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210 दिन अकेले समंदर में गुजारे! टूटी नाव और फिर 4 महासागर पार कर बना डाला रिकॉर्ड – australian sailor jessica watson solo sailing teenage world record wdrk

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दुनिया की सबसे चर्चित टीनएजर्स में शामिल होने से पहले जेसिका वॉटसन का सपना समुद्र के बीच लगभग चकनाचूर हो गया था. वॉटसन की ऐतिहासिक यात्रा शुरू होने वाली थी और उससे पहले समंदर के बीच उनकी टेस्टिंग थी. टेस्टिंग के दौरान पहली ही रात उनकी 34 फुट लंबी यॉट ‘Ella’s Pink Lady’ की टक्कर 63,000 टन वजनी एक विशाल मालवाहक जहाज से हो गई थी. टक्कर इतनी जोरदार थी कि यॉट का मस्तूल टूट गया और नाव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई.

इस दुर्घटना के बाद जेसिका वॉटसन के आलोचकों को जैसे मसाला मिल गया जो महीनों से कह रहे थे कि इतनी छोटी लड़की को अकेले समंदर के रास्ते दुनिया की सैर पर कैसे भेजा जा सकता है. ऑस्ट्रेलियाई नाविक वॉटसन तब 16 साल की थीं और कहा जा रहा था कि वो समंदर की खतरनाक चुनौती के लिए बहुत कम अनुभवी और बहुत छोटी उम्र की है.

उनके माता-पिता पर भी सवाल उठे और टीनएज नाविकों के वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के बढ़ते ट्रेंड पर बहस तेज हो गई. लेकिन पीछे हटने के बजाय वॉटसन ने चुपचाप अपनी यॉट की मरम्मत करवाई और फिर से समुद्र में उतरने की तैयारी शुरू कर दी. इसके बाद जो हुआ, वो आधुनिक नौकायन इतिहास की सबसे चर्चित कहानियों में से एक बन गया.

वॉटसन की नाव की टक्कर तब हुई जब वॉटसन ने समंदर की अकेली यात्रा शुरू भी नहीं की थी. टेस्टिंग उन्हें समंदर के मुश्किल हालात में रहने के लिए तैयार करने की खातिर की जा रही थी लेकिन उस रात भयानक हादसा हुआ. हादसे में वॉटसन को तो नुकसान नहीं हुआ लेकिन उनकी नाव बुरी तरह टूट गई.

जेसिका के दुनिया का चक्कर लगाने के अभियान को रोकने की हुई कोशिश

उस समय की रिपोर्टों में कहा गया कि यॉट का मस्तूल पूरी तरह टूट गया था, जिसके बाद कई लोगों ने मांग की कि इस अभियान को तुरंत रद्द कर देना चाहिए. आलोचकों का कहना था कि यह हादसा साबित करता है कि 16 साल की लड़की को अकेले दुनिया का चक्कर लगाने की इजाजत देना कितना खतरनाक हो सकता है.

कुछ नौकायन विशेषज्ञों को शक था कि इतनी कम उम्र का कोई व्यक्ति महीनों तक समुद्र में पूरी तरह अकेले रहने का मानसिक दबाव झेल पाएगा या नहीं. वहीं कई लोग कह रहे थे कि वॉटसन अकेले समंदर का खतरनाक मौसम नहीं झेल पाएंगी और लंबे समय तक नौका चलाने से जो थकान होगी, वो भी झेल नहीं पाएंगी.

वॉटसन सबकी बातों को अनसुना करते हुए चुपचाप वापस बंदरगाह लौटीं और अपनी टूटी हुई यॉट की मरम्मत में जुट गईं. बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि इस हादसे से बच निकलने के बाद उनका आत्मविश्वास और मजबूत हो गया था. उन्होंने लिखा कि मानसिक रूप से खुद को संभाल पाने को लेकर जो भी संदेह थे, वो इस दुर्घटना के बाद लगभग खत्म हो गए. इस अनुभव ने उन्हें और ज्यादा मजबूत और दृढ़ बना दिया.

महीनों तक समुद्र में अकेले रहने के लिए कैसे तैयार हुईं जेसिका वॉटसन

अक्टूबर 2009 में जब वॉटसन ने सिडनी से अपनी यात्रा शुरू की, तब उनकी चुनौतियां भी समंदर जितनी विशाल थीं. उनका टार्गेट था कि 17 साल की होने से पहले वो अकेले, बिना रुके और बिना किसी बाहरी सहायता के पूरी दुनिया का चक्कर लगाएं. इसका मतलब था कि पूरी यात्रा के दौरान न किसी बंदरगाह पर रुकना और न ही किसी तरह की मदद लेना.

