बिहार में विपक्ष को अब सोचना ही पड़ेगा। खासकर, तेजस्वी यादव और कांग्रेस को। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम में साफ दिख गया कि राजद-कांग्रेस के साथ होने का कोई फायदा नहीं है। अब राज्यसभा चुनाव 2026 के परिणाम से यह साफ हो रहा है कि कांग्रेस को साथ रखने पर राजद को विचारना ही पड़ेगा। तेजस्वी यादव ने पांच में से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए वह भी कर दिया, जो विधानसभा में नहीं किया था- AIMIM को साथ लाना। फिर भी, हार का सिलसिला नहीं थमा। एक सीट तेजस्वी जीत जाते तो उनके लिए बड़ी जीत होती, लेकिन अपने एक और कांग्रेस के तीन विधायकों ने उनके वजूद पर सवाल खड़ा कर दिया है।
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परिणाम से पहले हार देख निकल गए थे तेजस्वी
चुनाव में धन-बल का ‘प्रयोग’ होगा, यह पहले ही कहा जा रहा था। पांचवीं सीट पर जीत के लिए किसी भी पक्ष को ‘मैनेज’ करना ही था। तेजस्वी यादव ने असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के पांच और मायावती की बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक को साथ कर लिया। इसके बाद उन्हें सिर्फ पहले से महागठबंधन में रहे अपने विधायकों को साथ रखना था। वह अपने एक विधायक पर काबू नहीं कर सके। इसके साथ ही कांग्रेस के तीन विधायक गायब रहे। मतलब, होटल में नजर के सामने रखने की पूरी योजना बेकार गई। नतीजा हार। और, उससे पहले हार स्वीकारते हुए तेजस्वी यादव का विधानसभा से निकल जाना।
हार के बाद राजद विधायक ने क्या कहा?
महागठबंधन की ओर से राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने कहा कि अब तो पूरा देश जान गया कि कौन धनबल का प्रयोग करता है? भाजपा ने धनबल का प्रयोग किया है। यह छल किया गया है। यह जनता का अपमान है। महागठबंधन के चार विधायकों के नहीं पहुंचने पर कुमार सर्वजीत ने कहा कि मतदान प्रक्रिया में भाग नहीं लेने वालों विधायकों ने जनता के साथ धोखा दिया है। उनके ऊपर जिंदगी भर एक्स एमएलए का टैग लग जाएगा।