नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग में अब महज कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन राज्य की सियासत पूरी तरह से गरमा चुकी है. इस बार बंगाल चुनाव का सबसे बड़ा और निर्णायक मुद्दा ‘महिला वोटर’ और ‘संविधान संशोधन बिल (महिला आरक्षण)’ बन गया है. देश के विभिन्न हिस्सों में इस मुद्दे पर प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन इसका असली ‘टेस्टिंग सेंटर’ पश्चिम बंगाल बन चुका है. ‘गूंज’ में रुबिका लियाकत ने बताया कि यहां सीधी लड़ाई महिला वोट बैंक की नींव पर खड़ी ममता बनर्जी (टीएमसी) और महिलाओं को अपना नया बेस बना रही बीजेपी के बीच है.
‘महिला वोटरों’ के दम पर ही टिके हैं जीत के आंकड़े
बंगाल की सियासत में महिला वोटर कितनी अहम हैं, इसे सीएसडीएस (CSDS) के 2024 लोकसभा चुनाव के आंकड़ों से समझा जा सकता है.
वोट प्रतिशत का भारी अंतर: 53% महिला वोटरों ने ममता बनर्जी की टीएमसी को वोट दिया, जबकि बीजेपी के पक्ष में सिर्फ 33% महिलाओं ने मतदान किया.
ओवरऑल वोट शेयर: टीएमसी को 46% और बीजेपी को 39% वोट मिले. महिला वोटरों के बीच टीएमसी और बीजेपी का यह 20% का अंतर ही ममता बनर्जी की जीत की सबसे बड़ी वजह बनता रहा है.
मतदान में महिलाएं आगे: 2021 के विधानसभा चुनाव में पुरुषों (81.37%) के मुकाबले महिलाओं (81.75%) का मतदान प्रतिशत अधिक रहा था.
आबादी का गणित: राज्य में 3.6 करोड़ पुरुष और 3.44 करोड़ महिला मतदाता हैं, लेकिन ज्यादा वोटिंग प्रतिशत के कारण यह अंतर खत्म हो जाता है. बंगाल में करीब 24 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां महिला वोटर पुरुषों से ज्यादा हैं.
पीएम मोदी का कड़ा प्रहार और बीजेपी की रणनीति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बंगाल में अपनी रैलियों को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया. पीएम मोदी ने सीधा आरोप लगाया कि टीएमसी ने कांग्रेस के साथ मिलकर इस विधेयक को पारित होने से रोकने की साजिश रची और बंगाल की मां-बहनों के साथ धोखा किया है. बीजेपी 2014 के बाद से ही महिलाओं को एक मजबूत वोट बैंक के रूप में विकसित कर रही है. केंद्र सरकार की शौचालय निर्माण, उज्ज्वला योजना (गैस सिलेंडर), नल से जल, और जनधन बैंक अकाउंट जैसी योजनाओं ने बीजेपी को महिला वोटरों के बीच एक मजबूत पैठ दी है.
ममता बनर्जी का पलटवार: ‘परिसीमन’ को बनाया हथियार
पीएम मोदी के इन हमलों का ममता बनर्जी ने तुरंत और तीखा जवाब दिया है. दीदी जानती हैं कि अगर बीजेपी महिला आरक्षण पर अपना नैरेटिव सेट करने में कामयाब हो गई, तो टीएमसी के लिए मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी.
टीएमसी का दावा: ममता बनर्जी ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने पहले ही 37.9% महिलाओं को लोकसभा और 46% महिलाओं को राज्यसभा भेजा है. उन्होंने पीएम मोदी पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया.
परिसीमन का दांव: ममता बनर्जी ने अब अपना पूरा फोकस ‘परिसीमन’ (Delimitation) पर शिफ्ट कर दिया है. उनका तर्क है कि बीजेपी महिला आरक्षण को ढाल बनाकर परिसीमन थोपने की कोशिश कर रही है, जिसे टीएमसी लोकतंत्र के लिए खतरा मानती है.
निष्कर्ष
पश्चिम बंगाल का यह चुनाव अब स्पष्ट रूप से ‘नारी शक्ति’ के इर्द-गिर्द घूम रहा है. एक तरफ बीजेपी अपनी कल्याणकारी योजनाओं और महिला आरक्षण बिल के जरिए दीदी के इस अभेद्य किले में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है. वहीं दूसरी तरफ, ममता बनर्जी अपने पुराने महिला वोट बैंक को बचाने के लिए परिसीमन के मुद्दे को धार दे रही हैं. अब देखना यह है कि बंगाल की महिलाएं दीदी पर भरोसा कायम रखती हैं या फिर बीजेपी के दावों पर मुहर लगाती हैं.
