पोलिंग बूथ बिना गए दे दिया वोट, 10922 लोगों ने घर बैठे ही चुनी अपनी सरकार
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karala News: 2026 केरल विधानसभा चुनाव के लिए घर से वोटिंग के पहले दिन 85 से ज्यादा उम्र के 10,922 से ज्यादा वोटरों और दिव्यांग लोगों ने अपने वोट का इस्तेमाल किया. चुनाव आयोग के मुताबिक 7561 सीनियर सिटिजन और 3,361 दिव्यांग वोटरों ने हिस्सा लिया. कोट्टायम 2,228 वोटों के साथ सबसे आगे रहा, जबकि तिरुवनंतपुरम 1,749 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहा. कुल 2,468 ऑफिशियल टीमें इन गैर-मौजूद वोटरों की उनके घर जाकर मदद कर रही हैं. मुख्य वोटिंग 9 अप्रैल को होनी है.

केरल में मुख्य चुनाव से पहले ही 10922 लोगों ने वोट किया.
Kerala Election News: केरल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान की आधिकारिक तारीख 9 अप्रैल है, लेकिन लोकतंत्र का उत्सव आज सोमवार से ही शुरू हो गया है. चुनाव आयोग ने घर से मतदान सुविधा के पहले ही दिन राज्य भर में 10,922 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. इनमें 85 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग और दिव्यांग श्रेणी के मतदाता शामिल थे. आयोग के इस कदम की हर तरफ सराहना हो रही है, क्योंकि इसने उम्र और शारीरिक बाधाओं को लोकतंत्र के रास्ते से हटा दिया है.
चुनाव आयोग द्वारा शेयर किए गए आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को 85 वर्ष या उससे अधिक आयु के 7,561 वरिष्ठ नागरिक अनुपस्थित मतदाताओं ने अपने घरों से वोट डाले. इसी तरह दिव्यांग श्रेणी के 3,361 मतदाताओं (AVPD) ने भी अपने वोट किया. राज्य में AVSC (85+) श्रेणी में कुल 1,45,598 मतदाता हैं, जबकि 62,159 मतदाता AVPD श्रेणी में आते हैं.
कोट्टायम बना नंबर-1, पलक्कड़ में सन्नाटा
जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो कोट्टायम जिले ने बाजी मारी है. यहां सोमवार को AVSC और AVPD श्रेणियों के रिकॉर्ड 2,228 मतदाताओं ने घर से वोट डाले. इसके बाद राजधानी तिरुवनंतपुरम का नंबर आता है. 1,749 लोगों ने मतदान किया. एर्नाकुलम में 1,550 और कन्नूर में 1,141 मतदाताओं ने घर बैठे अपनी जिम्मेदारी निभाई. हालांकि, एक हैरान करने वाली जानकारी यह रही कि पलक्कड़ जिले में सोमवार को एक भी होम वोट नहीं डाला गया. अधिकारियों का कहना है कि वहां के लिए शेड्यूल आने वाले दिनों में तय है.
2,468 टीमों का घर-घर दौरा
इस विशाल प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए चुनाव आयोग ने कोई कसर नहीं छोड़ी है. पूरे राज्य में 2,468 विशेष टीमों को तैनात किया गया है. ये टीमें घर-घर जाकर मतदाताओं की पहचान करती हैं, उन्हें मतदान की गोपनीयता समझाती हैं और पूरी चुनाव प्रक्रिया को पोलिंग बूथ की तरह ही निष्पक्षता से संपन्न कराती हैं. टीम में सुरक्षा बल, वीडियोग्राफर और पोलिंग अधिकारी शामिल होते हैं ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे.
लोकतंत्र की जीत
85 वर्ष से अधिक उम्र के कई बुजुर्गों की आंखों में आंसू थे जब उन्होंने अपने बिस्तर या सोफे पर बैठकर वोट डाला. उनके लिए यह केवल एक वोट नहीं, बल्कि इस बात का अहसास था कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी राय आज भी मायने रखती है. 9 अप्रैल को होने वाले मुख्य मतदान से पहले इस ‘होम वोटिंग’ ने पूरे राज्य में एक सकारात्मक माहौल तैयार कर दिया है.
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Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें
