अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान ‘अवैध घुसपैठ’ को देश के लिए बड़ा खतरा बताकर मोर्चा खोला था, लेकिन सत्ता में आने के बाद आंकड़ों की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. एक रिपोर्ट में खुलासा करते हुए बताया गया है कि ट्रंप प्रशासन की मार अवैध प्रवासियों से ज्यादा उन लोगों पर पड़ी है जो कानूनन अमेरिका आना चाहते हैं. रिपोर्ट बताती है कि विशेष रूप से H-1B वीजा में 25 प्रतिशत की कमी आई है, जिसने भारतीय पेशेवरों के बीच चिंता पैदा कर दी है.
कैटो इंस्टीट्यूट के डेविड जे. बियर के ताजा विश्लेषण के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने अवैध घुसपैठ रोकने की तुलना में कानूनी इमिग्रेशन के रास्तों को कहीं ज्यादा तेजी से बंद कर दिया है. रिपोर्ट बताती है कि कानूनी रूप से अमेरिका आने वालों की कटौती, अवैध सीमा पार करने वाली गतिविधियों में आई कमी से ढाई गुना ज्यादा है. ट्रंप के अभियान का शोर भले ही ‘बॉर्डर सीलिंग’ पर रहा हो, लेकिन हकीकत में करीब 72% गिरावट उन कानूनी रास्तों में आई है. जिनका इस्तेमाल स्टूडेंट्स (छात्र), कुशल कामगार और परिवार करते थे.
H-1B वीजा प्रोग्राम पर सबसे ज्यादा असर
रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रंप की इमिग्रेशन नीति का सबसे ज्यादा असर हाई-स्किल्ड वीजा प्रोग्राम H-1B पर पड़ रहा है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से टेक, इंजीनियरिंग और हेल्थकेयर सेक्टर में विदेशी विशेषज्ञों (खासकर भारत से) के लिए किया जाता है.
ट्रंप प्रशासन ने सितंबर 2025 में एक कार्यकारी आदेश जारी कर H-1B वीजा के लिए अमेरिका के बाहर से कामगार लाने वाली कंपनियों पर $100,000 (लगभग 85 लाख रुपये) का नया टैरिफ लगाया है. इस नीति के बाद H-1B वीजा जारी करने में करीब 25 प्रतिशत की कमी आई है.
एक अदालती दस्तावेज के हवाले से बियर ने बताया कि इस फीस के लागू होने के बाद बाहर से कामगारों के लिए पिटीशन में 87 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई. चूंकि ये वीजा नई मंजूरियों से जुड़े हैं, इसलिए पूरा असर अभी-भी सामने आ रहा है. ये गिरावट अमेरिकी इनोवेशन और दुनिया से नए टैलेंट को अमेरिका लाने वाले कार्यक्रम के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है.
रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि एच-1बी वीजा की मांग में आई गिरावट के व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ने की संभावना है. इन वीजा का इस्तेमाल अमेरिकी कंपनियां विशेष पदों की भर्ती के लिए बड़े पैमाने पर करती हैं. लगातार गिरावट से सिलिकॉन वैली की तकनीकी कंपनियों से लेकर स्वास्थ्य सेवा सिस्टम तक, वैश्विक प्रतिभा पर निर्भर क्षेत्रों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है.
अंतरराष्ट्रीय छात्र वीजा में 40% की कमी
चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप का ध्यान ‘घुसपैठियों’ पर था, लेकिन प्रशासन की कैंची ने छात्र वीजा और फैमिली वीजा को भी नहीं बख्शा. कानूनी रास्तों के बंद होने का असर केवल कुशल कामगारों तक सीमित नहीं है. अंतरराष्ट्रीय छात्र वीजा में भी पीक पीरियड के दौरान 40 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई है. अमेरिकी नागरिकों के जीवनसाथी या मंगेतर के लिए दिए जाने वाले वीजा में भी 65 प्रतिशत की कमी आई है. इससे भी बदतर स्थिति शरणार्थियों की है, जहां एडमिनिस्ट्रेटिव स्लोडाउन और सख्त प्रतिबंधों के कारण शरणार्थी प्रवेश में 90 प्रतिशत तक गिरावट आई है.
शरणर्थियों के रास्ते बंद
वहीं, दक्षिणी सीमा पर कानूनी शरण प्रक्रिया लगभग खत्म हो चुकी है और इसमें 99.9 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. ये आंकड़े दिखाते हैं कि अभियान का असली असर सीमा से ज्यादा देश के कानूनी इमिग्रेशन सिस्टम के अंदर महसूस किया जा रहा है.
डेविड जे. बीयर के मुताबिक, ये स्पष्ट है कि प्रशासन का उद्देश्य केवल ‘अवैध’ इमिग्रेशन को रोकना नहीं है, बल्कि यह सभी प्रकार के प्रवासन पर एक बड़ा हमला है. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि कुल इमिग्रेशन में आई कमी का करीब 72 फीसदी हिस्सा कानूनी रास्तों को बंद करने के कारण है. इमिग्रेशन पर अक्सर होने वाली राजनीतिक चर्चाओं का मुख्य केंद्र सीमा सुरक्षा होती है, लेकिन बीयर का ये विश्लेषण उन शांत और गंभीर बदलावों की ओर ध्यान खींचता है, जिसने छात्रों, कामगारों और परिवारों के लिए अमेरिका के दरवाजे लगभग बंद कर दिए हैं.
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