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Fatima Bibi: जस्टिस मीरा साहिबा फातिमा बीबी सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज और पहली मुस्लिम महिला न्यायाधीश थीं. उन्हें पद्म भूषण सहित कई सम्मान मिले और 2023 में उनका निधन हुआ.
फातिमा बीवी 1989 में सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज नियुक्त की गईं.Fatima Bibi: जस्टिस मीरा साहिब फातिमा बीबी ने अपने लंबे और शानदार करियर के दौरान देशभर में महिलाओं के लिए एक आदर्श और नजीर के रूप में काम किया है. फातिमा बीवी का नाम ज्यूडिशरी ही नहीं बल्कि देश के इतिहास में भी स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हैं. वह किसी भी उच्च न्यायपालिका में नियुक्त होने वाली पहली मुस्लिम महिला न्यायाधीश थीं. साथ ही एशियाई देशों में सर्वोच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश का खिताब भी उन्हीं के नाम है. फातिमा बीवी को आज के दिन यानी 5 नवंबर, 1989 को सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज बनने का गौरव हासिल हुआ था. वो इस पद तक पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला थीं.
व्यक्तिगत पृष्ठभूमि, शिक्षा और प्रेरणा
उनका जन्म 30 अप्रैल 1927 को केरल के पथनमथिट्टा में हुआ था. उनके पिता का नाम अन्नावीतिल मीरा साहिब था, जो एक सरकारी कर्मचारी थे. उनकी माता का नाम खडेजा बीबी था. फातिमा बीवी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा 1943 में पथनमथिट्टा के कैथोलिकेट हाईस्कूल से पूरी की. इसके बाद उन्होंने तिरुवनंतपुरम के यूनिवर्सिटी कॉलेज से बीएससी की डिग्री प्राप्त की और फिर गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की. उनके पिता अन्नावीतिल मीरा साहिब भारत की पहली महिला जज (और देश के किसी भी हाई कोर्ट की पहली महिला जज) जस्टिस अन्ना चांडी से बहुत प्रभावित थे. इसी प्रेरणा के चलते उन्होंने फातिमा बीवी को कानून की पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित किया.
कानूनी करियर की शुरुआत
1950 में कानून की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया की परीक्षा में टॉप किया. यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह पहली महिला थीं. इस सफलता के लिए उन्हें बार काउंसिल का स्वर्ण पदक भी मिला था. उसी साल, उन्होंने 14 नवंबर 1950 को केरल में निचली अदालत में वकालत करना शुरू कर दिया. फातिमा बीवी ने 1958 में केरल अधीनस्थ न्यायिक सेवाओं में मुंसिफ के रूप में अपना काम शुरू किया. अपनी योग्यता के बल पर वह 1983 में केरल हाई कोर्ट की जज बनीं. इस अवधि में,उन्होंने दंगा और हत्या जैसे आपराधिक मामलों के साथ-साथ दीवानी मुकदमों की भी सुनवाई की. वह 6 अक्टूबर 1986 को केरल हाई कोर्ट से रिटायर हुईं.
सुप्रीम कोर्ट में ऐतिहासिक नियुक्ति
रिटायरमेंट के मात्र छह महीने के भीतर उन्हें सुप्रीम कोर्ट की जज नियुक्त किया गया, जिससे वह यह पद हासिल करने वाली पहली महिला बन गईं. एक साक्षात्कार में उन्होंने इस ऐतिहासिक क्षण पर टिप्पणी करते हुए कहा था, “मैंने दरवाजा खोल दिया है.” उनका मानना था कि उनके बाद अब सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों के लिए रास्ता खुल गया है. उन्होंने न्यायपालिका में, विशेष रूप से उच्च न्यायपालिका में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की कमी पर भी चिंता व्यक्त की थी. फातिमा बीवी उच्च न्यायपालिका में महिलाओं के लिए आरक्षण की पक्षधर थीं. उनका दृढ़ विश्वास था कि आरक्षण लागू होने से अधिक महिलाएं न्यायपालिका का हिस्सा बनेंगी. उन्होंने यह भी कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए कई सक्षम महिलाएं उपलब्ध हैं, जिनकी नियुक्ति पर विचार किया जा सकता है.
रिटायरमेंट के बाद की भूमिकाएं
फातिमा बीवी 1992 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुईं. इसके बाद, उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया. वह 1993 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सदस्य बनीं, केरल पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष नियुक्त की गईं. वह 25 जनवरी 1997 को तमिलनाडु की राज्यपाल नियुक्त की गईं. पिछले साल तक सुप्रीम कोर्ट ने अपने इतिहास में कुल 276 न्यायाधीश देखे हैं. उल्लेखनीय बात यह है कि इनमें से केवल 11 न्यायाधीश महिलाएं रही हैं. यह अब तक नियुक्त सभी न्यायाधीशों का मात्र चार फीसदी है.
राजीव गांधी के हत्यारों की दया याचिका की खारिज
उन्होंने राज्यपाल के तौर पर राजीव गांधी हत्याकांड में चार दोषियों की दया याचिका को खारिज कर दिया था. वहीं, 2001 में उन्होंने अन्नाद्रमुक महासचिव जयललिता को मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया था. उनके इस फैसले की काफी आलोचना हुई थी. दरअसल, तब जयललिता को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाए जाने पर चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था.
मिले कई अवार्ड्स
हालांकि, बाद में फातिमा बीवी ने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन जजों से बातचीत करने के बाद ये फैसला लिया था. मामले ने तूल पकड़ा तो फातिमा बीवी ने इस्तीफा दे दिया. फातिमा बीवी को 1990 में डी. लिट और महिला शिरोमणि पुरस्कार मिला था. उन्हें भारत ज्योति पुरस्कार और यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था. 2023 में उन्हें पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया. फातिमा बीवी ने उसी साल 23 नवंबर को 96 साल की उम्र में अंतिम सांस ली.
