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CJI BR Gavai: सीजेआई बीआर गवई ने बुलडोजर जस्टिस के खिलाफ दिए अपने फैसले को सबसे अहम फैसला माना है. अपने आखिरी कार्यदिवस पर जाते-जाते सीजेआई गवई ने कहा कि अगर मुझसे मेरे द्वारा लिखा गया सबसे जरूरी फैसला चुनने के लिए कहा जाए तो वह बेशक बुलडोजर जस्टिस के खिलाफ वाला होगा.
सीजेआई बी.आर. गवई का शुक्रवार को आखिरी कार्यदिवस था. (फाइल फोटो) CJI BR Gavai: सीजेआई बीआर गवई का लास्ट वर्किंग डे शुक्रवार को था. आखिरी कार्य दिवस पर जाते-जाते सीजेआई बीआर गवई बता गए कि उनका कौन सा फैसला सबसे अहम था. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के फेयरवेल फंक्शन में CJI बीआर गवई ने शुक्रवार को कहा कि बुलडोजर जस्टिस के खिलाफ दिया उनका फैसला सबसे अहम था. इसके बाद राज्यों को नौकरी में रिजर्वेशन के लिए SC और ST को सब-क्लासिपाइ करने की इजाजत देने वाला फैसला था.
टीओआई की खबर के मुताबिक, निवर्तमान सीजेआई गवई ने कहा कि अगर उनसे उनके द्वारा लिखा गया सबसे जरूरी फैसला चुनने के लिए कहा जाए तो वह बेशक बुलडोजर जस्टिस के खिलाफ वाला होगा. उन्होंने कहा, ‘बुलडोजर जस्टिस कानून के खिलाफ है. सिर्फ इसलिए किसी व्यक्ति का घर कैसे गिराया जा सकता है क्योंकि उस पर किसी जुर्म का आरोप है या वह उसके लिए दोषी है? उसके परिवार और माता-पिता की क्या गलती है? रहने की जगह का अधिकार एक फंडामेंटल राइट है.’
बुलडोजर न्याय पर क्या कहा
चीफ जस्टिस गवई ने यह भी कहा कि वे अपने फैसले से संतुष्ट हैं क्योंकि उन्होंने ‘बुलडोजर न्याय’ के खिलाफ निर्णय दिया. इससे पहले मॉरीशस में भी उन्होंने बुलडोजर न्याय पर टिप्पणी की थी. चीफ जस्टिस गवई ने बुलडोजर एक्शन पर अपने ही 2024 के फैसले का जिक्र किया था, जिसे ‘बुलडोजर केस’ के नाम से जाना जाता है. इस फैसले के बारे में बात करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा, ‘इस फैसले में एक स्पष्ट संदेश दिया गया है कि भारतीय न्याय व्यवस्था कानून के शासन से चलती है, बुलडोजर के शासन से नहीं.’
आखिरी दिन क्या कहा
वहीं, निवर्तमान प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई ने शुक्रवार को कहा कि वह वकील और न्यायाधीश के रूप में करीब चार दशक की अपनी यात्रा के समापन पर संतोष और संतृप्ति की भावना के साथ और ‘न्याय के विद्यार्थी’ के रूप में न्यायालय छोड़ रहे हैं. न्यायमूर्ति गवई ने अपने विदाई समारोह के दौरान एक रस्मी पीठ के समक्ष कहा, ‘’आप सभी को सुनने के बाद, और खासकर अटॉर्नी जनरल (आर वेंकटरमणि) और कपिल सिब्बल की कविताओं और आप सभी की गर्मजोशी भरी भावनाओं को जानने के बाद, मैं भावुक हो रहा हूं.’ इस पीठ में प्रधान न्यायाधीश नियुक्त हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन भी थे.
भावुक दिखे सीजेआई
भावुक दिख रहे प्रधान न्यायाधीश ने विधि अधिकारियों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और युवा वकीलों से खचाखच भरे अदालत कक्ष में कहा, ‘जब मैं इस अदालत कक्ष से आखिरी बार निकल रहा हूं तो पूरी संतुष्टि के साथ निकल रहा हूं, इस संतोष के साथ कि मैंने इस देश के लिए जो कुछ भी कर सकता था, वह किया है…धन्यवाद. बहुत-बहुत धन्यवाद.’ कार्यवाही के दौरान, अधिवक्ताओं ने न्यायमूर्ति गवई की न्यायपालिका पर छोड़ी गई छाप को याद किया. न्यायमूर्ति गवई, केजी बालकृष्णन के बाद दूसरे दलित और पहले बौद्ध प्रधान न्यायाधीश हैं.

Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho…और पढ़ें
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