राम द्वारा मारे जाने के बाद रावण का अंतिम संस्कार किसने किया था. ये कितने दिनों बाद हुआ. उसमें राम क्यों खुद वानरसेना के साथ उपस्थित रहे. क्या वजह थी कि रावण के छोटे भाई विभीषण ने उसका अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया. बाद में राम के मनाने पर माने.
रावण का अंतिम संस्कार उसकी मृत्यु के तुरंत बाद ही उसी दिन हुआ बताया जाता है यानी कुछ घंटों के भीतर न कि कई दिनों बाद. रामायण की कथा‑परंपरा में यह दिखाया जाता है कि युद्ध समाप्त होते ही रावण का शव लेकर तैयारी शुरू हो जाती है. फिर शीघ्र ही विधि‑विधान से दाह संस्कार हो जाता है.
राम ये मानते थे कि मृत्यु के बाद पाप‑पुण्य और शत्रुता समाप्त हो जाती है. इसलिए रावण के प्रति भी आदर और धर्मानुकूल व्यवहार दिखाने के लिए वह रावण के अंतिम संस्कार में शामिल हुए.
दरअसल रावण की मृत्यु के बाद विभीषण ने बड़े भाई का दाह संस्कार करने से मना कर दिया, क्योंकि वो रावण को अधर्मी और शत्रु मानता था.
कैसे हुआ अंतिम संस्कार
रावण का अंतिम संस्कार हिंदू दाह‑संस्कार की तरह बताया जाता है. ये लंका के राजकीय सम्मान के साथ हुआ. इसमें ब्राह्मणों की सहायता से वेद‑मंत्रों और शास्त्र‑आज्ञाओं के अनुसार आहुतियां दी गईं.
बाल्मीकि रामायण में कहा गया है कि रावण के लिए एक विशेष चिता रची जाती है, जिसे माल्य‑चंदन और अन्य उत्तम द्रव्यों से सजाया जाता है, फिर रावण के शव को उस चिता पर सुलाकर दाह‑संस्कार किया जाता है.
राम ने किस शस्त्र का इस्तेमाल किया
राम और रावण के बीच भीषण युद्ध चला. युद्ध के दसवें दिन राम ने जब रावण की नाभि में ब्रह्रास्त्र का प्रयोग किया तो रावण जमीन पर गिर पड़ा. उसकी जान निकलने में कुछ समय लगा. उसने जब प्राण छोड़ा तो तीन बार राम का नाम लिया.
राम जब अपनी विशाल वानर सेना लेकर लंका पहुंचे तो रावण की सेना के साथ भीषण युद्ध हुआ. रावण की सेना के सारे वीर एक एक करके मारे गए. आखिर में रावण जब युद्ध में उतरा तो उसे मारना कठिन था लेकिन दसवें दिन राम ने ब्रह्रास्त्र का इस्तेमाल उसकी अमृत लगी नाभि पर किया तो इस प्रहार को वह संभाल नहीं पाया. सीधे जमीन पर आ गिरा. उसने समझ लिया कि उसका आखिरी समय आ गया है.
राम ने कैसे मनाया विभीषण को
रावण के मृत्यु के बाद जब भगवान राम ने विभीषण से उसका दाह संस्कार करने के लिए कहा तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया. उनके पास ऐसा करने का ये तर्क था कि उसका बड़ा भाई रावण पापी था. लिहाजा वह ऐसा नहीं कर सकता. तब राम को विभीषण समझाना पड़ा कि मृत्यु के साथ ही उस पार्थिव शरीर के पाप भी खत्म हो जाते हैं, लिहाजा अंतिम संस्कार करने में कोई बुराई नहीं. तब विभीषण ने ये बात मान ली. सम्मानपूर्वक रावण का अंतिम संस्कार किया गया.
रावण की पत्नी ने क्या किया
बाद में रावण की प्रमुख पत्नी मंदोदरी ने विधवा जीवन बिताने के बजाय विभीषण से विवाह कर लिया. राम की सलाह पर मंदोदरी और विभीषण ने लंका का शासन संभाला. हालांकि कुछ मान्यताएं ये भी कहती हैं कि मंदोदरी ने आध्यात्मिक जीवन अपनाया.
और क्या कहा जाता है
हालांकि एक मान्यता और भी है. उसमें ये कहा जाता है कि विभीषण ने दाह-संस्कार नहीं किया. तब रावण का शव नागकुल के लोगों ने ममी बनाकर सुरक्षित रखा. कहा जाता है कि श्रीलंका के रैगला के जंगल में एक गुफा में रावण का शव 18 फीट लंबे ताबूत में रखा गया है, जिसके नीचे उसका खजाना भी है.
मरते समय तीन बार राम का नाम लिया
रावण भगवान शिव का महान भक्त था. उसने शिव को प्रसन्न करने के लिए कई बार अपने सिर काटकर अर्पित किया. लेकिन उसकी भक्ति का तरीका शास्त्रों के अनुसार सही नहीं था, इसलिए उसे इस भक्ति से मोक्ष नहीं मिलता और उसे नरक में डाल दिया जाता. ये बात रावण भी जानता था. उसके खाते में पाप बहुत ज्यादा थे. वह अहंकार में डूबा रहता था.
इसी वजह से विद्वान रावण ने मरते समय तीन बार राम का नाम लिया ताकि उसे पापों से मुक्ति मिल सके. राम नाम का स्मरण मोक्ष का कारण माना जाता है, क्योंकि ये पापों को नष्ट करता है. आत्मा को मुक्त करता है. इसी वजह से रावण की आत्मा को मृत्यु के बाद मोक्ष मिला. बेशक उसके जीवन के अन्य कर्म बुरे थे.
