Falta Election Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान के नतीजे साफ हो गए हैं. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रचंड जीत हुई है. भाजपा उम्मीदवार देबांशु पांडा की एक लाख 9 हजार 21 वोटों से जीत दर्ज की. पार्टी की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का पहला रिएक्शन आया है. शुभेंदु ने इस चुनावी नतीजे को बंगाल के राजनीतिक भविष्य का एक बड़ा संदेश बताते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और अभिषेक बनर्जी पर करारा हमला बोला है. साथ ही उन्होंने अभिषेक बनर्जी को बाघ की खाल में बिल्ली, पैरासूट से लैंड किया सेनापति और डायमंड हॉर्बर मॉडल को टीएमसी हार-बार बताया था.
मतगणना पूरी होने से पहले ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक लंबा पोस्ट लिखा. उन्होंने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बहुचर्चित ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ पर तंज कसते हुए उसे एक नया नाम दिया. शुभेंदु ने लिखा, ‘कुख्यात ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ अब टीएमसी का हार-बार (लगातार हारने वाला) मॉडल बन जाएगा!!!’ उन्होंने फाल्टा के मतदाताओं को उनकी इस प्रचंड जीत के लिए सिर झुकाकर नमन किया. अधिकारी ने कृतज्ञता व्यक्त करते हुए लिखा, ‘मैं फाल्टा की जनता-जनार्दन का आभारी हूं. मैंने फाल्टा के मतदाताओं से हमारे उम्मीदवार को एक लाख वोटों से जिताने की अपील की थी, और मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि जीत का यह अंतर एक लाख आठ हजार को भी पार कर गया है. हम ‘सोनार फाल्टा’ (स्वर्ण फाल्टा) बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और विकास के माध्यम से जनता का यह कर्ज चुकाएंगे.’
टीएमसी को बताया ‘माफिया कंपनी’
अपने कड़े शब्दों वाले पोस्ट में शुभेंदु ने टीएमसी को पूरी तरह से सिद्धांतहीन और आदर्शहीन पार्टी करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता हाथ से जाते ही इस पार्टी की कंकाल जैसी असली हालत सबके सामने आ गई है. शुभेंदु ने कहा, ‘यह एक माफिया कंपनी में बदल चुकी थी. राज्य की शक्तियों का घोर दुरुपयोग करके सरकारी खजाने की लूट, जनता की गाढ़ी कमाई की उगाही (तोलाबाजी), सिंडिकेट और ‘थ्रेट कल्चर’ (धमकी संस्कृति) के जरिए इस पार्टी के नेताओं ने खुद को भगवान समझ लिया था.’
पैराशूट से उतरा फर्जी सेनापति
अभिषेक बनर्जी का नाम लिए बिना शुभेंदु अधिकारी ने उन पर सीधा और व्यक्तिगत हमला किया. उन्होंने लिखा, ‘पैराशूट से उतरकर ‘सेनापति’ का तमगा पाने वाला यह एक जालसाज है. ऐसा कोई अपराध नहीं है जो उसने ना किया हो.’ शुभेंदु ने उन्हें ‘बाघ की खाल पहने बिल्ली’ करार देते हुए कहा कि अपने आपराधिक सिंडिकेट को स्थापित करने के लिए लोकतंत्र का गला घोंटने में इसने कोई कसर नहीं छोड़ी. शुभेंदु ने याद दिलाया कि कैसे पिछले चुनावों को मजाक बनाकर टीएमसी ने इसी विधानसभा क्षेत्र से डेढ़ लाख वोटों की लीड ले ली थी. उन्होंने कहा, ’15 साल बाद जब यहां के लोगों को अपनी मर्जी से अपना वोट डालने की आज़ादी मिली, तब जाकर असली सच्चाई सबके सामने आई है. जनता ने आतंकवाद और भ्रष्टाचार के खिलाफ वोट दिया है.’
अब ‘नोटा’ से होगा टीएमसी का मुकाबला
अपने लंबे पोस्ट के अंत में शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी के भविष्य की भविष्यवाणी भी कर दी. उन्होंने दावा किया कि टीएमसी के पतन की यह तो सिर्फ शुरुआत है. उन्होंने लिखा, ‘अस्वीकार किए जाने की एक लंबी यात्रा अब शुरू हो चुकी है. आने वाले दिनों में टीएमसी नेतृत्व को चुनावों में ‘नोटा’ (NOTA) के खिलाफ भी कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा.’ उन्होंने याद दिलाया कि सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस पहले ही त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में नोटा से भी पीछे रहकर हार का स्वाद चख चुकी है और बहुत जल्द पश्चिम बंगाल की जनता भी इस दिलचस्प लड़ाई को अपनी आंखों से देखेगी.
फाल्टा चुनाव परिणामों के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ को क्या नया नाम दिया?
फाल्टा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी ने अभिषेक बनर्जी के कुख्यात ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ पर तंज कसते हुए उसे ‘टीएमसी का हार-बार’ (लगातार हारने वाला) मॉडल करार दिया है.
शुभेंदु अधिकारी ने अभिषेक बनर्जी पर बिना नाम लिए क्या तीखा प्रहार किया?
शुभेंदु अधिकारी ने अभिषेक बनर्जी का नाम लिए बिना उन्हें ‘पैराशूट से उतरा हुआ जालसाज सेनापति’ और ‘बाघ की खाल पहने बिल्ली’ बताया, जिसने सिंडिकेट चलाने के लिए लोकतंत्र का गला घोंटा.
फाल्टा के मतदाताओं को धन्यवाद देते हुए शुभेंदु अधिकारी ने क्या वादा किया?
शुभेंदु अधिकारी ने 1 लाख 8 हजार से अधिक वोटों से बीजेपी उम्मीदवार को जिताने के लिए फाल्टा की जनता का सिर झुकाकर आभार व्यक्त किया और वादा किया कि वे विकास के जरिए ‘सोनार फाल्टा’ (स्वर्ण फाल्टा) बनाएंगे.
टीएमसी के भविष्य को लेकर शुभेंदु अधिकारी ने क्या भविष्यवाणी की है?
शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि टीएमसी के पतन की शुरुआत हो चुकी है और आने वाले समय में टीएमसी को चुनावों में ‘नोटा’ (NOTA) से भी हार का सामना करना पड़ेगा, जैसा कि त्रिपुरा में हो चुका है.
