नई दिल्ली. वह सुबह की पहली किरण के साथ जागता है, अपना छोटा सा संसार (ठेला) सजाता है और शहर की भागदौड़ में अपनी जगह तलाशता है. कभी पुलिस का डर, कभी साहूकारों का कर्ज और कभी मौसम की बेरुखी. इन सबके बीच वह शख्स हार नहीं मानता. हम बात कर रहे हैं उस रेहड़ी-पटरी वाले की जो हमारी अर्थव्यवस्था की वो खामोश रीढ़ है जिसे दशकों तक अनदेखा किया गया. लेकिन वक्त का पहिया घूमा और दिल्ली के गलियारों से एक ऐसी आवाज उठी जिसने इन छोटे व्यापारियों को आत्मनिर्भरता का नया मंत्र दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पीएम स्वनिधि योजना केवल एक सरकारी आंकड़ा नहीं है बल्कि यह उन करोड़ों चेहरों की मुस्कान है जिन्होंने पहली बार बिना किसी डर के बैंक की दहलीज लांघी है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच का परिणाम पीएम स्वनिधि योजना (PM SVANidhi), आज देश के करोड़ों रेहड़ी-पटरी वालों के लिए स्वावलंबन और सम्मान का दूसरा नाम बन गई है. जो वर्ग कभी साहूकारों के चंगुल में फंसा रहता था, उसे मोदी सरकार ने सम्मान के साथ मुख्यधारा की बैंकिंग प्रणाली से जोड़ दिया है. पीएम स्वनिधि मात्र एक कर्ज योजना नहीं है बल्कि यह गरीब का गौरव लौटाने का अभियान है. पीएम मोदी ने दिखाया है कि सरकार केवल बड़े उद्योगपतियों के लिए नहीं बल्कि उस रेहड़ी वाले के लिए भी खड़ी है जो सुबह 4 बजे उठकर शहर की जरूरतों को पूरा करता है.
रेहड़ी-पटरी वालों के लिए ‘मोदी की गारंटी’
यह योजना 1 जून 2020 को लॉन्च की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों के स्ट्रीट वेंडर्स को बिना किसी गारंटी के सस्ता ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपना काम फिर से शुरू कर सकें या उसका विस्तार कर सकें.
1. योजना के मुख्य फायदे
· बिना गारंटी का ऋण: किसी भी कागजी झंझट या गारंटी के बिना पहले चरण में 15,000 रुपये, दूसरे में 25,000 रुपये और तीसरे में 50,000 रुपये तक का ऋण मिलता है.
· ब्याज में भारी छूट: समय पर पुनर्भुगतान करने पर 7% की वार्षिक ब्याज सब्सिडी सीधे बैंक खाते में जमा (DBT) की जाती है.
· डिजिटल कैशबैक: डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए वेंडर्स को 1,600 रुपये प्रति वर्ष तक का कैशबैक मिलता है.
· क्रेडिट स्कोर का निर्माण: समय पर लोन चुकाने से वेंडर्स का सिबिल (CIBIL) स्कोर सुधरता है, जिससे भविष्य में वे बड़े बैंक लोन के पात्र बन जाते हैं.
· स्वनिधि से समृद्धि: लोन मिलने के बाद वेंडर्स के परिवारों को सरकार की 8 अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं (जैसे आयुष्मान भारत, उज्ज्वला) से भी जोड़ा जाता है.
2. सफलता के आंकड़े: कितने लोगों तक पहुंची?
पीएम मोदी के नेतृत्व में इस योजना ने अभूतपूर्व गति पकड़ी है:
· करोड़ों का ऋण: अब तक 71 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को पहला लोन मिल चुका है. कुल मिलाकर 97 लाख से ज्यादा लोन बांटे जा चुके हैं, जिनकी कीमत 14,000 करोड़ रुपये से अधिक है.
· आय में वृद्धि: एक रिपोर्ट के अनुसार स्वनिधि लाभार्थियों की सालाना आय में औसतन 20% की बढ़ोतरी हुई है.
· डिजिटल क्रांति: लगभग 47 लाख वेंडर्स अब डिजिटल रूप से सक्रिय हैं और UPI के जरिए भुगतान ले रहे हैं.
· महिला सशक्तिकरण: लाभार्थियों में महिलाओं की बड़ी संख्या है जो इस योजना के जरिए आत्मनिर्भर बनी हैं.
3. सुधार की गुंजायश और सुझाव
हालांकि पीएम मोदी की इस पहल ने रेहड़ी-पटरी वालों की तकदीर बदल दी है लेकिन इसे और भी अजेय बनाने के लिए कुछ क्षेत्रों में काम किया जा सकता है:
· बैंकिंग जागरूकता: अभी भी कुछ निजी बैंक छोटे वेंडर्स को लोन देने में संकोच करते हैं; उन पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत है.
· डिजिटल साक्षरता: बुजुर्ग वेंडर्स को स्मार्टफोन और UPI चलाने के लिए मोहल्ला स्तर पर और अधिक ट्रेनिंग शिविर लगाने चाहिए.
· वेंडिंग जोन का विकास: केवल लोन ही नहीं बल्कि शहरों में उनके लिए सुरक्षित वेंडिंग जोन विकसित किए जाने चाहिए ताकि उन्हें पुलिस या प्रशासन की सख्ती का सामना न करना पड़े.
· दस्तावेजीकरण: LoR (Letter of Recommendation) जारी करने की प्रक्रिया को और सरल और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की आवश्यकता है.
पीएम स्वनिधि योजना से जुड़े सवाल-जवाब
पीएम स्वनिधि योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य रेहड़ी-पटरी वालों (स्ट्रीट वेंडर्स) को बिना किसी गारंटी के सस्ता वर्किंग कैपिटल लोन उपलब्ध कराना है, ताकि वे लॉकडाउन या आर्थिक तंगी के बाद अपना व्यवसाय फिर से शुरू कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें.
पीएम स्वनिधि योजना के तहत वेंडर्स को अधिकतम कितना लोन मिल सकता है?
योजना तीन चरणों में काम करती है. पहले चरण में ₹10,000 (अब संशोधित ₹15,000), दूसरे चरण में ₹25,000 और पिछले लोन के सफल भुगतान के बाद तीसरे चरण में ₹50,000 तक का लोन मिल सकता है.
पीएम स्वनिधि योजना के तहत क्या लोन लेने के लिए किसी संपत्ति को गिरवी रखना पड़ता है?
बिल्कुल नहीं. यह इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता है कि रेहड़ी-पटरी वालों को बिना किसी ‘कोलैटरल’ (गारंटी) के लोन दिया जाता है. मोदी सरकार खुद इन छोटे व्यापारियों की गारंटर बनती है.
पीएम स्वनिधि योजना में ब्याज सब्सिडी का लाभ कैसे मिलता है?
यदि लाभार्थी अपने लोन की किस्तों का भुगतान समय पर करता है, तो उसे 7% की वार्षिक ब्याज सब्सिडी दी जाती है. यह राशि सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से वेंडर के बैंक खाते में जमा कर दी जाती है.
पीएम स्वनिधि योजना में डिजिटल लेनदेन करने पर क्या कोई अतिरिक्त फायदा मिलता है?
हां, डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए सरकार वेंडर्स को कैशबैक की सुविधा देती है. जो वेंडर्स यूपीआई (UPI) या क्यूआर कोड के जरिए भुगतान लेते हैं, उन्हें सालाना ₹1,600 तक का कैशबैक मिल सकता है.
