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Thyroid Risk:बार-बार हो रहा है मिसकैरेज? कहीं थायरॉइड की बीमारी तो नहीं है इसका कारण – World Thyroid Day 2026 Thyroid Disorder Increase Risk Of Infertility And Miscarriage

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मां बनना हर महिला के जीवन का सबसे सुखद अनुभव होता है। हालांकि जिस तरह से लाइफस्टाइल में गड़बड़ी और पर्यावरणीय समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, ऐसे में लाखों महिलाओं के लिए ये सपना, सपना ही रह गया है। गर्भधारण में कठिनाई, बार-बार गर्भपात जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना ऐसे मरीजों की भीड़ देखी जा सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बार-बार मिसकैरेज होने या लंबे समय तक कोशिश के बावजूद गर्भधारण न हो पाने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि जिन महिलाओं में थायरॉइड की समस्या होती हैं उनमें इस तरह की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं तो खानपान ठीक रखने के साथ तनाव कंट्रोल रखना जरूरी है। इसके साथ थायरॉइड की समस्याओं से बचाव करते रहना भी आवश्यक है। आइए जानते हैं कि कैसे थायरॉइड विकार आपके प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं?




World thyroid day 2026 thyroid disorder increase risk of infertility and miscarriage

थायरॉइ़ड की बढ़ती समस्या
– फोटो : Adobe Stock


थायरॉइड की बीमारी और इसके खतरे

अध्ययनों से पता चलता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायरॉइड की बीमारी का खतरा ज्यादा होता है।

 

  • हाइपोथायरॉइडिज्म (थायरॉइड हार्मोन की कमी) का सीधा असर महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर पड़ सकता है। 
  • अनियंत्रित थायरॉइड की समस्या के कारण पीरियड्स की अनियमितता बढ़ जाती है जिससे ओव्यूलेशन प्रभावित होता है और गर्भधारण में कठिनाईयां आ सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में बच्चे के दिमाग और शरीर के विकास के लिए भी मां का थायरॉइड हार्मोन बेहद जरूरी होता है। अगर यह हार्मोन संतुलित न हो, तो भ्रूण के विकास पर असर पड़ सकता है।

(किन कमियों से होती है थायरॉइड की बीमारी? आप भी हैं शिकार तो जानिए कैसे मिलेगा आराम)


World thyroid day 2026 thyroid disorder increase risk of infertility and miscarriage

इंफर्टिलिटी की समस्या
– फोटो : Freepil.com


स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महिलाएं अक्सर अत्यधिक थकान, वजन बढ़ने, बाल झड़ने, मूड स्विंग्स और अनियमित पीरियड्स जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन कई बार ये थायरॉइड की समस्याओं की भी संकेत हो सकता है। अगर समय रहते जांच और सही इलाज से थायरॉइड को कंट्रोल न किया जाए तो इसका असर गर्भधारण पर भी पड़ने का खतरा रहता है।

प्रेग्नेंसी में आ सकती हैं दिक्कतें

थायरॉइड हार्मोन में गड़बड़ी का असर सीधे महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। 

 

  • हाइपोथायरॉइडिज्म के कारण शरीर में अंडा बनने और निकलने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे गर्भधारण में परेशानी आती है।
  • थायरॉइड की समस्या महिलाओं में पीरियड्स को अनियमित बना देती है। 
  • कई मामलों में थायरॉइड डिसऑर्डर शरीर में प्रोलैक्टिन हार्मोन बढ़ा देता है, जो ओव्यूलेशन को रोक सकता है।
  • यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी महिलाओं को प्रेग्नेंसी की प्लानिंग के समय डॉक्टर से मिलकर थायरॉइड टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।


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गर्भपात होने का खतरा
– फोटो : Freepik.com


थायरॉइड के कारण गर्भपात का भी खतरा

जिन महिलाओं में थायरॉइड की समस्या होती है उनमें बार-बार मिसकैरेज यानी गर्भपात होने का खतरा भी अधिक रहता है।

 

  • हाइपोथायरॉइडिज्म का गर्भावस्था को बनाए रखने वाले हार्मोनल सिस्टम पर असर पड़ता है। 
  • जिन महिलाओं का थायरॉइड-स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) लेवल ज्यादा होता है, उनमें गर्भपात का खतरा सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक देखा गया है।
  • थायरॉइड हार्मोन में गड़बड़ी होने पर भ्रूण सही तरह से विकसित नहीं हो पाता। कई मामलों में महिला को गर्भधारण तक हो सकता है।


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थायरॉइ़ड की जांच
– फोटो : Adobe Stock


प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं तो जान लीजिए ये बातें

अमेरिकन थायरॉइड एसोसिएशन के अनुसार, प्रेग्नेंसी प्लान करने वाली महिलाओं में टीएसएच लेवल टेस्ट जरूर कराना चाहिए। इसे 2.5 mIU/L से कम रखने वाले उपाय भी जरूरी हैं। अगर ये बढ़ा रहता है तो समय पर इलाज शुरू करने से हेल्दी प्रेग्नेंसी की संभावना काफी बढ़ सकती है।

थायरॉइड को कंट्रोल करने के लिए आहार में आयोडीन, सेलेनियम, जिंक और आयरन जैसे पोषक तत्वों का संतुलित सेवन जरूरी माना जाता है। 

 

  • आयोडीनयुक्त नमक, अंडे, डेयरी प्रोडक्ट्स, नट्स और हरी सब्जियां थायरॉइड हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकती हैं। 
  • तनाव भी थायरॉइड हार्मोन्स को प्रभावित कर सकता है। इसलिए योग, मेडिटेशन और पर्याप्त नींद जरूरी मानी जाती है। 
  • मोटापा के शिकार लोगों थायरॉइड विकारों का जोखिम अधिक होता है। वजन कंट्रोल के लिए नियमित व्यायाम जरूर करें।

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स्रोत:

Recurrent pregnancy loss in patients with thyroid dysfunction

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।


By uttu

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