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Sainik School Syllabus: बदलने वाला है सैनिक स्कूल का सिलेबस, कैंपस में लगेगी AI और डेटा साइंस की क्लास

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Sainik School Syllabus: सैनिक स्कूलों में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है. अब सैनिक स्कूल में स्टूडेंट्स को सेना के साथ-साथ AI, साइबर डिफेंस और कोडिंग जैसे आधुनिक क्षेत्रों के लिए भी तैयार किया जाएगा. एक उच्च स्तरीय पैनल ने शिक्षा और करियर के दायरे को विस्तार देने की सिफारिश की है, जिससे छात्र भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनेंगे.

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Sainik School Reforms: सैनिक स्कूल के सिलेबस में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है

नई दिल्ली (Sainik School Syllabus). सैनिक स्कूल दशकों से भारतीय सशस्त्र बलों के लिए कुशल अधिकारियों की नर्सरी रहे हैं. अनुशासन, शारीरिक दृढ़ता और देशभक्ति के लिए पहचाने जाने वाले सैनिक स्कूल में अब क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी की जा रही है. हाल ही में एक उच्च स्तरीय पैनल ने सिफारिश की है कि सैनिक स्कूलों के सिलेबस और विजन का विस्तार किया जाना चाहिए, जिससे छात्रों को केवल सेना ही नहीं, बल्कि उभरते हुए तकनीकी क्षेत्रों के लिए भी तैयार किया जा सके.

इस नए प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य सैनिक स्कूल में पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स को एआई, साइबर सिक्योरिटी और डेटा साइंस जैसे करियर्स के लिए सक्षम बनाना है. वर्तमान में युद्ध के तरीके और राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा बदल रही है, जहां बंदूकों से ज्यादा महत्वपूर्ण कोडिंग और नेटवर्क सिक्योरिटी हो गई है. इसी को ध्यान में रखते हुए सैनिक स्कूलों के पुराने मॉडल को मॉडर्न ग्लोबल मांगों के हिसाब से ढालने का सुझाव दिया गया है. इससे यहां के स्टूडेंट्स सेना के साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी नेतृत्व कर सकेंगे.

सैनिक स्कूलों का आधुनिकीकरण: भविष्य की नई उड़ान

सैनिक स्कूल की स्थापना का मूल उद्देश्य छात्रों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के लिए तैयार करना था. हालांकि, बदलती दुनिया में रक्षा मंत्रालय का पैनल अब इन स्टूडेंट्स के लिए व्यापक करियर विकल्प तलाश रहा है. सिफारिशों के अनुसार, सैनिक स्कूलों को अब केवल ‘सेना के फीडर’ के रूप में नहीं, बल्कि एक्सीलेंस सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा. इससे उन छात्रों को मदद मिलेगी जो सेना में नहीं जा पाते. अब वे कॉर्पोरेट और तकनीकी दुनिया में अपनी खास पहचान बना सकेंगे.

AI और साइबर डिफेंस पर फोकस

रक्षा मंत्रालय के पैनल ने इस बात पर फोकस किया है कि मॉडर्न युग में ‘हाइब्रिड वॉरफेयर’ का खतरा बढ़ गया है. इसे देखते हुए सैनिक स्कूल सिलेबस में एआई, रोबोटिक्स और साइबर सिक्योरिटी को शामिल करने का सुझाव दिया गया है. छात्र अब केवल शारीरिक ड्रिल और विभिन्न तरह की स्ट्रैटेजी बनाना ही नहीं सीखेंगे, बल्कि साइबर खतरों से निपटने और डेटा एनालिसिस के गुर भी सीखेंगे. यह उन्हें न केवल सेना के तकनीकी विंग के लिए तैयार करेगा, बल्कि ग्लोबल टेक कंपनियों के लिए भी मजबूत उम्मीदवार बनाएगा.

बुनियादी ढांचे और स्किल डेवलपमेंट में सुधार

सैनिक स्कूल के मॉडर्नाइजेशन की प्रक्रिया में स्कूलों के बुनियादी ढांचे भी अपडेट किए जाएंगे. पैनल ने हाई स्टैंडर्ड लैब, कोडिंग सेंटर और डिजिटल क्लासरूम स्थापित करने की जरूरत बताई है. इसके अलावा, छात्रों के सॉफ्ट स्किल्स, नेतृत्व क्षमता और आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) पर भी ध्यान दिया जाएगा. यह कदम सुनिश्चित करेगा कि सैनिक स्कूल का छात्र हर क्षेत्र में ‘लीडर’ के रूप में उभरे.

सरकार 100 नए सैनिक स्कूलों को पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत खोलने की मंजूरी दे चुकी है. पैनल की ये सिफारिशें इन नए स्कूलों के लिए रोडमैप की तरह काम करेंगी.

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Deepali Porwal

With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys…और पढ़ें

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