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रील देखकर रियल ठगी… फिल्में देख फर्जी CBI अफसर बने ‘बंटी-बबली’ की हैरतअंगेज कहानी – muzaffarnagar fake cbi officer boyfriend girlfriend arrested lclcn

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दिल्ली की गलियों में एक ऐसा प्रेमी जोड़ा रहता था, जिसने फिल्मों और टीवी सीरियल्स से प्रेरित होकर अपनी जिंदगी का रास्ता ही बदल दिया. दोनों हाई स्कूल और इंटर पास थे, लेकिन दिमाग में चल रही कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं थी. उन्होंने तय किया कि वे असली अफसर नहीं बन सकते, तो नकली ही सही और बस यहीं से शुरू हुई ठगी की खौफनाक कहानी.

दरअसल, यह कहानी तब सामने आई जब 4 अप्रैल को मुजफ्फरनगर के शाहपुर थाना क्षेत्र निवासी इकरा नाम की महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. उसने बताया कि कुछ दिन पहले उसकी व्हाट्सएप पर हिदायतुल्लाह नाम के व्यक्ति से बातचीत शुरू हुई थी. उसे नहीं पता था कि स्क्रीन के पीछे बैठा व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि दिल्ली का रहने वाला मंसूर अहमद था.

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मंसूर ने चालाकी से खुद को इकरा का भाई जैसा भरोसेमंद बना लिया. धीरे-धीरे उसने परिवार की पूरी जानकारी जुटा ली और फिर अपनी गर्लफ्रेंड रोजी के साथ मिलकर एक खतरनाक खेल शुरू किया.

फिल्मी स्क्रिप्ट से निकली ठगी की प्लानिंग

रोजी और मंसूर ने फर्जी आईडी तैयार कीं और कभी खुद को सीबीआई अधिकारी तो कभी कस्टम अधिकारी बताने लगे. वे सोशल मीडिया के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाते, उनकी निजी जानकारी हासिल करते और फिर उन्हें डराकर ब्लैकमेल करते.

इकरा और उसके परिवार को भी इसी तरह निशाना बनाया गया. फर्जी अफसर बनकर दोनों ने उन्हें धमकाया और धीरे-धीरे 5 लाख रुपये ठग लिए. जब ठगी का दबाव बढ़ गया, तब परेशान होकर इकरा ने पुलिस से मदद मांगी.

शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई और बीएनएस की धारा 318(4), 319, 338, 336 और 340 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया. इसके बाद सर्विलांस की मदद से इस प्रेमी जोड़े की तलाश शुरू हुई.

मुजफ्फरनगर

गिरफ्तारी और बरामदगी का खुलासा

आखिरकार, रविवार को पुलिस ने इस फ्रॉड प्रेमी जोड़े को गिरफ्तार कर लिया. तलाशी के दौरान पुलिस को तीन डेबिट कार्ड, तीन मोबाइल फोन, एक फर्जी आईडी, एक फर्जी सर्च वारंट, एक पासबुक और करीब 2 लाख रुपये की नकदी बरामद हुई.

पूछताछ में रोजी और मंसूर ने चौंकाने वाले खुलासे किए. उन्होंने बताया कि वे सोशल मीडिया पर भोले-भाले लोगों से दोस्ती करते थे और उनकी निजी जानकारी जुटाकर उन्हें डराते थे.

दोनों ने स्वीकार किया कि अब तक वे करीब 20 लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं और कई लाख रुपये की ठगी कर चुके हैं.

पुलिस की जांच में सामने आई पूरी साजिश

एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि साइबर फ्रॉड के मामलों में लगातार कार्रवाई की जा रही है. इकरा की शिकायत के बाद एसपीआरए, सीओ बुढ़ाना, शाहपुर थाना, सर्विलांस और एसओजी की संयुक्त टीम बनाई गई थी.

जांच में पता चला कि मंसूर अहमद मूल रूप से बिजनौर का निवासी है लेकिन दिल्ली में सैलून में काम करता था. वहीं रोजी के पिता टेलर हैं. दोनों पढ़े-लिखे थे लेकिन आसान पैसे के लालच में अपराध की राह पर चल पड़े.

पुलिस ने बताया कि आरोपी व्हाट्सएप और फेसबुक के जरिए लोगों से दोस्ती करते, उनकी कमाई, टैक्स और परिवार की जानकारी जुटाते और फिर सीबीआई अफसर बनकर दबाव बनाते थे.

मुजफ्फरनगर

फिल्मों से सीखा अपराध का तरीका

पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने फिल्मों और टीवी सीरियल्स से प्रेरणा लेकर यह तरीका सीखा. वे फिल्मों के किरदारों की तरह फर्जी सर्च वारंट तक बनाते थे.

दोनों ने बताया कि वे जानबूझकर ऐसे लोगों को निशाना बनाते थे जो जल्दी डर जाएं और पैसा दे दें. खासकर महिलाओं से दोस्ती कर उनकी भावनाओं का फायदा उठाया जाता था.

पुलिस ने दोनों को जेल भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी है और टीम को तुरंत कार्रवाई के लिए 15 हजार रुपये का इनाम भी दिया गया है. प्रेमी-प्रेमिका ने स्वीकार किया कि पैसों के लालच में वे यह सब करते थे और एक-दूसरे के बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड हैं.

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By uttu

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