क्यों हो रही सैमसन की इतनी चर्चा?
आप सोच रहे होंगे कि सैमसन और चेन्नई की इतनी बात क्यों हो रही है? तो हम आपको बता दें कि संजू सैमसन ने राजस्थान रॉयल्स से 11 सीजन आईपीएल खेलने के बाद चेन्नई सुपरकिंग्स की तरफ रुख किया है। उन्हें पिछले साल नवंबर में सीएसके ने राजस्थान से ट्रेड किया और अपने साथ जोड़ा। सैमसन अब पीली जर्सी में आईपीएल खेलते नजर आएंगे। इससे सीएसके के फैंस काफी खुश हुए। वह सैमसन को चेपॉक में खेलते देखने का इंतजार नहीं कर पा रहे, लेकिन उन फैंस के लिए इंतजार आईपीएल से पहले ही खत्म हो रहा है। सैमसन अगर गुरुवार को भारतीय जर्सी में खेलने उतरे तो उन्हें उतना ही समर्थन मिलेगा, जितने सीएसके से खेलते हुए मिलता।
प्लेइंग इलेवन में बदलाव संभव
सुपर-8 के पहले मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 76 रन की हार ने टीम इंडिया की राह मुश्किल कर दी है। नेट रन रेट और अंक तालिका के समीकरण अब भारत के खिलाफ जाते दिख रहे हैं। ऐसे में जिम्बाब्वे के खिलाफ हर हाल में दमदार प्रदर्शन जरूरी हो गया है। खराब बल्लेबाजी भारतीय टीम के लिए इस टूर्नामेंट में सबसे बड़ी चिंता रही है। सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा, तीसरे नंबर पर तिलक वर्मा और मिडिल ऑर्डर में रिंकू सिंह उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी ये तीनों बल्लेबाज बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। ऐसे में टीम मैनेजमेंट प्लेइंग इलेवन में बदलाव कर सकता है। इन तीनों में से किसी एक की जगह संजू सैमसन को मौका मिल सकता है। संजू ओपनिंग से लेकर मध्यक्रम तक किसी भी भूमिका में फिट बैठते हैं, जो उन्हें एक उपयोगी विकल्प बनाता है।
11 साल बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ मौका!
संजू सैमसन के लिए यह मुकाबला सिर्फ एक और मैच नहीं, बल्कि करियर का अहम मोड़ साबित हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि 19 जुलाई 2015 को जिम्बाब्वे के खिलाफ ही उन्होंने अपने टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की थी। अब 11 साल बाद फिर उसी टीम के खिलाफ उन्हें खुद को साबित करने का अवसर मिल सकता है। विश्व कप 2026 में अब तक संजू को सिर्फ एक मैच खेलने का मौका मिला है। नामीबिया के खिलाफ ग्रुप स्टेज मैच में उन्होंने 8 गेंदों में 22 रन बनाकर अपनी आक्रामक क्षमता दिखाई थी। हालांकि, उन्हें लगातार मौके नहीं मिले। संजू ने अब तक 58 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की 50 पारियों में 3 शतक और 3 अर्धशतक की मदद से 1100 रन बनाए हैं। प्रतिभा पर कभी सवाल नहीं रहा, लेकिन निरंतरता और टीम में स्थायी जगह उनकी सबसे बड़ी चुनौती रही है।




