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S-400, THAAD या आयरन डोम नहीं, भारत का देसी ‘सुदर्शन चक्र’ बनेगा संकटमोचक, फाइटर जेट और मिसाइल तक होंगे नाकाम – Akashteer Automated Air Defence Control and Reporting System 455 unit indian army indigenous sudarshan chakra s400 thaad s500

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Akashteer Air Defence System: 21वीं सदी में युद्ध का स्‍वरूप बदल चुका है. आने वाले कुछ दशकों में इसमें और बदलाव आने की प्रबल संभावना है. ऐसे में हर देश खुद को मॉडर्न वॉरफेयर के लिए तैयार करने में जुटा है. भारत भी खुद को सुरक्षित करने की दिशा में लगातार कदम उठा रहा है. अब इसको लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है.

S-400 या आयरन डोम नहीं, भारत का देसी 'सुदर्शन चक्र' बनेगा संकटमोचकइंडियन आर्मी को आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्‍टम की 455 यूनिट मिलने वाली है. (फाइल फोटो/PTI)

Akashteer Air Defence System: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस एयर डिफेंस सिस्‍टम ने अपन जौहर दिखाते हुए पाकिस्‍तान के हर वार को नाकाम किया था, अब देश के हर कोने में उसे तैनात करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है. इसके डिप्‍लॉयमेंट के बाद दुश्‍मनों के लिए भारत के एयरफील्‍ड में एंटर करना मुश्किल हो जाएगा. शत्रु के हर वार की आसमान में ही कब्र बना दी जाएगी. देसी महारथी की 400 से ज्‍यादा यूनिट के इंडियन आर्मी के बेड़े में शामिल होने से न केवल सेना की सुरक्षात्‍मक रणनीति मजबूत होगी, बल्कि अटैक कैपेबिलिटी भी और ज्‍यादा घातक होगी. देसी एयर डिफेंस सिस्‍टम को डेवलप करने वाली कंपनी का कहना है कि साल 2027 तक 455 यूनिट सेना को सौंप दी जाएगी. भारत को एक तरफ पाकिस्‍तान तो दूसरी तरफ चीन की चुनौती का सामना करना पड़ता है. ऐसे में वेस्‍टर्न और ईस्‍टर्न बॉर्डर पर एंटी एयरक्राफ्ट, एंटी ड्रोन और एंटी मिसाइल सिस्‍टम के डिप्‍लॉयमेंट से भारत की सामरिक क्षमता कई गुना तक बढ़ जाएगी. बता दें कि इस बार स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किला की प्राचीर से देश को किसी भी तरह के हवाई हमले से बचाने के लिए नेशनल लेवल पर एयर डिफेंस सिस्‍टम डेवलप करने और उसे तैनात करने की बात कही थी. उन्‍होंने इसे ‘सुदर्शन चक्र’ का नाम दिया था. उस दिशा में अब बड़ा कदम उठाया जा रहा है.

दरअसल, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) भारतीय सेना के लिए आकाशतीर ऑटोमेटेड एयर डिफेंस कंट्रोल एंड रिपोर्टिंग सिस्टम की बड़े पैमाने पर डिलीवरी को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. यह कार्यक्रम सेना की वायु रक्षा कमांड संरचना को आधुनिक बनाने और नेटवर्किंग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. यह प्रणाली व्यापक स्थिति जागरूकता प्रदान करने, सेंसर, हथियारों और कंट्रोल सेंटरों के बीच सहज समन्वय सुनिश्चित करने तथा हवाई खतरों का पता लगाने और उन्हें बेअसर करने की सेना की क्षमता को काफी बढ़ाने के लिए है. कुल 455 आकाशतीर इकाइयों की आवश्यकता 2027 तक पूरी करने का कार्यक्रम है, जिसमें चरणबद्ध डिलीवरी पहले से ही चल रही है. विभिन्न आर्मी फॉर्मेशन में 100 से अधिक सिस्टम तैनात किए जा चुके हैं, जो परियोजना के रोल-आउट में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. शेष खेपें वित्तीय वर्ष 2026 और 2027 के माध्यम से योजना के अनुसार की जाएंगी, ताकि सभी निर्दिष्ट सेक्टरों में पूर्ण ऑपरेशनल कवरेज सुनिश्चित हो सके.

Akashteer Automated Air Defence Control and Reporting System
आकाशतीर की तैनाती से भारत का एयर डिफेंस सिस्‍टम और मजबूत होगा. (फाइल फोटो/PTI)

एडवांस रडार सिस्‍टम

‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत स्वदेशी रूप से विकसित आकाशतीर प्रणाली रडार संपत्तियों, हथियार इकाइयों और निर्णय लेने वाले केंद्रों को सुरक्षित डिजिटल नेटवर्क से जोड़ती है. इसमें उन्नत ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-आधारित खतरे का आकलन और रीयल-टाइम डेटा फ्यूजन फ्रेमवर्क शामिल है. ‘इंडिया डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रणाली विभिन्न स्तरों पर कमांडरों को हवाई स्थिति का संयुक्त रूप से आकलन करने और फायर यूनिट्स को कुशलतापूर्वक आवंटित करने की अनुमति देती है, जिससे दुश्मन विमानों, ड्रोनों या मिसाइलों का तेजी से मुकाबला सुनिश्चित होता है. प्रत्येक आकाशतीर नोड मौजूदा रडार नेटवर्क जैसे 3डी टैक्टिकल कंट्रोल रडार, लो लेवल लाइट वेट रडार और फ्लाईकैचर यूनिट्स के साथ इंटीग्रेट होता है. साथ ही मिसाइल और गन-आधारित वायु रक्षा प्रणालियों के साथ भी. इंटीग्रेटेड नेटवर्क स्‍ट्रक्‍चर आखिरकार सेना के व्यापक बैटलफील्ड मैनेजमेंट सिस्टम में विलय हो जाएगी, जो एक सामान्य ऑपरेशनल पिक्चर प्रदान करेगी और भारतीय वायु सेना के इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (आईएसीसीएस) के साथ इंटरऑपरेबिलिटी सुनिश्चित करेगी.

ऑपरेशन सिंदूर में दिखाई थी ताकत

फील्ड डिप्लॉयमेंट चरण में पहले से ही निर्णय चक्रों में सुधार, प्रतिक्रिया समय में कमी और ग्राउंड-आधारित वायु रक्षा इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय प्रदर्शित हुआ है.2027 तक प्रणाली की पूर्ण तैनाती के साथ, भारतीय सेना सामरिक और ऑपरेशनल स्तरों पर खतरों का प्रबंधन करने में सक्षम एक व्यापक स्वचालित वायु रक्षा ग्रिड हासिल कर लेगी. बता दें कि आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्‍टम ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी ताकत का एहसास पूरी दुनिया को कराया था. इसकी मदद से पाकिस्‍तान के ड्रोन अटैक को न्‍यूट्रलाइज किया गया था. मिसाइल हमले को भी नाकाम किया गया था. अब इसे देश के हर संवेदनशील हिस्‍सों में तैनात करने की प्‍लानिंग है.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु… और पढ़ें

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S-400 या आयरन डोम नहीं, भारत का देसी ‘सुदर्शन चक्र’ बनेगा संकटमोचक

By uttu

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