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छतरपुर जिले के लवकुश नगर के प्रतापपुर गांव के रहने वाले सीताराम राजपूत जिनकी उम्र तो 78 साल है.लेकिन उम्र के जिस पड़ाव पर आदमी के शरीर को आराम की जरुरत होती है, उस आयु में उन्होंने अकेले ही डेढ साल की कड़ी मेहनत के बाद पथरीली जमीन पर कुआं खोद डाला.
छतरपुर जिले के लवकुश नगर के प्रतापपुर गांव के रहने वाले सीताराम राजपूत जिनकी उम्र तो 78 साल है.लेकिन उम्र के जिस पड़ाव पर आदमी के शरीर को आराम की जरुरत होती है, उस आयु में उन्होंने अकेले ही डेढ साल की कड़ी मेहनत के बाद पथरीली जमीन पर कुआं खोद डाला. जिससे वह इलाके के लोगों के लिए ‘दशरथ मांझी’ बन गए हैं. घर में बोरिंग के पैसे न नहीं थे. लेकिन पानी निकालने की जिद थी तो खुद ही अकेले कुआं खोद डाला. हालांकि, सरकार की आर्थिक मदद न मिलने से कुआं बंध नहीं पाया. उनका कहना है कि अभी भी मददग मिलेगी तो फिर से पानी निकाल दूंगा.
78 वर्षीय सीताराम राजपूत बताते हैं कि साल 2018 में मैंने अपने खेत में कुआं खोदा था. घर में इतने पैसे नहीं थे कि मशीन या मजदूरों से खुदवाता इसलिए मैंने ही कुआं खोदने का सोच लिया था. मैंने सोचा कि जब कुआं खुद जाएगा तो कुआं बंधाने के लिए मेरे पास फसल है. कुआं तो मैंने खोद दिया लेकिन फसल नहीं अच्छी हुई. जहां फसल का भाव कम था वहीं कुआं में लगने वाला मटेरियल महंगा था. इसके बाद कलेक्टर भी आए और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी मिले. लेकिन पैसों की मदद कहीं से नहीं मिली. आज भी अपने कुआं को देखता हूं तो आंसू गिरने लगते हैं क्योंकि कुआं बंधाने के मेरे पास पैसे नहीं हैं. मैंने एक सपना देखा था कि कुआं के पानी से खेत में सिंचाई करूंगा. इसी कुएं का पानी पिऊंगा.
18 महीने में निकाला जमीन से पानी
सीताराम बताते हैं कि मैंने इस कुएं को लगातार 18 महीने तक खोदा और पानी भी निकाला लेकिन घर में पैसों की कमी के चलते कुआं बंध नहीं पाया और आज भी खुदा ही डला है. सीताराम बताते हैं कि जिले भर में कुआं की चर्चा तो बहुत हुई. उस समय छतरपुर तत्कालीन कलेक्टर को पता चला तो वह भी हमारे गांव में मेरे इस कुआं को देखने आए थे. जब उनसे पैसों की मदद के लिए बोला तो उन्होंने कहा आपके पास जमीन है. इसलिए आप कुआं खुदवाने के लिए सक्षम हैं. सीताराम बताते हैं कि मेरा कुआं देखने भोपाल से भी मीडिया वाले आए थे. जब ये खबर पूरे मध्यप्रदेश में चली तो पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी मुझसे मिलने छतरपुर आए थे .उन्होंने फोटो भी खिंचवाई और 2 लाख रुपए की मदद करने का आश्वासन भी दिया लेकिन आज तक मिले नहीं.
आज भी कुआं खोदकर पानी निकाल देंगे
सीताराम बताते हैं कि भले ही आज 78 साल का हो गया हूं. लेकिन शरीर में क्षमता इतनी है कि आज भी इस कुआं को 22 फीट खोदकर पानी निकाल सकता हूं.1 साल ही क्यों न लग जाए लेकिन पानी निकालकर रहूंगा. लेकिन कुआं बांधने के लिए पैसों की मदद मिलनी चाहिए. छतरपुर के दशरथ मांझी कहे जाने वाले सीताराम राजपूत की प्रशंसा पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण भी कर चुके हैं .
