पाकिस्तान में एक बार फिर अज्ञात हमलावरों ने आतंकियों पर कहर बरपाना शुरू कर दिया है. रहस्यमयी हमलों की कड़ी में एक बड़ा नाम जुड़ गया है. लश्कर-ए-तैयबा का अहम चेहरा और हाफिज सईद का करीबी सहयोगी शेख यूसुफ़ अफरीदी अज्ञात बंदूकधारियों के हमले में मारा गया. ये घटना खैबर पख्तूनख्वा के खैबर इलाके के लांडी कोतल में हुई, जो इस्लामाबाद से करीब 250 किलोमीटर दूर है.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कुछ हथियारबंद हमलावरों ने शेख यूसुफ़ अफरीदी पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी भी संगठन ने नहीं ली है. हालांकि, इस घटना के बाद इलाके में तनाव और गुस्से का माहौल है. बताया जा रहा है कि शेख यूसुफ अफरीदी प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के क्षेत्रीय ढांचे में अहम भूमिका निभाता था.
अफरीदी खैबर पख्तूनख्वा में संगठन के लिए भर्ती और तालमेल बिठाने का काम करता था. हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा के एक प्रवक्ता ने उसे धार्मिक विद्वान बताते हुए कहा कि वो अहल-ए-हदीस विचारधारा का प्रमुख चेहरा था. इससे एक हफ्ते पहले ही लाहौर में आमिर हमजा पर हमला हुआ था, जिसमें वह घायल हो गया था. हमज़ा को लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक नेताओं में गिना जाता है.
लश्कर-ए-तैयबा में आमिर हमजा हाफिज सईद के बाद संगठन का दूसरा सबसे अहम चेहरा माना जाता है. पाकिस्तान में साल 2023 से अज्ञात हमलावरों द्वारा आतंकियों को निशाना बनाने का सिलसिला लगातार जारी है. इसे ‘शैडो वॉर’ कहा जा रहा है. इस दौरान शाहिद लतीफ, परमजीत सिंह पंजवड़, अदनान अहमद और मुफ्ती कैसर फारूक जैसे कई बड़े नाम अज्ञात हमलावरों द्वारा मारे जा चुके हैं.
इसके अलावा, मोहम्मद ताहिर अनवर की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है.इन सभी घटनाओं में एक समान पैटर्न देखने को मिला है. पहले सटीक रेकी की जाती है, फिर हमलावर आते हैं, टारगेट को खत्म करते हैं और तुरंत फरार हो जाते हैं. पाकिस्तान सरकार अक्सर इन घटनाओं पर चुप्पी साध लेती है या इन्हें आपसी रंजिश बताकर किनारा कर लेती है. लेकिन आतंकियों के बीच डर का माहौल है.
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