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Petrol Price Hike : सरकारी तेल कंपनियों का नुकसान लगातार बढ़ता ही जा रहा है. अब तो आलम ये हो गया है कि अगर सरकार अपना सारा टैक्स खत्म भी कर दे तो भी कंपनियों के नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती है. लिहाजा पूरे कयास लगाए जा रहे हैं कि चुनाव बाद पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है.

क्रूड महंगा होने से तेल कंपनियों को हजारों करोड़ का नुकसान हो रहा.
नई दिल्ली. ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के बीच आपको पेट्रोल और डीजल भले ही 4 साल पुरानी कीमत पर मिल रहा है, लेकिन देश की तेल कंपनियों को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. पेट्रोलियम कंपनियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कच्चे माल की लागत में भारी बढ़ोतरी के बावजूद सरकारी तेल डिस्ट्रीब्यूटर कंपनियां पंप कीमतों को स्थिर रखे हुए हैं. इस कारण पेट्रोल पर नुकसान बढ़कर 18 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 35 रुपये प्रति लीटर हो गया है. अगर कंपनियों को अपने इस घाटे की भरपाई करनी है तो पेट्रोल के दाम 125 रुपये लीटर से भी ज्यादा हो सकते हैं.
डीजल और पेट्रोल की खुदरा कीमतों को एक दशक से अधिक समय पहले सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर दिया गया था और इसे पूरी तरह बाजार के हवाले कर दिया गया था. बावजूद इसके सरकारी कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने अप्रैल 2022 से पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है.
ग्लोबल मार्केट में कहां पहुंच गई कीमत
चार साल में भले ही घरेलू बाजार में कीमत न बदली हो लेकिन ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव रहा. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने से लेकर इस साल की शुरुआत में लगभग 70 डॉलर तक गिरावट और फिर अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमलों के बाद पिछले महीने लगभग 120 डॉलर तक का उछाल दिखा है.
हजारों करोड़ का हुआ नुकसान
सूत्रों ने बताया कि पिछले महीने ये तीनों कंपनियां प्रतिदिन करीब 2,400 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही थीं, जो अब सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर 10-10 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क में कटौती के बाद घटकर लगभग 1,600 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गया है. यह कटौती उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचाई गई बल्कि नुकसान की भरपाई में इस्तेमाल की गई. मार्च में हुए नुकसान ने जनवरी-फरवरी में हुई कमाई को पूरी तरह खत्म कर दिया है और ऐसे आसार हैं कि ये कंपनियां जनवरी-मार्च तिमाही में घाटा दर्ज करेंगी.
अभी एक लीटर पर कितना नुकसान
ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विस ग्रुप मैक्वेरी ग्रुप की ‘इंडिया फ्यूल रिटेल’ रिपोर्ट के अनुसार, क्रूड की हाजिर कीमत 135-165 डॉलर प्रति बैरल होने पर भारत की तेल कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर 18 रुपये और डीजल पर 35 रुपये का नुकसान होता है. रिपोर्ट में कहा गया कि कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि से विपणन नुकसान में करीब 6 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी होती है.
चुनाव बाद लग सकता है झटका
सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे प्रमुख राज्यों में चुनाव के बाद ईंधन की खुदरा कीमतों में वृद्धि के आसार हैं. भारत ने साल 2025 में अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88 फीसदी आयात किया और वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति वह अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है. इसमें लगभग 45 फीसदी आयात पश्चिम एशिया से, 35 फीसदी रूस से और 6 फीसदी अमेरिका से हुआ. इसके बावजूद देश डीजल, पेट्रोल और विमान ईंधन जैसे प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों का शुद्ध निर्यातक बना रहा.
उत्पाद शुल्क खत्म करें तो भी नुकसान
मार्च में सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती के बावजूद कंपनियों पर दबाव है. अगर वर्तमान कीमतों पर उत्पाद शुल्क को पूरी तरह समाप्त भी कर दिया जाए तो भी कंपनियों के नुकसान की पूरी भरपाई नहीं होगी. राज्य स्तर पर वैट दरें लगभग स्थिर बनी हुई हैं. वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 170 अरब लीटर खपत के अनुमान के आधार पर उत्पाद शुल्क को पूरी तरह हटाने से सालाना करीब 36 अरब डॉलर (करीब 3.34 लाख करोड़ रुपये) के राजस्व का नुकसान हो सकता है जिससे राजकोषीय घाटा लगभग 0.80 फीसदी बढ़ सकता है. सरकारी राजस्व में ईंधन उत्पाद शुल्क का योगदान पहले ही घटकर 2025-26 में करीब आठ फीसदी रह गया है जो वित्तवर्ष 2016-17 में 22 फीसदी था.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
