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अप्रैल की तेज गर्मी अब लोगों के साथ-साथ किसानों के लिए भी बड़ी परेशानी बन गई है. कानपुर शहर और आसपास के इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचते ही आम, लीची, नींबू और अमरूद की फसलों पर इसका सीधा असर दिखने लगा है. कई बागों में फलों का गिरना शुरू हो गया है, जबकि बड़ी संख्या में फल फट भी रहे हैं.इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है और उनके माथों पर परेशानी की लकीरें साफ नजर आने लगी हैं.
कानपुर: अप्रैल की तेज गर्मी अब लोगों के साथ-साथ किसानों के लिए भी बड़ी परेशानी बन गई है. कानपुर शहर और आसपास के इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचते ही आम, लीची, नींबू और अमरूद की फसलों पर इसका सीधा असर दिखने लगा है. कई बागों में फलों का गिरना शुरू हो गया है, जबकि बड़ी संख्या में फल फट भी रहे हैं.इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है और उनके माथों पर परेशानी की लकीरें साफ नजर आने लगी हैं.
किसानों का कहना है कि इस बार मार्च के आखिर से ही गर्मी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए थे. अप्रैल आते-आते धूप इतनी तेज हो गई कि पेड़ों पर लगे फलों की बढ़त रुक गई. कई जगह आम और लीची के फल छोटे रह गए, जबकि कुछ फलों में दरार पड़ गई. फटे हुए फल जल्दी खराब भी हो रहे हैं, जिससे नुकसान बढ़ने लगा है.
ज्यादा तापमान से फलों की बाहरी सतह खराब
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA) कानपुर के उद्यान विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय पड़ रही सूखी और तेज गर्म हवा सबसे बड़ी वजह है. ज्यादा तापमान और नमी की कमी से फलों की बाहरी सतह सख्त हो जाती है. इसके बाद जब अंदर का गूदा बढ़ता है तो फल दबाव नहीं झेल पाता और फट जाता है.विश्वविद्यालय के उद्यान विभाग के डीन प्रोफेसर वीके त्रिपाठी ने बताया कि लीची में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है.लीची की बाहरी परत कठोर हो जाने से उसका स्वाद भी फीका पड़ रहा है.वहीं आम में फल टूटने, गिरने और फटने की शिकायतें सामने आ रही हैं.
वैज्ञानिकों ने दी सलाह
फसल बचाने के लिए कई किसान CSA विश्वविद्यालय पहुंचे और वैज्ञानिकों से सलाह ली. उद्यान विभाग के डीन प्रो. वीके त्रिपाठी ने किसानों को बताया कि गर्मी के इस मौसम में पेड़ों की जड़ों के आसपास सूखी पत्तियों या पुआल की परत बिछानी चाहिए. इससे मिट्टी की नमी बनी रहती है और जड़ों को राहत मिलती है.उन्होंने कहा कि लगातार जरूरत के हिसाब से सिंचाई करते रहें, ताकि पौधों में पानी की कमी न हो. अगर मिट्टी सूख गई तो फल और ज्यादा खराब हो सकते हैं. विशेषज्ञों ने किसानों को जिंक और बोरान का आधा प्रतिशत घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी है. इससे फलों की गुणवत्ता बेहतर होती है और फटने की समस्या कम हो सकती है.साथ ही दोपहर की तेज धूप में बागों में नमी बनाए रखना जरूरी है. जहां संभव हो, वहां हल्का स्प्रिंकलर या फव्वारा चलाया जा सकता है.
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ सकती है.ऐसे में अगर समय रहते देखभाल नहीं की गई तो आम और लीची की पैदावार पर बड़ा असर पड़ सकता है. फिलहाल किसान आसमान की तरफ देख रहे हैं और बारिश या मौसम में राहत का इंतजार कर रहे हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
