नई दिल्ली. कोलकाता नगर निगम को लेकर राज्य की राजनीति में आज सुबह से ही हलचल मची रही. पिछले हफ्ते निगम सत्र स्थगित होने के बाद शुक्रवार को सत्र कक्ष के बाहर माला रॉय और भाजपा पार्षद सजल घोष की तीखी प्रतिक्रिया ने माहौल को और गर्म कर दिया. इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कालीघाट स्थित अपने कार्यालय में कोलकाता नगर निगम के पार्षदों की अहम बैठक बुलाई, लेकिन बड़ी संख्या में पार्षदों की गैरहाजिरी ने तृणमूल नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी.
कुल 136 पार्षदों में से केवल 96 पार्षद ही इस बैठक में पहुंचे. बताया जा रहा है कि कम से कम 40 पार्षद अनुपस्थित रहे. गैरहाजिर रहने वालों में देबाशीष कुमार, काकुली सेन, बप्पादित्य दासगुप्ता, तारक सिंह, कृष्णा सिंह, अनिंद्य किशोर राउत, एलोरा साहा, सचिन कुमार सिंह, अलोकानंद दास, शांतिरंजन कुंडू, मोनालिसा बनर्जी, मीनाक्षी गांगुली, सुदर्शन मुखर्जी, द्विजेनलाल मुखर्जी, जॉली बोस, जीबन साहा जैसे नाम शामिल हैं. मेयर परिषद के सदस्य देबाशीष कुमार, जीबन साहा और तारक सिंह भी बैठक में नहीं आये. बोरो चेयरमैनों में जुई विश्वास, देवलिना विश्वास, अनिंद्य राउत और सुशांत घोष की भी अनुपस्थिति दर्ज की गई.
बंगाल में लगातार बदल रहे हालात
लगातार बदलते राजनीतिक हालात के बीच नगर पालिकाओं में भी ‘डमाडोल’ जैसी स्थिति बन गई है. ऐसे समय में पार्षदों की अनुपस्थिति ने ममता बनर्जी के लिए नई मुश्किल खड़ी कर दी। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में ममता बनर्जी ने साफ नाराजगी जताते हुए निगम के हालात और हालिया घटनाक्रम पर कड़ा रूख अपनाया.
ममता बनर्जी ने पार्षदों से क्या कहा?
ममता ने कहा कि आज जिस तरह से उन्होंने हमें म्युनिसिपैलिटी में घर में घुसने भी नहीं दिया यह गैर-कानूनी है. बॉबी, आप डोरीना क्रॉसिंग पर धरने की तारीख तय कर लें, पार्षद वहां होंगे. पुलिस केस करेगी, करने दीजिए. अगर पुलिस केस करती है तो पार्टी वकीलों केस लड़ेंगे. यह नहीं चल सकता. यह नियम नहीं है कि सिर्फ नोटिस देने से वे आकर गिरा देंगे. गिराने का एक प्रोसेस होता है. आपको पहले यह साबित करना होगा.
क्या था दीदी का पार्षदों को संदेश
उन्होंने पार्षदों को साफ संदेश देते हुए कहा कि कोई इस्तीफा नहीं देगा. पार्टी उनके साथ है. वे (बीजेपी) उन पर दबाव डालेंगे लेकिन कोई इस्तीफा नहीं देगा. ममता के इस बयान को पार्षदों के बीच फैली असमंजस और दबाव की राजनीति के बीच एक बड़ा संदेश माना जा रहा है. टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी पार्षदों को सख्त हिदायत दी. उन्होंने कहा कि आपके लोगों ने आपको 5 साल के लिए जिताया है. आपको अपना काम करना चाहिए. लोग तय करेंगे कि आपको रखना है या नहीं, BJP नहीं. अभिषेक का यह बयान साफ करता है कि पार्टी पार्षदों से पूरे कार्यकाल तक सक्रिय बने रहने और दबाव की राजनीति के आगे न झुकने की उम्मीद कर रही है.
क्या है बीजेपी का कहना?
दूसरी ओर भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस पर म्युनिसिपल सेक्रेटरी को धमकाने का गंभीर आरोप लगाया है. कमिश्नर से मुलाकात के बाद भाजपा पार्षद सजल घोष ने कहा कि मैं जाने वाले सेक्रेटरी और नए सेक्रेटरी दोनों से मिला. उनसे मिलने आई तृणमूल कांग्रेस की टीम ने सेक्रेटरी को धमकाया. उन्हें डराया-धमकाया और कहा कि अगर वे बाहर गए तो वे इसे देख लेंगे. हम कमीशन से मिले और उनसे ज़रूरी एक्शन लेने को कहा. हमने उनसे पुलिस में शिकायत करने को कहा. हमने उनसे मॉक पार्लियामेंट के नाम पर जो मज़ाक किया गया, उसके खिलाफ एक्शन लेने की रिक्वेस्ट की. उन्होंने कहा कि वे म्युनिसिपल कानून के हिसाब से एक्शन लेंगे. उन्हें नहीं पता था कि आज का सेशन हुआ था.
