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दुनिया की नंबर 1 पैरा तीरंदाज को हराकर बनीं चैंपियन, आनंद महिंद्रा ने कहा ‘प्रेरणा का स्रोत’ – realtimes

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 Payal Nag’s journey: बैंकॉक से भारत के लिए एक ऐसी खबर आई है जो न केवल खेल जगत को गौरवान्वित करती है, बल्कि अटूट मानवीय साहस की मिसाल बन गई है। ओडिशा के बलांगीर की पैरा तीरंदाज पायल नाग ने विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज में दो स्वर्ण पदक जीतकर वैश्विक मंच पर तिरंगा लहराया है। यह जीत इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि पायल ने कंपाउंड महिला फाइनल में दुनिया की नंबर एक पैरा तीरंदाज और अपनी आदर्श शीतल देवी को 139-136 से हराकर बड़ा उलटफेर किया। इसके अलावा, उन्होंने शीतल के साथ मिलकर टीम स्पर्धा में भी सोना जीता।

हादसे से हिम्मत तक का सफर

पायल नाग का जीवन साल 2015 में एक भयानक हादसे के बाद पूरी तरह बदल गया। बिजली का जोरदार झटका लगने के कारण उन्हें अपने दोनों हाथ और दोनों पैर गंवाने पड़े। इस शारीरिक अक्षमता के बाद उन्हें अपनों और पड़ोसियों के बेहद कड़वे शब्द सुनने को मिले। लोगों ने यहाँ तक कह दिया कि ‘इससे तो बेहतर है कि इसे जहर दे दो’। लेकिन एक दिहाड़ी राजमिस्त्री की इस बेटी ने हार नहीं मानी और अपने दर्द को ही अपना सबसे बड़ा मकसद बना लिया।

कोच का साथ और शीतल देवी पर जीत

पायल की जिंदगी में नया मोड़ तब आया जब उनकी मुलाकात कोच कुलदीप वेदवान से हुई। कोच ने पायल के भीतर छिपे हुनर को पहचाना और उन्हें तीरंदाजी के कठिन गुर सिखाए। अप्रैल 2026 में बैंकॉक में आयोजित वर्ल्ड पैरा आर्चरी सीरीज़ के फाइनल में पायल ने अपनी आइडल शीतल देवी को कड़े मुकाबले में हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी इस जीत ने साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे शारीरिक अक्षमताएं कोई मायने नहीं रखतीं।

आनंद महिंद्रा का सलाम

मशहूर बिजनेसमैन आनंद महिंद्रा ने पायल के साहस को सलाम करते हुए उन्हें प्रेरणा का स्रोत बताया। उन्होंने ‘X’ पर लिखा कि जब भी वे दुखी होते हैं, तो पायल और शीतल की तस्वीरों को देखकर खुद को याद दिलाते हैं कि ‘हिम्मत और पॉजिटिव सोच’ का असल मतलब क्या है।

By uttu

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