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2023 में हिटवेव का दंश झेल चुका है बलिया का जिला अस्पताल, इस बार फिर तपते तंदूर में बदला, 2000 मरीज रोज उमस में बेहाल

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बलिया: साल 2023 का समय था, जब भीषण गर्मी का कहर था. उस दौरान, जिला अस्पताल में मौत का तांडव जारी था. जिससे पूरे जनपद में हड़कंप मच गया था. खबर ये भी चली थी कि, शमशान में शव जलाने के लिए लकड़ियां कम पड़ गई. मुद्दा इतना बड़ा था की, तुरंत सरकार ने एक्शन लिया और जिला अस्पताल की व्यवस्था धीरे-धीरे सुधरने लगी और तमाम सुविधाएं बढ़ाई गई. अब फिर एक बार भीषण गर्मी शुरू हो चुका है.

अब कैसे हैं बलिया जिला अस्पताल के हालात?, क्या अस्पताल को मिले सुविधा सही से संचालित हो रहे हैं या बदहाली की मार झेल रहे हैं. लोकल 18 के एक रियलटी चेक में जिला अस्पताल बलिया की तस्वीर फिलहाल किसी तपते तंदूर से कम नहीं दिख रही हैं. भीषण गर्मी के बीच जब मरीज राहत के लिए यहां पहुंच रहे हैं, तो उन्हें इलाज से पहले उमस और बदहाली से जूझना पड़ रहा है. ज़मीनी हकीकत जानने के लिए किए गए इस रियलिटी चेक में हालात चौंकाने वाले मिले, जहां सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल न के बराबर है.

पसीने से तरबतर हो रहे मरीज

जनपद के बांसडीह से आए मरीज सुमेर ने कहा कि, अस्पताल में AC लगे तो हैं, लेकिन चल नहीं रहे हैं. डॉक्टर से दिखने पहुंचे मरीज पसीने से तरबतर दिखे और पंखों के सहारे किसी तरह अपने नंबर का इंतज़ार कर रहे थे. अस्पताल के कई ओपीडी कमरों जैसे – कमरा नंबर 2, 3, 4, 5 और 6 का हाल लगभग एक जैसा है. कहीं एसी खराब है, तो कहीं उसे हटाकर सिर्फ पंखे के भरोसे मरीजों को छोड़ दिया गया है. आखिरकार ये AC कहां है, कौन ले गया, जो बचे वह रिपेयरिंग के बिन खराब है, तो उनके रिपेयर का धन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है. कमरा नंबर 4, जिसमें सबसे ज्यादा भीड़ होता है, जहां शिशु रोग विशेषज्ञ बैठते हैं, वहां भी गर्मी से मरीज बेहाल है. एक मरीज ने बताया कि, कूलर चल रहा था, लेकिन उसे भी बंद करा दिया गया है. अब बड़ा सवाल उठता है कि, आखिर ऐसी भीषण गर्मी में राहत देने वाली सुविधाएं बंद क्यों हैं?

एसी बंद, कूलर भी खराब

हड्डी और सर्जन रोग विभाग के कमरे (OPD) 18, 19 और 20 की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं थी. जी हां यहां फ्रैक्चर और दर्द से कराहते मरीजों को भीषण गर्मी में बिना एसी के रहना पड़ रहा है. बड़े दूर बेल्थरा रोड से आए एक मरीज ने कहा कि, इतनी दूर से बेहतर इलाज की उम्मीद में आए थे, लेकिन यहां हालात बिल्कुल सही नहीं हैं. इमरजेंसी वार्ड में भी स्थिति सुधरी हुई दिखाई नहीं दे रही हैं. एसी बंद, कुछ कूलर भी खराब और साफ-सफाई भी सवालों के घेरे में है. मरीजों के परिजन पूछ रहे हैं कि, जब सरकार ने सुविधाएं दी हैं, तो उनका इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा है?. जिला अस्पताल में हर दिन करीब 2000 मरीजों का इलाज होता है. लेकिन लापरवाही का आलम यह है कि, अब सवाल न केवल व्यवस्था पर है, बल्कि जिम्मेदारी तय करने पर भी खड़ा हो रहा है. गर्मी के इस दौर में यह बदहाली मरीजों के दर्द को और बढ़ा रही है और शायद जिम्मेदार कान में तेल डालकर सो गए हैं.

सीएमओ ने कहा गर्मी से निपटने का पूरा है इंतजाम

जिला अस्पताल बलिया के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. एसके यादव ने कहा कि, भीषण गर्मी शुरू हो चुकी हैं, खासतौर पर 10 से 2 बजे का तापमान असहनीय हो रहा है. शासन और डीएम बलिया के निर्देश पर इस भीषण गर्मी से निपटने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी हैं. इस क्रम में बारह बेड का कोल्ड रूम बनाया गया है. इसके अलावा हर वार्ड में कूलर पंखे और AC चल रहे हैं. ओपीडी के सामने टेंट यानि कपड़े की चांदनी लगी है, ताकि लोगों को धूप न लगे. रैन बसेरा भी 10 बेड का बनाया गया है. रजिस्ट्रेशन काउंटर, पोस्टमॉर्टम हाउस और बर्न वार्ड के बगल में भी शेड लगाया है, जो पहले नहीं था.

24 घंटे डॉक्टर और नर्स अलर्ट है. सबकुछ सही है, लेकिन किसी भी वार्ड में AC नहीं चल रही हैं और कुछ कूलर भी खराब है?. इस सवाल पर cms ने अपने बचाव में कहा कि, वह सभी से चालू नहीं होती है, टेक्नीशियन आएगा, तो चालू हो जाएगा. लेकिन हकीकत यह है कि, शासन से मिली सुविधा जितने दिन चलती हैं, ठीक है बिगड़ने के बाद उसको सही नहीं कराया जाता हैं. फिलहाल ये कहना गलत नहीं होगा कि, जिम्मेदार अपने कार्य के प्रति एकदम लापरवाह बन गए हैं.

By uttu

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