Sukhoi 30 mki New IRST Technology Will Kill J20: तकनीक की दुनिया में कोई भी चीज अपने आप को हमेशा के लिए सर्वश्रेष्ठ होने का दावा नहीं सकती. यही बात पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स पर लागू होती है. पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स के बारे में अब तक दावा किया जाता रहा है कि इसे दुश्मन की सेना डिटेक्ट नहीं कर सकती. वह इसे मार नहीं सकती. यानी जंग के मैदान में यह अजेय है. इसको एक तरह से अमरत्व का वरदान मिला हुआ है. लेकिन, ये बातें अब कागजी दिखने लगी है. दरअसल, इस वक्त दुनिया में केवल तीन देशों अमेरिका, चीन और रूस के पास ही पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स हैं. अमेरिका के पास दो एफ-35 और एफ-22 जेट हैं. चीन के पास भी दो जे-20 और जे-35 जेट हैं. रूस के पास एक सुखाई-57 जेट है. ये सभी पांचवीं पीढ़ी के जेट हैं.
भारत इस मामले में अभी पिछड़ा हुआ है. भारत का अपना 4.5 जेन फाइटर जेट प्रोग्राम तेजस चल रहा है. इस बीच वह चीन और उसके गोद में बैठे पाकिस्तान से संभावित खतरों के बीच भारत के पास राफेल के दो स्क्वाड्रन हैं और वह 114 और जेट खरीदने की योजना पर काम कर रहा है. राफेल 4.5+ पीढ़ी के जेट हैं. इसके साथ भारत पांचवीं पीढ़ी से आगे की बात सोच रहा है. वह देसी 5+ पीढ़ी के एम्का प्रोग्राम पर काम कर रहा है. इसके 2035 तक सेना में शामिल होने की संभावना है.
पांचवीं पीढ़ी की जेट तकनीक
अब आते हैं भारत की तकनीक पर. यह ठीक है कि पांचवीं पीढ़ी के जेट को रडार सिस्टम डिटेक्ट नहीं कर पाएंगे लेकिन, भारत के वैज्ञानिकों ने इस जेट से निकलने वाली हीट यानी उसके मल को डिटेक्ट करने वाला सेंसर बना लिया है. दरअसर, फाइटर जेट बहुत अधिक मात्रा में फ्यूल बर्न करते हैं और इसी हिसाब से आसमान में हीट रिलीज करते हैं. भारत द्वारा विकसित सेंसर से इस हीट को डिटेक्ट किया जाएगा और फिर इससे चीन जे-20 का सटीक लोकेशन पता कर लिया जाएगा.
भारत के दो सबसे अहम फाइटर जेट सुखोई और राफेल. फोटो- पीटीआई
क्या है IRST सिस्टम
क्या है नई तकनीक
भारतीय इंजीनियरों ने आईआरएसटी सिस्टम और एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड अरे (एईएसए) रडार को मिलाकर नई तकनीक बनाई है. इस प्रक्रिया को ‘सेंसर लेवर फ्यूजन’ कहा जाता है. पुराने फाइटर जेट्स में रडार और हीट सिकिंग सेंसर्स अलग-अलग काम करते थे. ऐसे में पायलट को अलग-अलग स्क्रीन पर इनको देखना पड़ता था. लेकिन, भारत ने अपने मॉडर्न जेट में इन दोनों डेटा को एक ही स्क्रीन के साथ जोड़ दिया है. यह काम एडवांस मिशन कंप्यूटर के जरिए किया गया है. इस तकनीक को डीआरडीओ ने विकसित किया है. अब यह सिस्टम किसी भी एक समय में किसी दूसरे जेट का सबसे सटीक लोकेशन बता देता है.
घातक बनेंगे सुखोई-30 एमकेआई
जे-20 चीन का प्रमुख फाइटर जेट है. उसकी सेना में ये जेट शामिल हो चुके हैं.
तेजस-मार्क2 में भी लगेगी यह तकनीक
रिपोर्ट के मुताबिक देसी 4.5 पीढ़ी के जेट तेजस मार्क-2 में पूरे आईआरएसटी सिस्टम को लगाया जाएगा. इस सिस्टम में कंप्यूटर थर्मल इमैज को उत्तम एएसईए रडार से सिग्लन के साथ मर्ज कर एक यूनिफायड पिक्चर तैयार करेंगे. इससे पायलट को एक स्पष्ट तस्वीर मिलेगी और वह बेहद सटीक तरीके के वार कर पाएंगे. यह पूरे खेल में एआई का भरपूर इस्तेमाल किया जाएगा.
जे-20 का कैसे करेंगे शिकार
दरअसल, यह तकनीक किसी भी जेट से निकलने वाले हीट सिग्नेचर को डिटेक्ट करते हैं. इस दौरान देसी फाइटर जेट्स अपना रडार सिस्टम बंद रखते हैं. जैसे ही कोई शिकार डिटेक्ट होता है ये जेट एक सेकेंड से भी कम समय के लिए अपना रडार ऑन करते हैं ताकि फायर किए जाने वाले वीपंस को गाइड किया जा सके. इससे दुश्मन के रडार सिस्टम के लिए इनको पकड़ पाना लगभग असंभव हो जाता है. इस तकनीक को चीन के जे-20 फाइटर जेट के खिलाफ सबसे कारगर बताया जा रहा है. इस चीन जेट में रडार को चकमा देने की क्षमता है, लेकिन यह जेट इंजन से निकलने वाले बेहद अधिक हीट को कंट्रोल नहीं कर पाते हैं.
चीन जे-20 की इस कमी को भारत अब अपने एम्का प्रोजेक्ट में दूर करने की योजना पर काम कर रहा है. अमेरिकी पांचवीं पीढ़ी के जेट एफ-35 में डिस्ट्रीब्यूटेड अपर्चर सिस्टम लगा है जो इसके हीट को काफी हद तक कंट्रोल कर लेता है.
