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Akshaya Tritiya 2026: कब मनाई जाएगी अक्षय तृतीया? इस दिन सोना खरीदना क्यों है शुभ – akshaya tritiya 2026 date puja muhurat gold buying time tisz

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Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. यह दिन विशेष रूप से धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है.  इस अवसर पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है.  मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल कभी समाप्त नहीं होता, बल्कि जीवनभर अक्षय बना रहता है. 

इस दिन सोना, आभूषण या धातु के बर्तन खरीदना बेहद शुभ माना जाता है. साथ ही, अक्षय तृतीया को “अबूझ मुहूर्त” भी कहा जाता है, यानी इस दिन किसी भी मांगलिक कार्य जैसे विवाह आदि के लिए अलग से शुभ समय देखने की आवश्यकता नहीं होती.  ऐसे में आइए जानते हैं कि वर्ष 2026 में यह पर्व कब मनाया जाएगा, पूजा का सही समय क्या रहेगा और इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएं क्या हैं. 

अक्षय तृतीया 2026 की तिथि
पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल 2026 को सुबह 10:45 बजे से प्रारंभ होगी , यह 20 अप्रैल 2026 को सुबह 7:49 बजे तक रहेगी. चूंकि 19 अप्रैल को दोपहर में तृतीया तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए इसी दिन अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाएगा. 

पूजा का शुभ समय
अक्षय तृतीया पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 10:49 बजे से शुरू होकर दोपहर 12:20 बजे तक रहेगा. इस अवधि में मां लक्ष्मी की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. 

सोना खरीदने का शुभ समय
इस दिन सोना खरीदने का उत्तम समय 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे से आरंभ होकर 20 अप्रैल की सुबह 5:51 बजे तक रहेगा.  इस दौरान खरीदारी करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है. 

सोना को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन सोना खरीदना घर में धन, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के आगमन का संकेत माना जाता है.  मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर खरीदा गया सोना कभी घटता नहीं, बल्कि समय के साथ बढ़ता और शुभ फल देता है. इसी वजह से इस दिन लोग निवेश के रूप में भी सोना खरीदना पसंद करते हैं. 

अक्षय तृतीया का महत्व और कारण
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में अवतार लिया था.  यही दिन सतयुग और त्रेतायुग के आरंभ का भी प्रतीक माना जाता है.  साथ ही, कहा जाता है कि इसी दिन कुबेर ने भगवान शिव की कठोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया था, जिसके फलस्वरूप उन्हें देवताओं का कोषाध्यक्ष बनने का आशीर्वाद प्राप्त हुआ. इन सभी कारणों से अक्षय तृतीया का विशेष धार्मिक महत्व है. 
 

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By uttu

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