पश्चिम एशिया में 48 दिनों से सुलग रहे तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर आई राहत की खबर अब खुद सवालों के घेरे में है। पहले ईरान की ओर से इसे पूरी तरह खोलने का एलान किया गया, जिससे वैश्विक बाजारों में उम्मीद जगी, लेकिन अब उसी दावे पर ईरान के भीतर से ही तीखा विरोध और संदेह सामने आ गया है। ईरान की दो प्रमुख समाचार एजेंसियों ने दावा किया है कि अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति अभी साफ नहीं है।
पूरी बात को ऐसे समझिए कि ईरान की फार्स और मेहर जैसी प्रभावशाली समाचार एजेंसियों ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बयान पर सवाल खड़े किए हैं, जिससे हालात और उलझ गए हैं। शुक्रवार शाम में ईरान ने एलान किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोल दिया गया है और उन्हें आने-जाने की पूर्ण छूट दी गई है।
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अब समझिए पूरा विवाद?
इरान के एलान के बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड के करीबी माने जाने वाले फार्स न्यूज एजेंसी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस फैसले पर हैरानी जताई। एजेंसी ने कहा कि इस मुद्दे पर देश की शीर्ष संस्था सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषदऔर बातचीत करने वाली टीम की अजीब चुप्पी बनी हुई है। वहीं मेहर न्यूज एजेंसी ने भी कहा कि जलडमरूमध्य को खोलने का फैसला अभी पूरी तरह साफ नहीं है और इसके लिए देश के सर्वोच्च नेता की मंजूरी जरूरी है।
नेतृत्व को लेकर भी अनिश्चितता
बता दें कि ईरान में इस समय नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खबरों के अनुसार नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के स्वास्थ्य को लेकर भी अनिश्चितता है, क्योंकि युद्ध के दौरान उनके घायल होने की बात कही जा रही है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने वादा किया है कि वह अब कभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद नहीं करेगा। हालांकि, ईरान की ओर से इस तरह का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
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होर्मुज का दुनिया पर असर
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से रोजाना दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल गुजरता है। हाल ही में इस रास्ते पर टैंकरों की आवाजाही रुकने से
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पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ गईं।
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वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा।
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अमेरिका में भी महंगाई पिछले 4 साल में सबसे ज्यादा बढ़ी।
ऐसे में फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। एक तरफ ईरान के अंदर ही अलग-अलग बयान आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भ्रम बना हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर साफ तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
