बाजार सत्र में पीली धातु 1,47,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर हुई थी।
उछाल के मुख्य कारण: घरेलू मांग और वैश्विक रुझान
बाजार के जानकारों और व्यापारियों ने इस रिकवरी का मुख्य श्रेय शादियों के सीजन से पहले की भौतिक खरीदारी और अनुकूल वैश्विक रुझानों को दिया है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटी मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी के अनुसार, निचले स्तरों पर की गई खरीदारी (डिप-बाइंग) और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने कीमती धातुओं के बाजार में समग्र धारणा को बेहतर किया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी धातुओं में तेजी का रुख रहा। हाजिर सोना 38.68 डॉलर या लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,531.67 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी 1.35 प्रतिशत चढ़कर 70.72 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। मिरे एसेट शेयरखान के कमोडिटी प्रमुख प्रवीण सिंह ने बताया कि हाजिर सोना लगभग 4,530 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया है, हालांकि इसमें उतार-चढ़ाव बना हुआ है क्योंकि व्यापारी अमेरिकी डॉलर और तेल की कीमतों पर लगातार नजर रख रहे हैं।
रुपये की ऐतिहासिक गिरावट के कारण सोने-चांदी में मजबूती
घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतों को भारतीय रुपये में आई भारी गिरावट से भी अतिरिक्त समर्थन मिला। डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 95 के स्तर को पार करते हुए 95.2350 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। भारतीय रिजर्व बैंक ने सट्टा गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए ऑनशोर लॉन्ग डॉलर पोजीशन को सीमित किया था, जिससे शुरुआत में रुपये को कुछ मजबूती मिली थी। लेकिन मजबूत कॉर्पोरेट मांग और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण रुपया अपनी बढ़त बरकरार नहीं रख सका। सौमिल गांधी ने स्पष्ट किया कि कमजोर रुपये ने घरेलू सोने की कीमतों को अतिरिक्त सपोर्ट प्रदान किया है।
बाजार में अब भी सतर्कता
सोमवार की इस शानदार वापसी के बावजूद, इस महीने (मार्च) सर्राफा बाजार ने भारी नुकसान का सामना किया है। 2 मार्च से अब तक सोना 21,300 रुपये (12.3 प्रतिशत) टूट चुका है, जबकि चांदी में 63,000 रुपये (21 प्रतिशत) की भारी गिरावट आई है। लेमन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग के मुताबिक, मौजूदा लाभ के बावजूद समग्र धारणा अभी भी सतर्क बनी हुई है। वैश्विक बाजारों में इस महीने सोने में लगभग 16 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है, जो दशकों में इसकी सबसे बड़ी गिरावट में से एक है।
