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अल-नीनो आएगा और दुनिया में लड़ाई-झगड़े बढ़ाएगा, नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा – el nino brings violent clashes

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एक नई स्टडी में पता चला है कि अल-नीनो की घटना दुनिया भर में हिंसक संघर्षों और लड़ाइयों का खतरा बढ़ा देती है. वैज्ञानिकों ने 1950 से 2023 तक हुए 555 सशस्त्र संघर्षों का एनालिसिस किया और पाया कि जब अल-नीनो सक्रिय होता है, तो हिंसा की संभावना काफी बढ़ जाती है. यह स्टडी जलवायु परिवर्तन और संघर्ष के बीच बढ़ते संबंध को और मजबूती से साबित करता है.

अल-नीनो प्रशांत महासागर के गर्म फेज को कहते हैं. यह हर तीन से सात साल में आता है. दुनिया के कई हिस्सों में मौसम को पूरी तरह बदल देता है. कुछ जगहों पर भारी बारिश होती है. कुछ इलाकों में भयंकर सूखा पड़ जाता है. स्टडी में मिला कि जहां अल-नीनो के कारण सूखा पड़ता है, जैसे मध्य अमेरिका और दक्षिणी अफ्रीका में, वहां हिंसक संघर्ष का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है.

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स्टडी में क्या निकला?

रिसर्चर्स ने 73 सालों के 555 हथियारबंद संघर्षों का गहराई से एनालिसिस किया. उन्होंने देखा कि अल-नीनो के दौरान सूखा पड़ने वाले क्षेत्रों में लड़ाई-झगड़े और हिंसा की घटनाएं बढ़ जाती हैं. यह पहला अध्ययन नहीं है जो अल-नीनो और संघर्ष के बीच संबंध बताता है, लेकिन यह अब तक का सबसे विस्तृत अध्ययन है.

El Nino Conflict

इंडियन ओशन डाइपोल (जिसे कभी-कभी इंडियन नीनो भी कहा जाता है) का भी जिक्र किया गया है. यह हिंद महासागर में होने वाली घटना है जो एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में कभी भारी बारिश और कभी भयंकर सूखा लाती है. बहुत ज्यादा बारिश या सूखा दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका के हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में संघर्ष का खतरा बढ़ाती हैं.

जलवायु ‘व्हिपलैश’ का खतरा

राइस यूनिवर्सिटी की जलवायु वैज्ञानिक सिल्विया डी ने कहा कि इंडियन ओशन डाइपोल बहुत तेजी से बदल सकता है, जिससे क्लाइमेट व्हिपलैश (अचानक बदलाव) की स्थिति बनती है. इससे पहले से ही कमजोर इलाकों में अराजकता और हिंसा बढ़ने की आशंका रहती है.

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यह अध्ययन प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज जर्नल में प्रकाशित हुआ है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे सरकारें और मानवीय सहायता संगठन यह समझ सकेंगे कि कब और कहां जलवायु संकट संघर्ष को भड़का सकता है. वे पहले से तैयारी कर सकते हैं.

El Nino Conflict

इस गर्मी में एक और अल-नीनो आने वाला है, जो पिछले कई दशकों में सबसे मजबूत हो सकता है. अगर ऐसा हुआ तो सूखा, भोजन की कमी और पानी के संकट से कई कमजोर देशों में हिंसा बढ़ने की आशंका है.

यह अध्ययन एक बार फिर साबित करता है कि जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ पर्यावरण की समस्या नहीं रह गई है. यह सामाजिक अस्थिरता, भुखमरी और हिंसक संघर्षों को भी जन्म दे रही है. अल-नीनो और इंडियन ओशन डाइपोल जैसी घटनाएं दुनिया के कमजोर इलाकों में शांति को चुनौती दे रही हैं. 

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By uttu

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