उनका रास्ता चार महासागरों से होकर गुजरने वाला था और इसमें दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री इलाकों में गिने जाने वाले समुद्री हिस्से भी शामिल थे. केवल दक्षिणी महासागर की ही बात करें तो यह हिंसक तूफानों, जमा देने वाली ठंड और खतरनाक लहरों के लिए जाना जाता है. इस महासागर में अनुभवी नाविक भी जाने से कतराते हैं. ऐसे में कई लोगों के लिए यह कल्पना करना मुश्किल था कि एक छोटी बच्ची इन हालातों का अकेले सामना कर पाएगी.

हालांकि वॉटसन का बचपन नावों और नाविकों के बीच बीता था. बताया जाता है कि वो बचपन से ही सेल बोट्स पर पली-बढ़ी थीं और जितना लोग सोचते थे, उससे कहीं ज्यादा शांत और आत्मविश्वासी नजर आती थीं. यात्रा के दौरान वो ब्लॉग पोस्ट और सैटेलाइट कम्यूनिकेशन के जरिए लोगों से जुड़ी रहीं, जिससे उनके लाखों फैन बन गए.

अपने एक ब्लॉग में वॉटसन लिखती हैं कि लोग समझते होंगे कि वो बचपन से ही निडर रही होंगी लेकिन ऐसा नहीं था. वो लिखती हैं,’जब मैंने 16 साल की उम्र में अकेले पूरी दुनिया की समुद्री यात्रा पूरी की, तो ज्यादातर लोगों को लगा कि मैं बचपन से ही बेहद निडर रही होऊंगी. लेकिन सच इससे बिल्कुल अलग था.’

वो आगे लिखती हैं, ‘जब मैंने आठ साल की उम्र में नाव चलाना शुरू किया था, तब मैं लगभग हर चीज से डरती थी. मुझे पेड़ों पर चढ़ना पसंद नहीं था, ठंडे पानी से डर लगता था और तेज साइकिल चलाना भी अच्छा नहीं लगता था. मैं बहुत शर्मीली थी, डिस्लेक्सिया की समस्या से जूझ रही थी और पहली बार जब मैं नाव चलाने के लिए गई, तब मैं बुरी तरह डरी हुई थी.’

वो अपने ब्लॉग्स के जरिए दुनिया को समंदर की असली जिंदगी के बारे में बताया करतीं मसलन, खराब मौसम, अकेलापन, उपकरणों का काम न करना और महासागर के बीच मिलने वाले शांत खूबसूरत पल. एक बार वॉटसन ने मजाक में कहा था कि अगर वो अपनी खूबसूरत यॉट पर बैठी किसी मक्खी के बारे में भी लिखें, तब भी लोगों को वो दिलचस्प लगता. इससे पता चलता है कि लोग उनकी दुनिया की यात्रा को कितनी करीब से फॉलो कर रहे थे.

210 दिन समुद्र में अकेले बिताने के बाद भावुक वापसी

210 दिन अकेले समुद्र में बिताने के बाद वॉटसन 15 मई 2010 को आखिरकार सिडनी हार्बर लौटीं. उनकी वापसी उस साल ऑस्ट्रेलिया के सबसे भावुक पलों में से एक बन गई.

हजारों लोग हार्बर के आसपास उन्हें स्वागत करने के लिए जमा हुए और लाखों लोगों ने इस घटना को टीवी पर लाइव देखा. चमकीली गुलाबी यॉट में मुस्कुराती हुई 16 साल की वॉटसन की तस्वीर कई ऑस्ट्रेलियाई लोगों के लिए यादगार बन गई. यात्रा के दौरान जब वो समुद्र के दूरदराज हिस्सों में भीषण तूफानों का सामना कर रही थीं, तब कई समर्थकों को सचमुच उनकी सुरक्षा की चिंता होने लगी थी. इसलिए उनकी सुरक्षित वापसी लोगों को किसी प्रेरणा देने वाली कहानी के सफल अंत जैसी लगी.

वॉटसन उस समय दुनिया की अकेले, बिना रुके और बिना किसी बाहरी मदद के चक्कर लगाने वाली सबसे कम उम्र की नाविक बन गईं. हालांकि इसके बाद भी विवाद खत्म नहीं हुए. कुछ आलोचकों का कहना था कि वो उत्तरी गोलार्ध में ज्यादा दूर तक नहीं गईं.

लेकिन वॉटसन ने कभी इन विवादों पर ध्यान नहीं दिया और जीवन में आगे बढ़ती गईं. उनके जीवन पर कई डॉक्यूमेंट्री और फिल्में भी बनी हैं. साल 2023 में आई True Spirit उनके जीवन पर आधारित फिल्म है. यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध है.

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By uttu

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