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Opinion: थरूर ही नहीं, नेहरू-वाजपेयी-आडवाणी भी करते रहे हैं विरोधी नेताओं की तारीफ, फ‍िर इतनी नफरत क्‍यों?

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शशि थरूर ने लालकृष्ण आडवाणी को अटल बिहारी वाजपेयी के बाद भाजपा का सबसे सम्माननीय नेता बताया. यह बात कांग्रेस को पसंद नहीं और उसने खुद को थरूर के बयान से अलग कर ल‍िया. कई नेताओं ने तो थरूर की आलोचना भी की. लेकिन राजनीत‍ि में दूसरे दल के नेताओं की तारीफ करने की भारत में परंपरा रही है. आख‍िर इसमें इतनी कटुता कहां से घुस गई.

नेहरू-वाजपेयी-आडवाणी भी करते रहे हैं विरोध‍ियों की तारीफ,फ‍िर इतनी नफरत क्‍योंअटल बिहारी वाजयेपी, जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी एक दूसरे की तारीफ करते रहे हैं.

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी जन्‍मद‍िन पर शशि थरूर ने उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी के बाद भाजपा का सबसे सम्माननीय नेता बताया और उन्‍हें नेहरू के बराबर खड़ा करने की कोश‍िश की. फ‍िर क्‍या था, वह कांग्रेस की आंखों में चुभ गए. कांग्रेस प्रवक्‍ता पवन खेड़ा ने कहा, कांग्रेस उनके विचारों से खुद को पूरी तरह अलग करती है. कई नेता उन्‍हें सोशल मीडिया में नसीहत दे रहे हैं. लेकिन क्या राजनीति में विरोधी दल के नेता की तारीफ करना कोई गुनाह है? यह वही भारत है, जहां वाजपेयी ने नेहरू की दूरदृष्टि की तारीफ की थी, जहां नेहरू ने अटल को ‘प्रतिभाशाली युवा वक्ता’ कहा था, और जहां इंदिरा गांधी ने जयप्रकाश नारायण के आंदोलन को लोकतंत्र की चेतना बताया था. राजनीति की इस परंपरा में कभी असहमति भी थी, लेकिन उसमें आदर की जगह बची रहती थी. आज वही शालीनता गुम होती जा रही है. आख‍िर इतनी कटुता क्‍यों?

जब नेताओं ने छोड़ी दलगत सीमाएं

भारतीय राजनीति में अक्सर नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिलती है, लेकिन कई बार ऐसे मौके भी आए हैं जब विरोधी दलों के नेताओं ने एक-दूसरे की ईमानदारी, नेतृत्व और मर्यादा की खुलकर तारीफ की.

अटल बिहारी वाजपेयी ने पंडित नेहरू की तारीफ की
साल: 1957
कहां: लोकसभा भाषण (पहला सत्र)
क्या कहा:
नेहरू जी के नेतृत्व में भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान बनाई है। उनके विचारों से असहमति हो सकती है, लेकिन उनके देशप्रेम पर कोई प्रश्न नहीं उठाया जा सकता. (संसद के पहले सत्र का रिकॉर्ड, Lok Sabha Debates, 1957)

जवाहरलाल नेहरू ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सराहा
साल: 1952
कहां: संसद सत्र
क्या कहा:
डॉ. मुखर्जी की आलोचना हमें सही राह दिखाती है। वे एक सच्चे राष्ट्रभक्त और निडर वक्ता थे. (Parliamentary Debates, Vol. 15 (1952)

By uttu

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