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NEET पेपर जब लीक नहीं हुआ तो CBI जांच क्यों और परीक्षा कैंसिल क्यों हुई? संसदीय समिति में घिरे NTA महानिदेशक – Neet paper leak timline nta dg grilled by mps over cbi investigation ntc ksrj

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देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को लेकर सियासी और प्रशासनिक घमासान मचा हुआ है. गुरुवार को एक संसदीय स्थायी समिति के सामने गुरुवार को एनटीए के शीर्ष अधिकारियों की पेशी हुई. बैठक में मौजूद सांसदों ने एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह और चेयरमैन प्रदीप कुमार जोशी से तीखे सवाल किए

बैठक में राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों और परीक्षा प्रणाली में सुधारों पर प्रस्तुति दी गई, लेकिन चर्चा का केंद्र NEET पेपरलीक ही रहा. जब सांसदों ने पूछा कि नीट का पेपर कैसे लीक हुआ, तो एनटीए महानिदेशक ने अजीबोगरीब दलील दी और कहा, ‘हमारे सिस्टम से कोई पेपर लीक नहीं हुआ है और इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है.’

महानिदेशक के इस बयान पर कई सांसद भड़क गए और उन्होंने पलटकर पूछा, “अगर एनटीए के सिस्टम से पेपर लीक नहीं हुआ है, तो फिर सीबीआई क्या जांच कर रही है?” इस सीधे सवाल पर एनटीए महानिदेशक के पास कोई जवाब नहीं था और वे चुप्पी साध गए.

एनटीए अधिकारी ने भले ही कहा हो कई कोई पेपर लीक नहीं हुआ है, लेकिन इस पूरे विवाद से जुड़े उन बड़े सवालों के जवाब जानते हैं जिन्होंने एनटीए के दावों की पोल खोलकर रख दी है. 

जब सिस्टम ठीक था, तो CBI किसकी जांच कर रही है?
एनटीए भले ही अपने ‘सिस्टम’ को क्लीन चिट दे रहा हो, लेकिन सरकार तो मान रही है ना कि पेपर लीक हुआ है. यह वजह है कि केंद्र सरकार के निर्देश पर अब सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है. सीबीआई की जांच का मुख्य फोकस परीक्षा केंद्रों, प्रिंटिंग प्रेस, कूरियर सर्विस और उन बिचौलियों पर है, जिनके जरिए पेपर लीक को अंजाम दिया गया.

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सीबीआई पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र ‘सॉल्वर गैंग’ तक कैसे पहुंचा. जांच का दायरा एनटीए के उन अधिकारियों तक भी बढ़ सकता है, जिनकी लापरवाही के कारण यह चूक हुई. इसलिए यह कहना कि ‘सिस्टम से लीक नहीं हुआ’ यह महज खुद को बचाने की एक कोशिश है.

अभी तक गिरफ्तारियां क्यों हो रही हैं?
सीबीआई और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अब तक इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. गिरफ्तार किए गए लोगों में (CBI) ने महाराष्ट्र के एक डॉक्टर बाल रोग विशेषज्ञ मनोज शिरुरे, RCC क्लासेस के संस्थापक शिवराज मोटेगांवकर, पुणे के सुखसागर नगर में एक ब्यूटी पार्लर चलाने वाली मनीषा वाघमारे,  पुणे की शिक्षिका मनीषा गुरुनाथ मंधारे ,रिटायर  केमिस्ट्री टीचर पीवी कुलकर्णी शामिल हैं.

CBI कोर्ट को बता चुकी हैं कि मंधारे ने कथित तौर पर पैसों के लिए छात्रों को पेपर लीक किए थे. एजेंसी ने बताया कि NTA की एक्सपर्ट होने के नाते उनकी बॉटनी और जूलॉजी दोनों विषयों के पेपरों तक पूरी पहुंच थी. 

कैमिस्ट्री पेपर पूरा लीक कैसे हुआ?
 3 मई को NEET परीक्षा आयोजित की गई थी. परीक्षा के बाद सीकर के एक शिक्षक ने NTA को पेपर लीक होने की जानकारी दी. शिक्षक ने कथित तौर पर लीक हुए प्रश्नपत्र की PDF कॉपी भी एजेंसी को भेजी. जब NTA ने उस PDF का मूल प्रश्नपत्र से मिलान किया, तो केमिस्ट्री सेक्शन के सभी सवाल हूबहू मेल खाते पाए गए, जबकि बायोलॉजी के भी कई प्रश्न समान निकले.

इसके बाद एजेंसी को पेपर लीक होने का गंभीर संदेह हुआ. केमिस्ट्री का पेपर ही वह वजह है जिसके चलते NTA ने अपने अंदरूनी मामलों की जांच की और फिर लीक के सोर्स का पता लगाया. NTA ने पहले अपने स्तर पर जांच की और फिर केमिस्ट्री का पेपर बनाने वाले और उसका ट्रांसलेशन करने वाले लोगों की लिस्ट CBI को जांच के लिए सौंप दी.इस खुलासे ने एनटीए के उस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि लीक केवल स्थानीय स्तर पर था या सीमित था. तो यहां भी एनटीए का दावा एकदम गलत साबित होता है

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जब लीक नहीं हुआ, तो एग्जाम दोबारा क्यों हो रहा है?
संसदीय समिति के सामने सांसदों का सबसे बड़ा सवाल ही यह था कि अगर एनटीए बेदाग है, तो परीक्षा क्यों रद्द की गई? असल में, शिक्षा मंत्रालय और सरकार को यह भली-भांति अहसास हो चुका था कि व्यापक पैमाने पर हुए इस लीक के बाद ईमानदारी से परीक्षा देने वाले लाखों छात्रों के साथ न्याय नहीं हो सकता.

चूंकि लीक सवाल परीक्षा से पहले ही हजारों छात्रों तक डिजिटल माध्यमों से पहुंच चुके थे इसलिए पूरी परीक्षा सवालों के घेर में आ गई. पुख्ता सबूतों के बाद सरकार के पास परीक्षा कैंसिल कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया.

व्हिसल ब्लोअर का दावा गलत है?
नीट-यूजी 2026 परीक्षा के बाद एनटीए को शिकायत भेजने वाले कोचिंग टीचर और खुद को व्हिसल ब्लोअर बताने वाले शशिकांत सुथार ने बड़ा दावा किया था. उनके मुताबिक, 3 मई को परीक्षा खत्म होने के बाद पीजी संचालक उनके मकान मालिक राकेश स्वामी एक वायरल ‘गेस पेपर’ लेकर उनके पास पहुंचे थे. जब दोनों ने उस पेपर को देखा तो उन्हें सवालों के लीक होने का शक हुआ. शशिकांत सुथार का दावा है कि इसके बाद वे सीकर स्थित गुरूकृपा कोचिंग के डायरेक्टर के पास पहुंचे.

वहां पूरे मामले पर चर्चा हुई और फिर प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया गया. सुथार के अनुसार, सीकर के तत्कालीन एसपी प्रवीण नायक समेत कुछ अधिकारियों ने यह फैसला लिया कि मामले को केवल स्थानीय स्तर तक सीमित रखने के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाए, ताकि पूरे नेटवर्क की जांच हो सके. इसके बाद जब मामला सामने आया तो फिर देशभर में हंगामा मचा औऱ जांच शुरू हो गई.
 

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By uttu

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