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मथुरा के वार्ड नंबर 33 में आने वाली 18 कॉलोनी के आम रास्ते पर पानी भरा हुआ है. यह रास्ता 18 कॉलोनी को जोड़ता है. मुख्य मार्ग होने के कारण तकरीबन 2 वर्ष से यहां रास्ता जलमग्न है. घुटनों से ऊपर पानी लोगों को आने-जाने में परेशानी. आए दिन लोग इस पानी में गिरकर घायल हो जाते हैं. वहीं बीमार होने की आशंका भी लोगों को बनी रहती है.
मथुरा: मथुरा के वार्ड नंबर 33 में आने वाली 18 कॉलोनी के आम रास्ते पर पानी भरा हुआ है. यह रास्ता 18 कॉलोनी को जोड़ता है. मुख्य मार्ग होने के कारण तकरीबन 2 वर्ष से यहां रास्ता जलमग्न है. घुटनों से ऊपर पानी लोगों को आने-जाने में परेशानी. आए दिन लोग इस पानी में गिरकर घायल हो जाते हैं. वहीं बीमार होने की आशंका भी लोगों को बनी रहती है.
18 कॉलोनी और रास्ते में भरा है पानी
मथुरा में चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि मिस्टर इंडिया जैसे गायब हो जाते हैं. चुनाव के समय जनता के पैर पड़कर उन्हें जीताने की अपील करते हैं. लेकिन चुनाव जीतने के बाद जनता के पैरों को पकड़ कर जमीन में पछाड़ कर मारने तक की नौबत तक आ जाती है. जनप्रतिनिधि जीतने के बाद जनता की समस्या सुना तो दूर उनसे बात करना और उनका चेहरा देखना तक पसंद नहीं करते. यह प्रतिनिधि तब सामने आते हैं, जब चुनाव की तारीख तय हो जाती है. इन्हें चुनाव प्रचार करना होता है. जनता की समस्या से कोई भी इन्हें सरोकार नहीं है. ग्रांट का आया हुआ पैसा कहा खर्च होता है कोई हिसाब नहीं है. जनता के विकास के दावे खोखले साबित होते हैं. लोकल 18 की टीम मथुरा के वार्ड नंबर 33 पाली खेड़ा पहुंची. यहां ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर विकास कार्यों के हालातो का जायजा लिया. रास्तों पर लबालब पानी भरा है.
मेजर ध्यानचंद पथ मार्ग का है खस्ता हाल
इस मार्ग को मेजर ध्यानचंद के पथ मार्ग के नाम से जाना जाता है लेकिन गंदगी और गंदे पानी का जाम लगा हुआ है. इतना ही नहीं मेजर ध्यानचंद की जो बेकद्री और पथ मार्ग जिस तरह से बदहाल है, पार्षद के ऊपर उंगलियां उठना स्वाभाविक है. 18 कॉलोनी इस मार्ग से होकर प्रतिदिन गुजरती हैं. हजारों की संख्या में लोग यहां अपनी दिनचर्या शुरू करने के लिए इस गंदे पानी से निकलते हैं.
लोकल 18 की टीम ने जब स्थानीय लोगों से बातचीत की तो उन्होंने वार्ड नंबर 33 पाली खेड़ा के पार्षद अभिजीत को आड़े हाथ ले लिया. उन्हें खरी खोटी सुनाने में कोई भी कसर नहीं छोड़ी. स्थानीय नागरिक विष्णु ठाकुर और सोनू शर्मा, सुनीता, उर्मिला और केला नाम की महिलाओं ने बताया कि पिछले 2 वर्ष से रास्ते का यही हाल है. पार्षद जी आते हैं और ईद का चांद बनकर चले जाते हैं. जब उनसे अपनी समस्या को लेकर उनके कार्यालय जनता जाती है तो पार्षद जी कभी मिलते ही नहीं. इस बार चुनाव में वोट डालने का बहिष्कार 18 कॉलोनी के लोग करेंगे यहां से निकलने वाले प्रत्येक व्यक्ति पार्षद को खोजते हुए निकलते हैं. क्योंकि जिस तरह से इस रास्ते पर पानी भरा हुआ है. आए दिन कोई ना कोई हादसा यहां होता है. स्कूल से आने जाने वाले बच्चे और स्थानीय लोग भी पानी में गिरकर कई बार चोटिल हो जाते हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
