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जिले के निचलौल क्षेत्र के इटहिया गांव में स्थित एक ऐसा काली माता का मंदिर है जो बेहद प्राचीन धार्मिक स्थल है. इस मंदिर के सामने माता जी की खंडित मूर्तियां देखने को मिलती हैं. इन खंडित मूर्तियों की अपनी एक अलग कहानी है. माता काली के मंदिर के सामने रखी ये मूर्तियां इतिहास की एक बड़ी घटना को बयान करती हैं. इसके साथ ही तत्कालीन समय की घटना के साथ साथ उस समय के रहन सहन और उस समय से जुड़ी लोगों को याद को भी ताजा करती हैं.
महराजगंज: वन संपदा से समृद्ध महराजगंज जिला सिर्फ अपने भौगोलिक स्थिति के लिए ही नहीं बल्कि अपने धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के लिए भी अपनी एक अलग पहचान रखता है. जिले के निचलौल क्षेत्र के इटहिया गांव में स्थित एक ऐसा काली माता का मंदिर है जो बेहद प्राचीन धार्मिक स्थल है. इस मंदिर के सामने माता जी की खंडित मूर्तियां देखने को मिलती हैं. इन खंडित मूर्तियों की अपनी एक अलग कहानी है.
माता काली के मंदिर के सामने रखी ये मूर्तियां इतिहास की एक बड़ी घटना को बयान करती हैं. इसके साथ ही तत्कालीन समय की घटना के साथ साथ उस समय के रहन सहन और उस समय से जुड़ी लोगों को याद को भी ताजा करती हैं.
काली माता मंदिर के सामने रखी हैं खंडित मूर्तियां
महराजगंज जिले के जंगलों के आस पास के क्षेत्रों की बात करें तो सत्तर के दशक से लेकर नब्बे के दशक तक इन जंगली क्षेत्रों में डाकुओं का वर्चस्व हुआ करता था. इसके साथ ही जंगलों के आस पास कहीं न कहीं एक मंदिर भी होता था जो वर्तमान समय में भी देखने को मिलता है. जिले के निचलौल क्षेत्र के इटहिया गांव में भी एक ऐसा ही मंदिर प्राचीन काली माता का मंदिर देखने को मिलता है. पहले यह क्षेत्र जंगलों वाला क्षेत्र हुआ करता था. समय के साथ साथ इन क्षेत्रों में थारू समाज के लोग रहने लगे. काली माता मंदिर के सामने ही खंडित मूर्तियां रखी हुई है जिसके बारे में मंदिर के पुजारी बुद्धू महाराज ने लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताते हैं कि डाकुओं ने इस क्षेत्र में लुट पाट करने के लिए आशीर्वाद लिया लेकिन उनकी इच्छा के अनुसार उनका काम नहीं हुआ जिसके बाद उन्होंने इन मूर्तियों को तोड़ दिया. वहीं खंडित मूर्तियां आज भी मंदिर के सामने रखी हुई हैं.
डाकुओं ने कपूर न जलने पर तोड़ दी थीं मूर्तियां
काली माता मंदिर के सामने रखी खंडित मूर्तियों के बारे में स्थानीय लोगों में यह भी चर्चा होती है कि इस क्षेत्र में बहुत समय पहले डाकुओं ने लूटपाट करने से पहले यहां पर कपूर जलाकर अपने काम के सफलता के लिए आशीर्वाद मांगने की कोशिश की थी लेकिन वह कपूर नहीं जला. कपूर न जलने की स्थिति में डाकुओं को बहुत गुस्सा आ गया और इसके बाद उन्होंने यहां पर मौजूद मूर्तियों को तोड़ दिया. उस समय से लेकर आज तक यह मूर्तियां खंडित रूप में यहीं काली माता मंदिर के सामने रखी हुई हैं जो उसे समय के घटना को बताते हैं. इस घटना की कहानी आज भी लोगों के बीच चर्चा में बनी रहती है जो तत्कालीन समय की घटना को दर्शाती है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
