54 साल, ₹65 हजार सैलरी और 16 साल का अलगाव… फिर भी क्यों नहीं मिला तलाक?
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Husand-Wife Maintenance News: सुप्रीम कोर्ट में एक दिलचस्प तलाक मामले की सुनवाई के दौरान जजों ने 54 वर्षीय पति को तलाक देने से इनकार कर दिया, जो 16 साल से पत्नी से अलग रह रहा था और 15000 रुपये मासिक मेंटेनेंस दे रहा था.कोर्ट ने कहा कि यह रकम मौजूदा समय में बेहद कम है और तलाक पर विचार तभी किया जाएगा जब पति उचित स्थायी गुजारा भत्ता देने को तैयार हो. साथ ही पत्नी के साथ रहने की इच्छा जताने को भी कोर्ट ने अहम आधार माना.

नई दिल्ली. ‘जज साहब, 16 साल से अलग रह रहे हैं… अब तो तलाक दे दीजिए.’ कोर्टरूम में यह गुहार एक 54 वर्षीय व्यक्ति की ओर से लगाई गई. उसकी दलील थी कि वह पिछले डेढ़ दशक से अपनी पत्नी से अलग रह रहा है और हर महीने 15000 रुपये बतौर गुजारा भत्ता भी दे रहा है. उसकी सैलरी 65000 रुपये है. उम्र बढ़ चुकी है और वह इस रिश्ते से अब कानूनी रूप से भी मुक्त होना चाहता है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को सुनने के बाद कहा, ‘शांति से बैठे रहो, 15 हजार देते रहो और खुश रहो…’
आखिर सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचा मामला?
यह मामला एक ऐसे दंपति से जुड़ा है, जो करीब 16 साल से अलग रह रहे हैं. पति ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और विवाह खत्म करने की मांग की थी. सुनवाई के दौरान पति के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि दोनों लंबे समय से अलग हैं, स्वभाव में काफी अंतर है, पति. नियमित रूप से ₹15,000 मेंटेनेंस दे रहा है और अब तलाक दे दिया जाए. लेकिन जैसे ही यह बात सामने आई कि पत्नी अब भी साथ रहने को तैयार है तो कोर्ट का रुख बदल गया.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच में शामिल जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता ने साफ कहा कि अगर पत्नी साथ रहना चाहती है तो उसे अपने साथ रखिए. इतना ही हीं बेंच ने आगे कहा कि 15000 रुपये का गुजारा भत्ता आज के समय में बहुत कम है. तलाक चाहिए तो स्थायी गुजारा भत्ता का उचित प्रस्ताव दीजिए. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ लंबे समय से अलग रहने के आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता. खासकर तब जब दूसरा पक्ष साथ रहने को तैयार हो.
मेंटेनेंस बना बड़ा मुद्दा
पति ने कोर्ट में कहा कि उसकी सैलरी 65000 रुपये है और कोई पेंशन नहीं है तो 15000 रुपये देना उसके लिए बोझ है. लेकिन कोर्ट इस तर्क से सहमत नहीं हुआ. जजों ने कहा कि मौजूदा समय में 15000 रुपये ‘बहुत कम’ रकम है और इससे पत्नी का गुजारा मुश्किल है. यानी कोर्ट का साफ कर दिया कि तलाक चाहिए तो पहले पत्नी के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी.
