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कम खर्च में तैयार करें पशुओं का पौष्टिक चारा, दूध उत्पादन भी बढ़ेगा

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गर्मियों में पशुओं के लिए पौष्टिक चारा बनाना क्यों जरूरी

गर्मियों के मौसम में पशुपालकों को सबसे बड़ी चुनौती हरे चारे की कमी और महंगे पशु आहार की होती है। तापमान बढ़ने के साथ खेतों में हरा चारा कम हो जाता है, जबकि बाजार में मिलने वाला संतुलित पशु आहार काफी महंगा पड़ता है। इसका सीधा असर पशुओं के स्वास्थ्य, दूध उत्पादन और वजन पर दिखाई देता है। 

कई बार पोषण की कमी के कारण पशु कमजोर होने लगते हैं और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी घट जाती है। ऐसे समय में किसान यदि कम लागत में पौष्टिक चारा तैयार कर लें, तो पशुपालन को लाभकारी बनाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार भूसे का यूरिया उपचार एक ऐसी वैज्ञानिक तकनीक है, जो सूखे भूसे को पौष्टिक पशु आहार में बदल सकती है। यह तरीका आसान होने के साथ-साथ बेहद किफायती भी माना जाता है।

देश में चारे की कमी बनी बड़ी समस्या

भारत दुनिया के सबसे बड़े पशुधन वाले देशों में शामिल है। देश में 53 करोड़ से अधिक पशुधन मौजूद है, लेकिन इनके लिए पर्याप्त पौष्टिक चारे की उपलब्धता आज भी बड़ी समस्या बनी हुई है। अधिकांश किसान गेहूं और धान के भूसे पर निर्भर रहते हैं, क्योंकि यह आसानी से उपलब्ध हो जाता है। हालांकि, सामान्य भूसे में पोषक तत्व बहुत कम होते हैं। 

इसमें प्रोटीन की मात्रा करीब 3 प्रतिशत या उससे भी कम होती है, जिससे पशुओं की पोषण जरूरत पूरी नहीं हो पाती। लगातार ऐसे चारे का उपयोग करने से पशुओं की वृद्धि रुक सकती है और दूध उत्पादन भी प्रभावित होता है। यही वजह है, कि वैज्ञानिक लंबे समय से भूसे की गुणवत्ता सुधारने पर जोर देते रहे हैं। यूरिया उपचार इसी दिशा में एक कारगर उपाय माना जाता है।

यूरिया उपचारित भूसा क्यों है बेहतर विकल्प

विशेषज्ञों के अनुसार भूसे का यूरिया उपचार करने से उसकी पौष्टिकता कई गुना बढ़ जाती है। इस प्रक्रिया में यूरिया से बनने वाली अमोनिया भूसे के रेशों को मुलायम बनाती है और उसकी पाचन क्षमता को बेहतर करती है। सामान्य भूसे में जहां प्रोटीन की मात्रा लगभग 3 प्रतिशत होती है, वहीं उपचार के बाद यह 6 से 8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। 

इसके अलावा भूसे की ऊर्जा क्षमता और पाचनशीलता में भी सुधार होता है। उपचारित भूसा स्वाद में भी बेहतर हो जाता है, जिससे पशु इसे आसानी से खाते हैं। यही कारण है कि पशुपालकों के बीच यह तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है। कम खर्च में पौष्टिक चारा तैयार होने से किसानों की लागत घटती है और पशुओं को बेहतर पोषण मिल पाता है।

उपचारित भूसे से पशुपालकों को मिलते हैं कई फायदे

यूरिया उपचारित भूसा पशुओं के लिए कई तरह से फायदेमंद साबित होता है। उपचार के बाद भूसा नरम और स्वादिष्ट हो जाता है, जिससे पशु इसे चाव से खाते हैं और चारे की बर्बादी कम होती है। अधिक पोषण मिलने से पशुओं की सेहत बेहतर रहती है और दूध उत्पादन में भी सुधार देखा जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का चारा खिलाने से महंगे दाने और सघन आहार की जरूरत लगभग 30 प्रतिशत तक कम हो सकती है। 

इससे पशुपालकों का खर्च घटता है और मुनाफा बढ़ता है। बछड़ों और बछड़ियों को यह चारा खिलाने पर उनका वजन तेजी से बढ़ता है और शरीर मजबूत बनता है। गर्मियों में जब हरे चारे की भारी कमी होती है, तब यह तकनीक पशुपालकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।

