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ब्रिक्स बैठक 2026: पश्चिम एशिया पर भारत का अध्यक्षीय बयान | BRICS 2026: India Issues Chair’s Statement on West Asia

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नई दिल्ली: 14 और 15 मई 2026 को आयोजित ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक एक बड़े कूटनीतिक मोड़ पर समाप्त हुई. भारत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में उम्मीद की जा रही थी कि पश्चिम एशिया (West Asia) और मध्य पूर्व के संकट पर एक साझा बयान आएगा. हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ अलग रही और सदस्य देशों के बीच इस संवेदनशील मुद्दे पर गहरी असहमति देखने को मिली. नतीजतन, एक साझा घोषणापत्र की जगह भारत को ‘अध्यक्षीय बयान’ और ‘आउटकम डॉक्यूमेंट’ जारी करना पड़ा. इस दस्तावेज में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर सदस्य देशों के बीच अलग-अलग मत थे. यह बयान इस बात का संकेत है कि रूस, चीन, भारत और हाल ही में शामिल हुए नए सदस्यों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा और हितों को लेकर खींचतान जारी है.

ब्रिक्स देशों के बीच आखिर किन मुद्दों पर फंसा पेंच?

नई दिल्ली में जुटे ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों ने वैश्विक राजनीति और सुरक्षा पर विस्तार से चर्चा की. लेकिन जब बात पश्चिम एशिया की आई, तो सहमति की जगह ‘विविध दृष्टिकोण’ हावी रहे.

भारत द्वारा जारी बयान के मुताबिक, सदस्य देशों ने अपने-अपने राष्ट्रीय रुख प्रस्तुत किए. हालांकि, सभी देशों ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान संकट का समाधान संवाद और कूटनीति से होना चाहिए.

संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने पर तो सब राजी थे, लेकिन संकट की जिम्मेदारी और उसके समाधान के तरीकों पर विचार अलग थे. अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में समुद्री व्यापार के सुरक्षित प्रवाह को लेकर भी चिंता जताई गई.

क्या ईरान के मसले पर ब्रिक्स बिखरता नजर आया?

इस असहमति को ब्रिक्स की कमजोरी नहीं, बल्कि इसके लोकतांत्रिक स्वरूप के तौर पर देखा जा रहा है. भारत ने अपनी अध्यक्षता में ‘रिजिलिएंस, इनोवेशन, को-ऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी’ की थीम रखी है.

अध्यक्षीय बयान में कहा गया कि सदस्य देशों के बीच मतभेद के बावजूद सभी ने भारत की अध्यक्षता का पूरा समर्थन किया. बैठक में संयुक्त राष्ट्र (UN) के ढांचे में सुधार और इसे अधिक प्रतिनिधि बनाने की मांग को फिर से दोहराया गया.

चीन और रूस ने एक बार फिर भारत और ब्राजील की सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका की आकांक्षाओं का समर्थन किया.

By uttu

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