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India Losses Iran War | Iran War India Impact : करे इजरायल-अमेर‍िका, भुगते भारत’, ब्रह्मा चेलानी ने ईरान जंग में होने वाले नुकसान ग‍िनाए

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‘करे इजरायल-अमेर‍िका, भुगते भारत’, ब्रह्मा चेलानी ने ईरान जंग के नुकसान ग‍िनाए

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ईरान जंग ज‍ितने द‍िन ख‍िंचेगी, भारत के ल‍िए आफत बढ़ेगी. यह बात सामर‍िक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी ने कही है. उन्‍होंने ईरान जंग से भारत को होने वाले नुकसान के बारे में ड‍िटेल जानकारी शेयर की है.

'करे इजरायल-अमेर‍िका, भुगते भारत', ब्रह्मा चेलानी ने ईरान जंग के नुकसान ग‍िनाएZoom

तेहरान को कबाड़ में तब्‍दील कर द‍िया…

इजरायल-ईरान जंग ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं. लेकिन इसकी सबसे भारी कीमत भारत को चुकानी पड़ सकती है. भारत की सप्‍लाई चेन टूटने का खतरा है. गैस से लेकर तेल तक महंगा होगा. रास्‍ते बंद हुए तो एक्‍सपोर्ट इंपोर्ट पर बुरा असर पड़ना तय है. यही सब देखकर कूटनीत‍िक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी कह रहे क‍ि युद्ध भले ही डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू लड़ रहे हों, लेकिन इसका सीधा और सबसे बुरा असर भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और आम आदमी की रसोई पर पड़ने वाला है.

चेलानी ने एक्‍स पर ल‍िखा, भारत के ल‍िए यह मुश्क‍िल वक्‍त है. भारत को ट्रंप-नेतन्याहू युद्ध का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. भारत की एनर्जी स‍िक्‍योर‍िटी इस वक्‍त खतरे में है. एक तो मार्च 2022 के बाद से भारत ने पहली बार सस्ते रूसी तेल का आयात घटाकर सबसे निचले स्तर पर ला दिया है. इसकी जगह भारत अब खाड़ी देशों और अमेरिका से महंगा तेल खरीद रहा है. दूसरा ज‍िस रास्‍ते से यह तेल आता है, वह कब बंद हो जाए, कहा नहीं जा सकता. अमेरिका-इजरायल धुरी के करीब जाने के चक्कर में भारत ने एक बड़ा जोखिम मोल ले लिया है.

होर्मुज स्‍ट्रेट भारत की दुखती रग

  1. ईरान युद्ध के कारण स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री रास्ता बन गया है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी रास्ते पर सबसे ज्यादा निर्भर है. भारत का लगभग 50% तेल इसी रास्ते से आता है. 60% एलएनजी खरीद होर्मुज के जरिए ही भारत पहुंचती है. भारत की 80-85% एलपीजी खाड़ी देशों से आती है और होर्मुज से होकर गुजरती है.
  2. कच्चे तेल के विपरीत, भारत के पास एलपीजी का कोई स्ट्रैटेजिक रिजर्व नहीं है. यानी, अगर होर्मुज में सप्लाई रुकती है, तो इसका सीधा असर भारतीय घरों के चूल्हों पर पड़ेगा.चेलानी के मुताबिक, इस युद्ध ने होर्मुज को भारत के लिए सिंगल पॉइंट ऑफ फेल्योर बना द‍िया है.एक ऐसी कड़ी जिसके टूटने से सब कुछ तबाह हो जाए.

दोस्ती के बीच अर्थव्यवस्था पर अरबों डॉलर की चोट

चेलानी कहते हैं क‍ि डोनाल्ड ट्रंप भले ही पीएम मोदी को अपना बहुत करीबी दोस्त कहें और बेंजामिन नेतन्याहू उन्हें भाई बताएं, लेकिन इस दोस्ती की भारी आर्थिक कीमत भारत चुका रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत के सालाना आयात बिल में 13-14 अरब डॉलर का भारी-भरकम इजाफा हो जाता है. इसका सीधा असर भारत में बढ़ती महंगाई और चौड़े होते व्यापार घाटे के रूप में सामने आएगा. सीधे शब्दों में कहें तो, भारत को इस विवाद की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.

जबक‍ि चीन मौज में

इस पूरे खेल में चीन को बैठे-बिठाए बड़ा फायदा मिल गया है. चीन होर्मुज के जोखिम को आसानी से कम कर सकता है. वह ओवरलैंड रूट्स यानी जमीनी रास्तों के जरिए रूस से तेल और गैस की खरीद बढ़ा रहा है. चेलानी का तर्क है कि भारत द्वारा रूसी तेल के आयात को कम करने के फैसले ने बीजिंग को एक रणनीतिक बढ़त दे दी है. चीन संकट के इस समय में अतिरिक्त रूसी तेल खपाकर खुद को खाड़ी देशों के युद्ध से सुरक्षित कर रहा है, जबकि नई दिल्ली ने खुद को पूरी तरह से इस खतरे के सामने खोल दिया है.

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Gyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें

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