Thu. Apr 16th, 2026

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की चिकित्सकों से नवाचार अपनाने की अपील

blank

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की चिकित्सकों से नवाचार अपनाने की अपील

नागपुर. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को युवा चिकित्सकों से नवाचार, अनुसंधान करने और निरंतर सीखते रहने का आग्रह करते हुए इस बात पर जोर दिया कि चिकित्सा में नैतिक मूल्य सर्वोपरि हैं और प्रौद्योगिकी करुणा का स्थान नहीं ले सकती। राष्ट्रपति मुर्मू नागपुर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के दूसरे दीक्षांत समारोह में एक सभा को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि इस देश की बेटियां और बेटे मिलकर 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों में ना केवल सेवा भाव होना चाहिए, बल्कि आजीवन सीखने की प्रतिबद्धता भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “जिज्ञासा ही प्रगति का आधार है। चिकित्सा विज्ञान में नये समाधान खोजने की प्रेरणा ना केवल आपको एक उत्कृष्ट डॉक्टर बनाएगी, बल्कि सेवा के बेहतर अवसर भी प्रदान करेगी।” 

उन्होंने युवा चिकित्सकों से नवाचार, अनुसंधान करने और निरंतर सीखते रहने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा याद रखना चाहिए कि चिकित्सा क्षेत्र में नैतिक मूल्यों का सर्वोच्च स्थान है। उन्होंने कहा, “प्रौद्योगिकी कितनी भी उन्नत क्यों ना हो जाए, वह करुणा, ईमानदारी और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण का स्थान नहीं ले सकती। करुणा की भावना को हमेशा बनाए रखें, क्योंकि यह आपको ना केवल एक अच्छा डॉक्टर बनाती है, बल्कि एक अच्छा इंसान भी बनाती है।” उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले दशक में नागरिकों के अच्छे स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए कई पहल की हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन कल्याण आरोग्य योजना के तहत 43 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य कार्ड जारी किए हैं, जो प्रत्येक लाभार्थी परिवार को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 1.85 लाख से अधिक ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ स्थापित किए हैं। मुर्मू ने सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न अन्य स्वास्थ्य संबंधी पहलों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि चिकित्सा जगत से जुड़े लोगों को मानवता की सेवा करने का विशेष अवसर प्राप्त है और उन्हें इस जिम्मेदारी पर गर्व करना चाहिए तथा इसे संवेदनशीलता के साथ निभाना चाहिए। उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि आज डिग्री प्राप्त कर रहे छात्र ना केवल अपने व्यक्तिगत जीवन में सफलता प्राप्त करेंगे, बल्कि अपने साथी नागरिकों को स्वस्थ रखने में भी योगदान देंगे। ऐसे ही प्रयासों से हम देश की आजादी के 100 साल पूरे होने तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होंगे।”

 

By uttu

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *