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Taliban minister meet Jaishankar:पाक पर ट्रेड बैन लगाकर भारत पहुंचे ता‍ल‍िबान मंत्री, यह तस्‍वीर आस‍िम मुनीर की को चुभेगी

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तालिबान सरकार के उद्योग और वाणिज्य मंत्री नूरुद्दीन अजीजी भारत दौरे पर हैं. उन्‍होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ लंबी बातचीत की. यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब तालिबान ने हाल ही में अपने व्यापारियों से साफ कह दिया था कि वे पाकिस्तान के साथ हर तरह का व्यापार बंद करें. उन्‍होंने तीन महीने की डेडलाइन भी तय कर दी थी. इसके बाद उनका एक लंबी चौड़ी टीम के साथ भारत आना काफी मायने रखता है. जयशंकर के साथ उनकी जो तस्‍वीर सामने आई, उसमें जो गर्मजोशी दिखी, वह पाक‍िस्‍तानी आर्मी चीफ आस‍िम मुनीर और वहां के हुक्‍मरानों की सारी स्‍ट्रैटजी फेल करने वाली है.

तालिबान मंत्री के दिल्ली पहुंचने की तस्वीर जैसे ही सामने आई, दक्षिण एशियाई रणनीति पर नजर रखने वालों ने इसे सीधे पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर की रणनीति के लिए झटका बताया. क्योंकि पाकिस्तान अफगानिस्तान पर आर्थिक निर्भरता का दबाव बनाकर उसे अपने पाले में रखने की कोशिश कर रहा था, पर भारत के साथ बढ़ते संबंध इस दबाव को कमजोर कर रहे हैं.

भारत के साथ रिश्तों में नया अध्याय

बुधवार को पहली बार आधिकारिक भारत यात्रा पर पहुंचे नूरुद्दीन अजीजी निवेश बढ़ाने और ट्रेड विस्तार जैसे मुद्दों पर बातचीत करने आए हैं. यह ऐसे समय हो रहा है जब भारत ने पिछले महीने 2021 के बाद बंद पड़ा अपना काबुल दूतावास फिर से खोल दिया था. इस कदम ने स्पष्ट संदेश दिया था कि नई दिल्ली तालिबान से सीमित लेकिन व्यावहारिक जुड़ाव आगे बढ़ाने के लिए तैयार है, ताकि चीन को अफगानिस्तान में बढ़त न मिले.
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यात्रा का मकसद क्‍या

अफगानिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि अजीजी भारतीय वाणिज्य मंत्री, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर सहित भारतीय व्यापारिक समुदाय के साथ मुलाकात करेंगे. मंत्रालय के बयान के मुताबिक, इन बैठकों में आर्थिक साझेदारी बढ़ाने, व्यापार आसान करने, संयुक्त निवेश के मौके बनाने और क्षेत्रीय ट्रांज‍िट रूट्स में अफगानिस्तान की भूमिका मजबूत करने पर बातचीत होगी.

भारत विकल्प के रूप में उभर रहा

  • पिछले कुछ हफ्तों में अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर हिंसक झड़पों में कई लोगों की मौत हुई. तनाव के चलते पाकिस्तान ने सीमा बंद कर दी, जिससे अफगानिस्तान के व्यापार पर भारी असर पड़ा. पहले जहाँ अफगानिस्तान का सबसे ज़्यादा व्यापार पाकिस्तान के जरिए होता था, अब यह निर्भरता टूट रही है.
  • अफगानिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले छह महीनों में ईरान के रास्ते उसका व्यापार 1.6 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो पाकिस्तान के साथ 1.1 बिलियन डॉलर के मुकाबले कहीं आगे है. इससे तालिबान सरकार को पता चला कि पाकिस्तान पर निर्भरता आर्थिक और राजनीतिक दोनों रूप से नुकसानदेह है. ऐसे में भारत एक विश्वसनीय और स्थिर व्यापार साझेदार के रूप में फिर से सामने आया है.
  • भारत पहले से ही चाबहार पोर्ट का संचालन करता है, जो अफगानिस्तान को बिना पाकिस्तान से गुजरे सीधा दुनिया से जोड़ता है. अमेरिका ने हाल ही में भारत को चाबहार संचालन के लिए छह महीने की छूट दी है, जिससे तालिबान की पाकिस्तान पर निर्भरता और कम हो जाएगी.

जयशंकर-अजीजी की मुलाकात में छिपा बड़ा संकेत

दिल्ली में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तालिबान मंत्री अजीजी का स्वागत किया और दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की. जयशंकर ने साफ कहा कि भारत अफगान लोगों की प्रगति और समृद्धि का समर्थन करता है. मीटिंग में चाबहार पोर्ट की गतिविधियों को और सक्रिय करने, निवेश बढ़ाने , व्यापार आसान करने, दोनों देशों के बीच लोगों के आने-जाने और व्यापार वीजा में ढील पर बात हुई. पूर्व में बनी संयुक्त वर्किंग ग्रुप को फिर से सक्रिय करने पर सहमत‍ि बनी. संयुक्त चैंबर ऑफ कॉमर्स बनाने पर भी जोर द‍िया गया. अफगानिस्तान के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता अखुंदज़ादा अब्दुल सलाम जवद ने पुष्टि की कि दोनों देशों में व्यापारिक अटैची नियुक्त करने की भी योजना है, ताकि व्यापार संवाद लगातार चल सके.

जरूरत और अवसर दोनों

अफगानिस्तान एक लैंडलॉक्ड देश है और उसके पास अपना समुद्री बंदरगाह नहीं है. पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के कारण उसे नई सप्लाई लाइनों की बहुत जरूरत है. अजीजी की यात्रा इसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. यह अफगान‍िस्‍तान के साथ भारत के ल‍िए जरूरत और अवसर दोनों है.

अफगान आर्थिक विशेषज्ञ जबीउल्लाह इस्लामी ने टोलो न्‍यूज से बातचीत में कहा, भारत चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम करता है: बिजली, टेक्नोलॉजी, जल प्रबंधन और औद्योगिक उत्पादन. अफगानिस्तान को इन सभी की बेहद आवश्यकता है. बदले में भारत को अफगानिस्तान के ताजे और सूखे मेवे की भारी मांग है.

एक अन्य विशेषज्ञ क़ुतबुद्दीन याकूबी ने कहा, यह यात्रा भविष्य के आर्थिक संबंधों को सकारात्मक दिशा दे सकती है और दोनों देशों के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक रिश्तों को मजबूत कर सकती है.

By uttu

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