रायपुर। छत्तीसगढ़ के वन विभाग के प्रमुख वी. श्रीनिवास राव के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों पर केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से जांच और कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर रिपोर्ट तलब की है। भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की गंभीर शिकायतों का संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को पत्र लिखकर मामले की विस्तृत जांच करने और अब तक की गई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को राव के खिलाफ भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग की लिखित शिकायतें मिली थीं, जिन्हें गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ मुख्य सचिव को जांच के लिए निर्देशित किया गया है।
सामाजिक कार्यकर्ता प्रतीक पांडेय ने प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायती पत्र भेजकर राव के कार्यकाल के दौरान हुई अनियमितताओं की शिकायत की थी। पीएमओ ने इसे केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजा था ।
सेवानिवृत्त अधिकारियों और कुछ अन्य सूचना अधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा भी इस संबंध में अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायतें की गईं हैं।
केंद्र को भेजे गए पत्रों में कुछ नाम गोपनीय रखे गए हैं, लेकिन शिकायतों में आरोप लगाने वालों ने विभागीय निविदाओं और बजट आवंटन में हुई गड़बड़ियों के दस्तावेजी प्रमाण होने का दावा किया है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में लगभग हर पांचवें आईएफ अधिकारी (कुल 118 में से 24) के खिलाफ भ्रष्टाचार, आय से अधिक संपत्ति और अनियमितताओं की जांच चल रही है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने स्पष्ट किया है कि विभाग के भीतर भ्रष्टाचार के किसी भी मामले को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने केंद्र से प्राप्त पत्र के आधार पर विभाग को विस्तृत जांच करने और तथ्यों को सामने लाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, राज्य शासन ने मुख्य सचिव के माध्यम से वन विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है। सरकार का कहना है कि वे केंद्र को एक निष्पक्ष रिपोर्ट सौंपेंगे और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
भारतीय वन सेवा के 1990 बैच के अधिकारी राव आगामी 31 मई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उन पर विभागीय नियुक्तियों और तबादलों में पसंदीदा अधिकारियों को लाभ पहुँचाने तथा कैम्पा निधि के तहत होने वाले कार्यों में वित्तीय अनियमितताएं,जैव विविधता संरक्षण एवं वन रक्षक भर्ती में कथित गड़बड़ी, आरा मिलों के संचालन और आवंटन में भ्रष्टाचार तथा बंद पड़े वन विद्यालयों में गलत तरीके से नियुक्तियां करने के गंभीर आरोप हैं।
