एक महीने पहले जब अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर हमले शुरू किए तो यह आशंका जताई जा रही थी कि इस युद्ध के विश्व युद्ध बनने में देर नहीं लगेगी। माना जा रहा था कि अमेरिका और इस्राइल पर अगर ईरान का पलटवार होता है तो अमेरिका के सहयोगी देश, खासकर नाटो और यूरोपीय संघ के देश उसकी मदद के लिए जरूर आगे आएंगे। हालांकि, जहां पहला अनुमान कि ईरान पलटवार करेगा वाली बात सही साबित हुई, तो वहीं दूसरा अनुमान कि अमेरिका के सहयोगी मदद के लिए आगे आएंगे अब तक सही नहीं हो पाया। उल्टा अधिकतर सहयोगियों ने यह कहकर युद्ध में उतरने से इनकार कर दिया कि यह संघर्ष अमेरिका ने खुद शुरू किया है और वह इसमें नहीं कूदेंगे।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी सहयोगियों के रवैये से खासे नाराज रहे हैं। बीते एक महीने में उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म- ट्रूथ सोशल पर नाटो को कागज के शेर तक बताया। साथ ही उन्होंने अपने सहयोगियों पर भी लगातार संघर्ष में शामिल होने का न सिर्फ दबाव बनाया, बल्कि ब्रिटेन और यूरोप के कई देशों पर उनकी मदद न करने के आरोप भी लगाए। अब ट्रंप ने एक ब्रिटिश अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा है कि वह अमेरिका को नाटो से बाहर निकालने पर विचार कर रहे हैं।
