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भारत में F414 जेट इंजन के सह-उत्पादन के लिए जीई एयरोस्पेस और HAL के बीच तकनीकी सहमति बन गई है. यह कदम भारत के भावी लड़ाकू विमानों को नई ताकत देगा. साथ ही IAF और GE के बीच हुए एक अन्य समझौते के तहत तेजस के F404 इंजनों के रखरखाव के लिए भारत में ही डिपो बनाया जाएगा, जिससे विदेशी निर्भरता कम होगी और भारत की रक्षा क्षमताएं मजबूत होंगी.

तेजस के इंजन जल्द भारत में ही बनेंगे.
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ गया है. अमेरिकी दिग्गज कंपनी जीई एयरोस्पेस और भारतीय HAL ने भविष्य के लड़ाकू विमानों के लिए F414 जेट इंजन के सह-उत्पादन (Co-production) को अंतिम रूप देने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है. दोनों पक्षों के बीच तकनीकी मामलों पर सहमति बन गई है जिससे भारत की मेक इन इंडिया डिफेंस तकनीक को नई उड़ान मिलेगी. जीई एयरोस्पेस और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भारत में F414 जेट इंजन के सह-उत्पादन के लिए तकनीकी मुद्दों पर आपसी सहमति बना ली है. लगभग तीन साल की लंबी चर्चा के बाद यह डेवलपमेंट भारत के भविष्य के लड़ाकू विमानों (जैसे AMCA और LCA Mk2) के लिए मील का पत्थर साबित होगी. कंपनी ने इसे 40 साल पुरानी साझेदारी का विस्तार और आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया है.
तेजस बेड़े के लिए घरेलू डिपो सुविधा
इसी के साथ जीई एयरपोस्पेस ने भारतीय वायु सेना (IAF) के साथ एक और बड़ा अनुबंध किया है. इसके तहत LCA तेजस में इस्तेमाल होने वाले F404-IN20 इंजन की मरम्मत और रखरखाव के लिए भारत में ही डोमेस्टिक डिपो स्थापित किया जाएगा. इस सुविधा का स्वामित्व और संचालन वायु सेना के पास होगा जबकि जीई तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और विशेष उपकरण प्रदान करेगी. इससे मरम्मत के लिए विदेशों पर निर्भरता खत्म होगी और विमानों की उपलब्धता बढ़ेगी.
सवाल-जवाब
F414 जेट इंजन का सह-उत्पादन भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह समझौता भारत को जेट इंजन जैसी जटिल तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर बनाएगा. अब तक भारत को हाई-परफॉर्मेंस जेट इंजन के लिए पूरी तरह दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था. अब भारत में ही इनका निर्माण होने से स्वदेशी लड़ाकू विमानों की शक्ति और उत्पादन क्षमता बढ़ेगी.
IAF द्वारा स्थापित नई डिपो सुविधा से क्या लाभ होगा?
यह सुविधा तेजस विमानों के F404 इंजनों की मरम्मत का समय (Turnaround time) कम करेगी. इससे इंजनों को मरम्मत के लिए विदेश नहीं भेजना पड़ेगा, जिससे वायु सेना की युद्ध क्षमता हमेशा तैयार रहेगी और खर्च में भी कमी आएगी.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें
