ईरान के जाग्रोस पर्वत श्रृंखला की 7000 फीट ऊंची दुर्गम पहाड़ियों के बीच फंसे अमेरिकी वायुसेना के जवान को बचाने के लिए चलाया गया ऑपरेशन किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म से कम नहीं था. ईरान की सरकारी मीडिया पर संदेश प्रसारित कराया गया कि जो भी अमेरिकी जवान को ढूंढने में मदद करेगा या उसकी लोकेशन बताएगा, उसे भारी-भरकम इनाम दिया जाएगा. चारों तरफ ईरानी सुरक्षा बलों की घेराबंदी थी. ऐसे में अमेरिका ने अपनी सबसे ताकतवर रणनीति ‘भ्रम’ का सहारा लिया.
करीब 36 घंटे तक चले इस ऑपरेशन में यूएस स्पेशल फोर्स के जवानों की कार्रवाई के साथ-साथ अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए द्वारा चलाया गया एक बड़ा भ्रामक अभियान शामिल था, जिसका मकसद ईरानी सुरक्षा बलों को गुमराह करना था. इस मिशन की शुरुआत 3 अप्रैल को हुई, जब ईरानी सेना ने अमेरिका के एक F-15 फाइटर जेट को अपने एयरस्पेस में मार गिराया. जेट में पायलट और वेपन सिस्टम्स ऑफिसर थे. दोनों ने क्रैश होते ही फाइटर जेट से इजेक्ट कर लिया था और अमेरिकी अधिकारियों के साथ संपर्क में रहे.
36 घंटे तक पहाड़ों में छिपा रहा जवान
स्पेशल फोर्स ने पायलट को कुछ ही घंटों में रेस्क्यू कर लिया, हालांकि इस दौरान रेस्क्यू टीम पर हमले भी हुए और एक ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर को नुकसान पहुंचा. दूसरा जवान 36 घंटे तक ईरान के पहाड़ी इलाके में छिपा रहा. जाग्रोस की ऊंची पहाड़ियों के बीच रास्ता बनाते हुए वह ईरानी सुरक्षा बलों से बचता रहा. इस दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और बसीज फोर्स ने उसकी तलाश के लिए बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया.
फंसे हुए जवान ने अपनी लोकेशन छिपाने के लिए सीमित तकनीक का इस्तेमाल किया और सिक्योर एन्क्रिप्टेड डिवाइस के जरिए अमेरिकी सुरक्षा बलों से संपर्क बनाए रखा. इसी दौरान, सीआईए ने एक भ्रामक अभियान चलाया, जिसमें झूठी जानकारी फैलाई गई कि पायलट को ढूंढ लिया गया है और उसे जमीन के रास्ते निकाला जा रहा है. इससे ईरानी सुरक्षा बलों का ध्यान असली लोकेशन से हट गया. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने फंसे हुए जवान की सटीक लोकेशन ट्रैक की और कोऑर्डिनेट्स पेंटागन और व्हाइट हाउस को भेजे गए.
भारी गोलीबारी के बीच सफल ऑपरेशन
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रेस्क्यू ऑपरेशन को मंजूरी दी. शनिवार रात यूएस स्पेशल फोर्स ने ऑपरेशन शुरू किया. इस दौरान A-10 वॉरथॉग और ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टरों की मदद से कवर फायर दिया गया. ईरानी सुरक्षा बलों के काफिलों को रोकने के लिए अमेरिकी वायुसेना ने हवाई हमले भी किए. भारी गोलीबारी के बीच यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ. इस मिशन के दौरान कई चुनौतियां भी सामने आईं, जिनमें MC-130J एयरक्राफ्ट का फंस जाना शामिल था. इस कारण अतिरिक्त विमानों को मौके पर भेजना पड़ा और फंसे हुए एयरक्राफ्ट को नष्ट करना पड़ा.
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ऑपरेशन में इजरायल ने भी अहम इंटेलिजेंस शेयर किए. हालांकि, उसके कमांडो इस ऑपरेशन में शामिल नहीं थे, जैसा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था. आखिरकार यह मिशन सफल रहा. अमेरिकी अधिकारियों ने इसे देश के इतिहास के सबसे कठिन रेस्क्यू मिशन में से एक बताया. एक अधिकारी ने इसे ‘भूसे के ढेर में सुई खोजने’ जैसा ऑपरेशन बताया, जिसमें इंटेलिजेंस इनपुट और स्ट्रैटेजिक डिसेप्शन (रणनीति के तहत भ्रम फैलाना) की अहम भूमिका रही.
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