सामान्य और उपचारित भूसे में कितना अंतर

सामान्य भूसे और यूरिया उपचारित भूसे के बीच पोषण स्तर में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। साधारण भूसे में प्रोटीन केवल 3 से 3.5 प्रतिशत तक होता है, जबकि उपचारित भूसे में यह बढ़कर 6 से 8 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। पाच्य प्रोटीन की मात्रा भी काफी बढ़ जाती है, जिससे पशु इसे बेहतर तरीके से पचा पाते हैं। 

ऊर्जा स्तर सामान्य भूसे में लगभग 40 से 45 प्रतिशत होता है, लेकिन उपचारित भूसे में यह 50 से 55 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। सबसे बड़ा सुधार पाचनशीलता में देखा जाता है। सामान्य भूसे की पाचन क्षमता जहां 40 से 45 प्रतिशत रहती है, वहीं उपचार के बाद यह 70 से 75 प्रतिशत तक हो सकती है। यही कारण है कि वैज्ञानिक इसे पशुपालन के लिए बेहद उपयोगी तकनीक मानते हैं।

ऐसे करें भूसे का यूरिया उपचार

भूसे का यूरिया उपचार करना बेहद आसान है और किसान इसे अपने घर या खेत पर ही कर सकते हैं। सबसे पहले 4 किलोग्राम यूरिया को 40 लीटर साफ पानी में अच्छी तरह घोल लें। इसके बाद लगभग 1 क्विंटल सूखे भूसे को समतल जमीन पर 3 से 4 इंच मोटी परत में फैला दें। अब तैयार घोल को स्प्रेयर या फव्वारे की मदद से भूसे पर समान रूप से छिड़कें, ताकि पूरा भूसा हल्का गीला हो जाए। इसके बाद भूसे को पैरों से दबाकर सघन करें। 

इसी तरह एक के ऊपर एक कई परतें बनाई जा सकती हैं और हर परत पर घोल का छिड़काव करना जरूरी होता है। अंत में पूरे ढेर को प्लास्टिक शीट से अच्छी तरह ढक दें, ताकि हवा अंदर न जा सके। गर्मियों में इसे कम से कम 3 सप्ताह और सर्दियों में लगभग 4 सप्ताह तक बंद अवस्था में रखना चाहिए। इस दौरान यूरिया से अमोनिया बनती है, जो भूसे को मुलायम और पौष्टिक बनाती है।

पशुओं को कैसे खिलाएं उपचारित चारा

जब उपचार प्रक्रिया पूरी हो जाए, तब जरूरत के अनुसार भूसे को ढेर से निकालकर उपयोग किया जा सकता है। शुरुआत में इस भूसे को लगभग आधे घंटे तक खुली हवा में फैला देना चाहिए, ताकि अतिरिक्त अमोनिया निकल जाए। इसके बाद इसे पशुओं को खिलाया जा सकता है। शुरुआत में पशुओं को थोड़ी मात्रा में यह चारा देना चाहिए, ताकि वे इसकी आदत डाल सकें। 

धीरे-धीरे इसकी मात्रा बढ़ाई जा सकती है। एक बार पशु इसके स्वाद के अभ्यस्त हो जाएं, तो इसे सीधे भी खिलाया जा सकता है। उपचारित भूसा सूखे मौसम में लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, जिससे पूरे साल चारे की उपलब्धता बनी रहती है। यही कारण है कि यह तकनीक छोटे और मध्यम पशुपालकों के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती है।

चारा तैयार करते समय बरतें जरूरी सावधानियां

यूरिया उपचारित भूसा तैयार करते समय कुछ जरूरी सावधानियों का पालन करना बेहद आवश्यक है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यूरिया घोल को हमेशा पशुओं और बच्चों की पहुंच से दूर रखा जाए। यूरिया को कभी भी सीधे पशुओं को नहीं खिलाना चाहिए, क्योंकि यह नुकसानदायक हो सकता है। उपचारित भूसे को कम से कम 3 सप्ताह बाद ही उपयोग में लाना चाहिए, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह सफल हो सके। 

प्लास्टिक कवर को अच्छी तरह बंद रखना जरूरी है, क्योंकि हवा अंदर जाने से उपचार प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा भूसे पर यूरिया घोल का समान रूप से छिड़काव करना भी बेहद जरूरी होता है। विशेषज्ञों का मानना है, कि यदि किसान फसल कटाई के समय ही भूसे का उपचार कर लें, तो पूरे साल पौष्टिक चारे की चिंता काफी हद तक खत्म हो सकती है। सही विधि और सावधानी के साथ अपनाई गई यह तकनीक पशुपालकों के लिए कम खर्च में अधिक मुनाफा दिलाने का प्रभावी उपाय साबित हो सकती है।

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By uttu

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