केंद्रीय मंत्री और आरपीआई प्रमुख रामदास आठवले ने सोमवार को बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अगर उद्धव ठाकरे 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने के बजाय भाजपा के सहयोगी बने रहते, तो वे शिवसेना का धनुष-बाण चुनाव चिन्ह नहीं गंवाते।
उन्होंने 2022 में शिवसेना में हुई बगावत के लिए पूर्व मुख्यमंत्री ठाकरे की राजनीतिक पसंद को जिम्मेदार ठहराया। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों से पहले शिवाजी पार्क में महायुति की रैली को संबोधित करते हुए अठावले ने कहा, ‘2019 के विधानसभा चुनावों के बाद उद्धव ठाकरे को भाजपा के साथ ही रहना चाहिए था क्योंकि शिवसेना ने दूसरी सबसे अधिक सीटें जीती थीं।’
बालासाहेब ठाकरे को लेकर क्या बोले अठावले?
रामदास अठावले ने कहा, ‘अगर वह भाजपा के साथ रहते, तो धनुष-बाण का चुनाव चिन्ह उनके पास ही रहता। दिवंगत बालासाहेब ठाकरे ने कांग्रेस का विरोध किया था, लेकिन उद्धव ठाकरे उसी पार्टी के साथ हाथ मिलाकर मुख्यमंत्री बने।’ उन्होंने विपक्षी पार्टियों की रैलियों में लोगों की उपस्थिति की तुलना भी की और दावा किया कि महायुति की रैली में उद्धव और राज ठाकरे की पिछली संयुक्त रैली की तुलना में अधिक भीड़ जुटी थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि दोनों चचेरे भाइयों का गठबंधन राजनीतिक रूप से अच्छी बात है।
महायुति और केंद्र सरकार की तारीफ में कही ये बात
भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार और केंद्र सरकार की प्रशंसा करते हुए अठावले ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुंबई में बड़े विकास कार्य किए हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेट्रो परियोजनाओं, उपनगरीय रेलवे सेवाओं के उन्नयन, झुग्गी-झोपड़ी पुनर्विकास और गरीबों के लिए गुणवत्तापूर्ण आवासों के निर्माण के लिए पर्याप्त धनराशि स्वीकृत की है, जिसमें धारावी झुग्गी बस्ती का पुनर्विकास भी शामिल है।
अठावले ने बीएमसी में फैले भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कि नगर निकाय को उद्धव ठाकरे के चंगुल से मुक्त कराने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि बीएमसी को महायुति गठबंधन के नियंत्रण में आना चाहिए।
अन्य वीडियो
