दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों, अमेरिका और चीन के बीच हाल ही में हुई हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद व्हाइट हाउस ने आधिकारिक ‘फैक्ट शीट’ जारी कर दी है. इसमें कई बड़े समझौतों और सहमतियों की जानकारी दी गई है.
इस बैठक को अमेरिका-चीन संबंधों में नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है. व्हाइट हाउस के अनुसार, दोनों देशों ने निष्पक्षता और पारस्परिकता के आधार पर ‘रणनीतिक स्थिरता के रचनात्मक संबंध’ बनाने पर जोर दिया है.
मिडिल ईस्ट में जारी भारी नौसैनिक तनाव के बीच दोनों महाशक्तियों ने ईरान को लेकर बेहद कड़ा और साझा रुख अपनाया है. फैक्ट शीट के मुताबिक, अमेरिका और चीन इस बात पर सहमत हुए हैं कि “ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते.” इसके साथ ही दोनों नेताओं ने वैश्विक व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज स्ट्रैट’ को तुरंत दोबारा खोलने का आह्वान किया.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि दोनों देशों ने साफ कर दिया है कि किसी भी देश या संगठन को इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से ‘टोल’ (Toll) वसूलने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
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कई अहम समझौते
उत्तर कोरिया को लेकर भी अमेरिका और चीन ने साझा रुख अपनाया. दोनों देशों ने कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करने के अपने साझा लक्ष्य की पुष्टि की. व्यापार और सप्लाई चेन के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण फैसले हुए. चीन ने अमेरिका की उन चिंताओं को दूर करने का आश्वासन दिया जो रेयर अर्थ मिनरल्स और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति में कमी से जुड़ी थीं. इसमें यट्रियम, स्कैंडियम, नियोडिमियम और इंडियम जैसे अहम खनिज शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल हाईटेक और रक्षा उद्योगों में होता है.
इस बैठक से अमेरिकी अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट जगत को बहुत बड़ा बूस्ट मिला है:
बोइंग विमान डील: चीन ने अपनी घरेलू एयरलाइनों के लिए शुरुआती तौर पर अमेरिका में निर्मित 200 बोइंग विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी है.
कृषि उत्पाद: अक्टूबर 2025 में किए गए सोयाबीन खरीद समझौतों के अलावा, चीन अब वर्ष 2026, 2027 और 2028 में हर साल कम से कम 17 बिलियन डॉलर के अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदेगा.
अमेरिकी बीफ (Beef) को बाजार: इसके साथ ही चीन ने अमेरिकी बीफ बाजार के लिए भी रास्ता खोला है. चीन ने 400 से ज्यादा अमेरिकी बीफ प्रोसेसिंग इकाइयों के लाइसेंस को नवीनीकृत करते हुए नए प्लांट्स को भी मंजूरी दी है.
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रणनीतिक जानकारों का मानना है कि ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच हुए इन आर्थिक और कूटनीतिक समझौतों से वैश्विक बाजारों में छाई अनिश्चितता काफी हद तक दूर होगी. इसके अलावा, यह बैठक दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने और वैश्विक व्यापार को स्थिर करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है.
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