लोकतंत्र की हत्या या नियमों की बलि? CEC महाभियोग खारिज होने से बिफरा विपक्ष
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लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर में आज उस समय खलबली मच गई जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का महाभियोग नोटिस बिना किसी चर्चा के खारिज कर दिया गया. आक्रोशित संयुक्त विपक्ष ने इसे संवैधानिक हत्या करार देते हुए सरकार पर तीखा प्रहार किया है. अभिषेक मनु सिंघवी ने सवाल किया कि आखिर सत्ता पक्ष चुनाव आयोग पर उठने वाले सवालों से इतना खौफजदा क्यों है?

विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई.
लोकतंत्र के मंदिर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया महाभियोग प्रस्ताव शुरुआत में ही खारिज कर दिया गया है. इस फैसले के तुरंत बाद संयुक्त विपक्ष ने एक प्रेस ब्रीफिंग में सरकार और लोकसभा अध्यक्ष पर तीखा हमला बोला. विपक्ष ने इसे संवैधानिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन बताते हुए लोकतंत्र के लिए एक काला दिन करार दिया है. सवाल पूछा गया कि क्या यह निर्णय संवैधानिक रूप से सही है? क्या चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना गलत है?
कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताया है. विपक्ष का कहना है कि महाभियोग मामले में बिना किसी ठोस प्रक्रिया के इसे सीधे तौर पर अध्यक्ष महोदय द्वारा खारिज कर देना संवैधानिक रूप से गलत है. विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि सत्ता पक्ष चुनाव आयोग से जुड़े सवालों से आखिर क्यों घबरा रहा है और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों की अनदेखी क्यों की जा रही है.
सवाल-जवाब
संयुक्त विपक्ष ने सरकार पर क्या आरोप लगाया?
विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार और लोकसभा अध्यक्ष ने बिना उचित विचार-विमर्श के CEC के खिलाफ महाभियोग नोटिस को खारिज कर दिया, जो संवैधानिक रूप से गलत है.
अभिषेक मनु सिंघवी ने संसद की गरिमा पर क्या कहा?
सिंघवी ने कहा कि इस फैसले से संसद की गरिमा पर साया पड़ा है और सत्ता पक्ष हर संवैधानिक सवाल को झुठलाने का काम कर रहा है.
चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष का मुख्य सवाल क्या है?
विपक्ष ने पूछा कि सत्ता पक्ष चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों से क्यों घबरा रहा है और जांच से पहले ही नोटिस क्यों खारिज कर दिया गया.
क्या इस फैसले में अदालती आदेशों का पालन हुआ?
विपक्ष के अनुसार, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों और तय संवैधानिक नियमों का पालन नहीं किया गया है.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें
