जब अमेरिका और यूरोप के तमाम देश रूस से तेल खरीद पर भारत के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं, ठीक उसी वक्त फिनलैंड के राष्ट्पति अलेक्जेंडर स्टब (Alexander Stubb) ने भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है. फर्स्टपोस्ट की मैनेजिंग एडिटर पलकी शर्मा के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में स्टब ने कहा, मैं भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए दोष नहीं दूंगा. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतें समझता है और उसे अपने हक में फैसले लेने का अधिकार है.
पलकी शर्मा ने जब पूछा कि रूस से तेल खरीदने की वजह से ट्रंप ने भारत पर एक्स्ट्रा टैरिफ लगा दिया है, जबकि रूस से सबसे ज्यादा तेल तो चीन खरीदता है. इस पर राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने कहा, हर देश को अपनी परिस्थितियों के हिसाब से फैसले लेने का हक है. भारत एक बड़ा देश है, जिसकी ऊर्जा जरूरतें अलग हैं. अगर वह रूस से तेल खरीदता है, तो उसका अपना आर्थिक हित है. मैं इसे गलत नहीं मानता. स्टब के इस बयान को भारत के लिए कूटनीतिक समर्थन माना जा रहा है, क्योंकि यूरोप और अमेरिका के कई नेता भारत की तेल नीति को लेकर आलोचना करते रहे हैं. लेकिन फिनलैंड के राष्ट्रपति ने बिल्कुल अलग रुख अपनाते हुए कहा कि हर देश को अपनी संप्रभुता और आत्मनिर्भरता के साथ निर्णय लेने का अधिकार है.
यूक्रेन को दी सलाह- हमारी गलती से सीखें
रूस यूक्रेन युद्ध पर बात करते हुए प्रेसिडेंट स्टब ने कहा कि यूक्रेन को यह फैसला खुद करना चाहिए कि उसे जंग कैसे खत्म करनी है. उन्हें हमारी गलती से सीखना चाहिए. फिनलैंड ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ से युद्ध हारने के बाद अपनी 10 फीसदी भूमि खो दी थी. स्टब ने याद करते हुए कहा, हमने युद्ध के बाद अपनी संप्रभुता खो दी थी. इसलिए हम चाहते हैं कि यूक्रेन को अपनी संप्रभुता और अपनी भूमि बचाने का पूरा अधिकार मिले.
पहले सीजफायर हो
जब पलकी शर्मा ने पूछा कि क्या इसका मतलब यह है कि यूक्रेन को रूस को कोई हिस्सा देना चाहिए? इस पर स्टब ने साफ कहा, बिलकुल नहीं. हम बस चाहते हैं कि पहले सीजफायर हो, और फिर शांति की दिशा में बातचीत आगे बढ़े. यह बयान यूरोप के उस हिस्से से आया है जो खुद रूस के पड़ोस में है, इसलिए फिनलैंड के अनुभव को दुनिया गंभीरता से ले रही है.
ट्रंप पर बोले-कठोर लेकिन सच्चे मोलभाव करने वाले
इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी सवाल आया. स्टब ने कहा, ट्रंप सच में इस युद्ध को खत्म करना चाहते हैं. उन्होंने पहले नरमी दिखाई, लेकिन जब रूस ने वादा तोड़ा तो उन्होंने सख्त रवैया अपनाया. स्टब ने कहा कि अमेरिका के प्रतिबंधों और सेकेंडरी सैंक्शन की नीति ट्रंप के डंडे वाले रुख का हिस्सा है.
फिनलैंड क्यों नहीं बना ट्रंप-पुतिन मीटिंग का मंच
जब पूछा गया कि क्या फिनलैंड ट्रंप और पुतिन की मुलाकात के लिए मेजबान बन सकता है? इस पर स्टब ने कहा, नहीं, यह हमारी भूमिका नहीं है. यह मीटिंग किसी तटस्थ जगह पर होनी चाहिए, जैसे G20 सम्मेलन में जोहान्सबर्ग में.. उन्होंने कहा कि अगर ट्रंप-पुतिन की मुलाकात न हो सके तो कम से कम जेलेंस्की-पुतिन की बातचीत जरूर होनी चाहिए. हाल ही में ट्रंप ने वॉशिंगटन में यूरोपीय नेताओं की मेज़बानी की थी, जिस पर कुछ लोगों ने आलोचना की थी. इस पर स्टब ने कहा, मैं विदेशी नीति में ऑप्टिक्स यानी दिखावे पर भरोसा नहीं करता. मुझे अच्छा लगा कि हम सब ओवल ऑफिस में थे और सुरक्षा गारंटी पर चर्चा जारी रही.
भारत की विदेश नीति की सराहना
फिनलैंड के राष्ट्रपति ने भारत की संतुलित और व्यावहारिक विदेश नीति की तारीफ की. उन्होंने कहा कि भारत न तो रूस का अंधा समर्थक है और न ही पश्चिम का अनुयायी. वह अपनी बात मजबूती से रखता है, जो एक परिपक्व लोकतंत्र की पहचान है. यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वसुधैव कुटुम्बकम वाली नीति की गूंज जैसा है, जो कहता है कि संपूर्ण विश्व एक परिवार है.
बदल रही दुनिया की राय
हाल के महीनों में यूरोपीय नेताओं के सुर में बदलाव देखने को मिला है. पहले जहां रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश होती थी, अब कई देश समझ रहे हैं कि भारत वैश्विक ऊर्जा स्थिरता में अहम भूमिका निभा रहा है. भारत अब केवल “रूस से तेल खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि एक संतुलन साधने वाला वैश्विक खिलाड़ी बन चुका है.
