भारतीय सेना ने बुधवार को अभ्यास प्रलयंकर का एक वीडियो जारी किया, जिसमें पूर्वी कमांड की क्षमताओं को दिखाया गया और लैंड-बेस्ड ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम को एक्शन में दिखाया गया. सेना ने वीडियो जारी करते हुए लिखा- रणे जयः निश्चितः. कोऑर्डिनेट्स लॉक्ड. इस पोस्ट में अभ्यास को सेना की सटीकता, गति और तकनीकी शक्ति का प्रदर्शन बताया गया.
वीडियो में लैंड-बेस्ड ब्रह्मोस मिसाइल की तैनाती और लॉन्च की पूरी प्रक्रिया दिखाई गई, जो पूर्वी थिएटर में सेना की लड़ाकू तैयारियों और हमले की क्षमता को रेखांकित करती है. सेना ने कहा कि ब्रह्मोस सिस्टम आत्मनिर्भर भारत की सफलता को दोहराती है. भारत की स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षमता तथा तैयारियों को मजबूत बनाती है.
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अभ्यास प्रलयंकर का उद्देश्य
अभ्यास प्रलयंकर चल रहा है. इसका मुख्य लक्ष्य तेज प्रतिक्रिया क्षमता, कोर्डिनेटेड फायरपावर और युद्धक्षेत्र प्रभावशीलता को निखारना है. यह अभ्यास सेना को विभिन्न परिदृश्यों में तेजी से कार्य करने और दुश्मन के लक्ष्यों पर सटीक हमला करने की क्षमता बढ़ाता है.
पूर्वी क्षेत्र में चीन और अन्य पड़ोसियों के साथ संवेदनशील सीमाओं को देखते हुए ऐसे अभ्यास बहुत महत्वपूर्ण हैं. इनमें सैनिकों को वास्तविक युद्ध जैसी स्थितियों में प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि कोई भी चुनौती आने पर सेना पूरी तरह तैयार रहे. ब्रह्मोस मिसाइल का शामिल होना इस अभ्यास को और अधिक प्रभावशाली बनाता है.
ब्रह्मोस मिसाइल क्या है?
ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई है. यह दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है. यह मिसाइल दुश्मन के जहाजों, जमीन पर स्थित ठिकानों और अन्य लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए बनाई गई है. हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसने अपनी क्षमता साबित की, जहां इसने दुश्मन के ठिकानों पर सटीक और विनाशकारी हमले किए.
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ब्रह्मोस की खासियत यह है कि यह पूरे उड़ान भरते समय सुपरसोनिक गति बनाए रखती है, जिससे दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम इसे रोक पाना बहुत मुश्किल हो जाता है. यह फायर एंड फॉरगेट सिद्धांत पर काम करती है, यानी एक बार लॉन्च करने के बाद इसे अपने आप लक्ष्य की ओर जाना होता है.

लैंड-बेस्ड ब्रह्मोस मिसाइल की विशेषताएं
लैंड-बेस्ड ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम भारतीय सेना के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. यह मोबाइल ऑटोनॉमस लॉन्चर (MAL) पर लगाया जाता है, जो 12×12 पहियों वाले भारी ट्रक पर बना होता है. एक लॉन्चर पर आमतौर पर तीन मिसाइलें होती हैं, जिन्हें एक साथ या अलग-अलग लक्ष्यों पर दागा जा सकता है.
- लंबाई: लगभग 8.4 मीटर
- वजन: लगभग 3000 किलोग्राम (लॉन्च वजन)
- व्यास: 0.6 से 0.67 मीटर
- रेंज: शुरू में 290 किलोमीटर थी, अब बढ़ाकर 450 किलोमीटर या उससे अधिक कर दी गई है. भविष्य में 800 किलोमीटर तक की रेंज वाले संस्करण पर काम चल रहा है.
- गति: करीब 3700 किलोमीटर प्रति घंटा.
- वॉरहेड: 200 से 300 किलोग्राम का पारंपरिक हाई एक्सप्लोसिव या सेमी आर्मर-पियर्सिंग वॉरहेड, जो कठोर लक्ष्यों को भी भेद सकता है.
- प्रोपल्शन: दो चरणों वाला- पहला सॉलिड रॉकेट बूस्टर जो इसे शुरू में तेज गति देता है, और दूसरा लिक्विड रामजेट इंजन जो पूरे सफर में सुपरसोनिक गति बनाए रखता है.
- उड़ान की ऊंचाई: 10 मीटर से लेकर 15 किलोमीटर तक, जिसमें यह समुद्र या जमीन के बहुत करीब उड़कर दुश्मन के रडार से बच सकती है.
- गाइडेंस: एडवांस रडार होमिंग और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम के साथ बेहद सटीक लक्ष्य भेदन क्षमता.
“रणे जयः निश्चितः।”
Victory in battle is certain.Coordinates locked.#ExercisePralayankar showcases precision, speed and technological prowess of the #IndianArmy.#BrahMos system reaffirms #AtmanirbharBharat‘s capabilities and operational readiness.
Built for accuracy.… pic.twitter.com/jFSx2KJUxL
— ADG PI – INDIAN ARMY (@adgpi) April 29, 2026
यह मिसाइल ट्रांसपोर्ट लॉन्च कैनिस्टर (TLC) में रखी जाती है, जो इसे ट्रांसपोर्ट, भंडारण और लॉन्च के लिए सुरक्षित रखता है. लॉन्चर पूरी तरह स्वायत्त होता है. इसमें अपना कमांड, कंट्रोल और कम्युनिकेशन सिस्टम लगा होता है.
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अभ्यास प्रलयंकर में ब्रह्मोस का प्रदर्शन दिखाता है कि भारतीय सेना आधुनिक युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है. आज के समय में जहां युद्ध तेज गति और सटीक हमलों पर आधारित होते हैं, ब्रह्मोस जैसी मिसाइल दुश्मन की रणनीति को पूरी तरह बदल सकती है.
यह मिसाइल दुश्मन के कमांड सेंटर, एयर बेस, रडार साइट और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को नष्ट करने में सक्षम है. ऑपरेशन सिंदूर में इसके प्रदर्शन ने दुनिया भर में इसकी ताकत को साबित कर दिया है.
भारतीय सेना लगातार अपनी क्षमताओं को मजबूत कर रही है. अभ्यास प्रलयंकर जैसे कार्यक्रम न सिर्फ सैनिकों को प्रशिक्षित करते हैं, बल्कि दुश्मनों को भी संदेश देते हैं कि भारत की रक्षा तैयारियां अत्याधुनिक और प्रभावी हैं.
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