देसी राफेल पर आ गई बड़ी खुशखबरी, IAF का वर्षों पुराना सपना होने जा रहा पूरा
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HAL Tejas Mark 1A Fighter Jet इसी साल एयरफोर्स को मिलने जा रहा है. यह बात डिफेंस सेक्रेटरी ने कही है. अगर इस साल तेजस Mk1A वाकई एयरफोर्स के बेड़े में शामिल हो जाता है, तो यह सिर्फ HAL की सफलता नहीं होगी. यह उस भारत की तस्वीर होगी, जो अब सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि हथियार बनाने वाली ताकत बनने की कोशिश कर रहा है.
सरकार ने क्लियर कर दिया तेजस मार्क वन इसी साल एयरफोर्स को मिलेगा.
‘देसी राफेल’ कहे जाने वाला HAL Tejas Mark 1A Fighter Jet अब आखिरकार भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होने की तरफ बढ़ रहा है. लंबे इंतजार, तकनीकी चुनौतियों और विदेशी सप्लाई चेन में आई दिक्कतों के बाद सरकार ने भरोसा जताया है कि तेजस Mk1A की डिलीवरी इसी वित्त वर्ष यानी अप्रैल से पहले शुरू हो जाएगी. डिफेंस सेक्रेटरी संजीव कुमार ने बुधवार को कहा कि उन्हें 100 प्रतिशत भरोसा है कि विमान इस साल एयरफोर्स को मिल जाएगा. यह सिर्फ एक लड़ाकू विमान की डिलीवरी नहीं है. इसके पीछे भारत की पूरी रक्षा रणनीति, आत्मनिर्भरता का सपना और चीन-पाकिस्तान जैसे दो मोर्चों पर तैयार रहने की जरूरत जुड़ी हुई है. यही वजह है कि तेजस Mk1A को लेकर सरकार, एयरफोर्स और रक्षा उद्योग तीनों की नजरें टिकी हुई हैं.
भारत ने अब तक फ्रांस से Dassault Rafale जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान खरीदे हैं, लेकिन तेजस Mk1A को इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि यह भारत में डिजाइन और विकसित किया गया लड़ाकू विमान है. इसमें आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाले हथियार, बेहतर मेंटेनेंस सिस्टम और तेज ऑपरेशनल क्षमता दी गई है. रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत का अपना राफेल भी कहते हैं क्योंकि यह भारतीय जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया हाई-टेक मल्टीरोल फाइटर जेट है.
180 विमानों का ऑर्डर
भारतीय वायुसेना ने तेजस Mk1A के 180 विमान दो चरणों में ऑर्डर किए हैं. लेकिन इनकी डिलीवरी तय समय से पीछे चली गई. पहले उम्मीद थी कि विमान पिछले साल ही मिलना शुरू हो जाएंगे, मगर एयरफोर्स चाहती थी कि उसे पूरी तरह ऑपरेशनल कॉन्फिगरेशन वाला जेट मिले. यानी ऐसा विमान जिसमें हथियार, रडार और मिशन सिस्टम पूरी तरह इंटीग्रेटेड हों. रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने माना कि देरी हुई है, लेकिन उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट करीब 90 प्रतिशत तैयार है. उनके मुताबिक बाकी बचा काम कुछ हथियारों के इंटीग्रेशन और अंतिम तकनीकी प्रक्रियाओं से जुड़ा है, जो लगभग पूरा हो चुका है.
देरी की वजह क्या रही
देरी की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी कंपनी GE Aerospace से आने वाले GE-404 इंजन बताए जा रहे हैं. कोविड महामारी और वैश्विक सप्लाई चेन संकट की वजह से इंजन की सप्लाई प्रभावित हुई. दुनिया भर में सिविल एविएशन सेक्टर में भी जेट इंजनों की भारी मांग बढ़ी, जिसका असर सैन्य प्रोजेक्ट्स पर पड़ा. भारतीय अधिकारियों का कहना है कि GE की सप्लाई चेन टूटने के बाद स्थिति सामान्य होने में काफी समय लगा.
तेजस Mk1A भारतीय वायुसेना के लिए इतना अहम क्यों है?
- असल में भारतीय वायुसेना लंबे समय से फाइटर स्क्वॉड्रन की कमी से जूझ रही है. वायुसेना को कम से कम 42 स्क्वॉड्रन चाहिए, लेकिन मौजूदा संख्या इससे काफी कम है. पुरानी पड़ चुकी MiG-21 जैसी फाइटर सीरीज को धीरे-धीरे रिटायर किया जा रहा है. ऐसे में तेजस Mk1A इस कमी को भरने में बड़ी भूमिका निभाएगा.
- यह विमान हल्का है, लेकिन इसकी मारक क्षमता काफी आधुनिक है. इसमें AESA रडार, डिजिटल कॉकपिट, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग सिस्टम और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें लगाने की क्षमता होगी. इसका मतलब यह है कि भारतीय पायलट दुश्मन के रडार से बचते हुए तेजी से हमला कर सकेंगे.
- सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह विमान भारत में बन रहा है. युद्ध की स्थिति में विदेशी कंपनियों पर निर्भरता हमेशा जोखिम पैदा करती है. रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने दिखाया है कि संकट के समय हथियारों और स्पेयर पार्ट्स की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. ऐसे में अगर भारत अपने लड़ाकू विमान खुद बनाता है, तो युद्ध के समय उसकी रणनीतिक स्वतंत्रता बढ़ती है.
- तेजस Mk1A सिर्फ एक विमान नहीं, बल्कि पूरे भारतीय रक्षा उद्योग को आगे बढ़ाने वाला प्रोजेक्ट भी है. इसमें सैकड़ों भारतीय कंपनियां जुड़ी हुई हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स, कंपोजिट मटेरियल, एवियोनिक्स और हथियार सिस्टम जैसे क्षेत्रों में भारतीय उद्योग को इससे बड़ा अनुभव मिला है. यही अनुभव भविष्य में भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान और एडवांस कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम में काम आएगा.
- रक्षा मंत्रालय के मुताबिक तेजस को लेकर विदेशी देशों की भी दिलचस्पी बढ़ रही है. कई देशों ने इस विमान को खरीदने में रुचि दिखाई है. हालांकि भारत ने साफ किया है कि पहली प्राथमिकता भारतीय वायुसेना की जरूरतें पूरी करना है. उसके बाद ही निर्यात पर जोर दिया जाएगा.
- अगर तेजस का सफल निर्यात होता है, तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जो खुद लड़ाकू विमान डिजाइन, विकसित और बेच सकते हैं. अभी अमेरिका, रूस, फ्रांस और चीन जैसे देशों का इस क्षेत्र में दबदबा है. भारत इस क्लब में जगह बनाने की कोशिश कर रहा है.
- तेजस Mk1A का एक और बड़ा रणनीतिक महत्व चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में भी है. चीन तेजी से अपनी एयरफोर्स को आधुनिक बना रहा है और पाकिस्तान को भी चीन से आधुनिक हथियार मिल रहे हैं. ऐसे में भारत को बड़ी संख्या में आधुनिक फाइटर जेट चाहिए, जो जल्दी तैयार हो सकें और कम लागत में लंबे समय तक ऑपरेशन कर सकें. तेजस इस जरूरत को पूरा करता है.
- सरकार अब तेजस Mk2 और एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है. लेकिन Mk1A को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यह भारत के लिए एक ट्रांजिशन पॉइंट है. यानी भारत पहली बार बड़े पैमाने पर अपने आधुनिक लड़ाकू विमान को ऑपरेशनल स्तर पर ला रहा है.
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Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें
