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‘नीच, भ्रामक और घृणित’:फर्जी पोस्ट पर फूटा Cji का गुस्सा, कहा- संविधानिक मूल्यों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं – Cji Surya Kant Denies And Condemns Casteist Statement On Social Media

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भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोशल मीडिया पर अपने नाम से फैलाए जा रहे एक जातिवादी बयान का खंडन किया है। सीजेआई ने इसे एक नीच, भ्रामक और शरारतपूर्ण साजिश करार दिया है। आमतौर पर शांत रहने वाले सीजेआई का यह तीखा तेवर चर्चा का विषय बना हुआ है।

उच्चतम पद को बदनाम करने की कोशिश

सीजेआई सूर्यकांत ने पीटीआई को दिए बयान में अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि एक काल्पनिक बयान तैयार करना और उसे देश के सर्वोच्च न्यायिक पद से जोड़ना बेहद गलत है। यह हरकत पूरी तरह से बेईमानी है। इसका उद्देश्य सामाजिक उकसावा पैदा करना है। उन्होंने इसे संविधानिक मूल्यों की अवमानना बताया है।

सार्वजनिक विश्वास पर गहरा प्रहार

सीजेआई के अनुसार, इस तरह का लापरवाह आचरण न्यायपालिका की नींव को कमजोर करता है। यह कानून के शासन और न्यायपालिका में जनता के विश्वास को चोट पहुंचाता है। उन्होंने साफ किया कि सोशल मीडिया पर चल रहे इन दावों का वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।

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भ्रामक पोस्ट का विवरण

सीजेआई ने विशेष रूप से एक्स पर मौजूद एक अकाउंट @UnreservedMERIT का जिक्र किया। इस अकाउंट ने हिंदी में एक बयान उनके नाम से साझा किया था। उस पोस्ट में लिखा था, ‘यदि कोई समाज आईएएस, आईपीएस, सीजेआई और राष्ट्रपति पैदा करने के बाद भी खुद को शोषित बताता है, तो दोष ब्राह्मणों का नहीं बल्कि उसकी मानसिकता का है।’

मुख्य न्यायाधीश ने इस बयान को पूरी तरह निराधार और द्वेषपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से झूठा दावा है। सीजेआई कार्यालय ने सभी जिम्मेदार नागरिकों, मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से अपील की है। उन्होंने कहा है कि ऐसी मनगढ़ंत और झूठी सामग्री को बढ़ावा न दें।

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By uttu

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