पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-ब-दिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान भी जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब 15वें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। इसी उग्र हालात के बीच अब ईरान ने अमेरिका और इस्राइल को सख्त चेतावनी देते हुए ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ की 46वां चरण शुरू किया है। इसकी शुरुआत के एलान के साथ ईरान ने सख्त चेतावनी दी है कि इस युद्ध की शुरुआत करने के लिए अमेरिका और यहूदियों को हर एक बूंद खून का हिसाब चुकाना पड़ेगा।
मामले में ईरान के खताम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता एब्राहीम जोल्फाघरी ने शनिवार को टेलीविजन पर संबोधन देते हुए कहा कि अमेरिका और इस्राइल इस युद्ध में हर एक बूंद अन्यायपूर्वक बहाए गए खून का हिसाब चुकाएंगे और जो भी नुकसान किए हैं उसका हरजाना भरेंगे। जोल्फाघरी ने जोर देकर कहा कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक आखिरी निर्दयी और बच्चों को मारने वाले अपराधी का विनाश नहीं हो जाता। उन्होंने शहीदों के खून की पाबंदी की कसम खाई और कहा कि सिर्फ अल्लाह से ही जीत संभव है।
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ईरान के ऑपरेशन का 46वां चरण कितना खतरनाक?
जानकारी के अनुसार ईरान की तरफ से शुरू की गई इस ऑपरेशन का 46वां चरण भी जारी रहा, जिसमें अमेरिका और इस्राइल के केंद्र और सेनाओं को निशाना बनाया गया। इस चरण में उन्होंने दावा किया कि 10 इस्राइल में छुपे कमांडरों के ठिकाने और तीन अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया।
विशेष हमलों में शामिल जगहें:
- तेल अवीव के 7 स्थान
- रिशोन लेजियन के 2 स्थान
- शोहाम का 1 स्थान
- साथ ही अमेरिका के कमांडर ठिकानों में: ‘किंग सुल्तान’, ‘विक्टोरिया’, और ‘अर्बिल’ बेस।
जोल्फाघरी ने बताया ईरान का एक्शन प्लान
अपने संबोधन में जोल्फाघरी ने बताया कि ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम्स ने हाल ही में फिरोजाबाद, बंदर अब्बास और ताब्रीज में अमेरिकी MQ-9 ड्रोन और अन्य विमानों को रोककर नष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब तक कुल 112 ड्रोन और अन्य प्रकार के लड़ाकू, जासूसी और आत्मघाती ड्रोन को नष्ट किया जा चुका है। प्रवक्ता ने कहा कि ये रक्षा कदम ईरान की सैना, एयरोस्पेस और नौसैनिक ताकतों और हिजबुल्ला की आक्रमक कार्रवाइयों का हिस्सा हैं।
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45वें चरण में क्या-क्या हुआ?
उन्होंने बताया कि इससे पहले ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 का 45वां चरण चलाया गया, जिसका कोड था- या साहेब अल-जमान, अल्लाह जल्दी आपकी मदद करें। यह अभियान इंटरनेशनल कुद्स डे मार्च में लोगों की भारी उपस्थिति के बाद शुरू किया गया। जोल्फाघरी ने बताया कि इस ऑपरेशन में ‘खैबर-शेकन’ सॉलिड-फ्यूल प्रिसीजन मिसाइल और हमलावर ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने बताया कि इसका मुख्य लक्ष्य इस्राइल के उत्तरी कमांड सेंटर और अमेरिकी बलों के इकट्ठा होने वाले स्थानों को निशाना बनाना था।
विशेष रूप से उन्होंने हैफा, कैसरिया, जरीत और श्लोमी के इलाके और होलोन मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स का नाम लिया। इसके अलावा, अमेरिका के क्षेत्रीय ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। जोल्फाघरी के अनुसार, ‘अल धाफरा’ और ‘अर्बिल’ बेस को पहले चेतावनी देने के बाद हमला किया गया।
आईआरजीसी ने ड्रोन ताकत का प्रदर्शन किया
गौरतलब है कि बढ़ते संघर्ष के बीच ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अपनी ड्रोन ताकत का एक बड़ा प्रदर्शन भी किया। मेहर समाचार एजेंसी ने एक्स पर रिपोर्ट की कि IRGC ने एक बड़े भूमिगत सुरंग में अपने ड्रोन को प्रदर्शित किया। यह प्रदर्शन ‘अयातुल्ला मोजताबा खमेनेई की तस्वीर के सामने किया गया।
