कर्नाटक में मचेगा घमासान, सिद्दारमैया की उल्टी गिनती शुरू, 4 मई क्यों अहम?
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Karnataka Politics: कर्नाटक में तमाम कोशिशों के बावजूद सीएम की कुर्सी को लेकर जारी खींचतान अभी तक खत्म नहीं हुई है. मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच पावर टसल लगातार जारी है. हालांकि, दोनों नेता यह भरसक कोशिश करते हैं कि सार्वजनिक तौर पर मनमुटाव जाहिर न हो.

कर्नाटक में सीएम सिद्दारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार में बीच खींचतान थम नहीं रही है. (फाइल फोटो/PTI)
Karnataka Politics: कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर खींचतान आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है. 4 मई को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद राज्य की सियासत में हलचल बढ़ने के संकेत हैं. हालांकि, इन चुनावों का कर्नाटक सरकार की स्थिरता पर सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन पार्टी के अंदर शक्ति संतुलन पर इनका प्रभाव पड़ सकता है. मुख्यमंत्री सिद्दारमैया (Siddaramaiah) और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) के बीच नेतृत्व को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा एक बार फिर चर्चा में है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि चुनाव नतीजों के बाद शिवकुमार के लिए मुख्यमंत्री पद की दावेदारी दोबारा मजबूत करने का यह अहम मौका हो सकता है, क्योंकि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में अब करीब दो साल ही बचे हैं.
‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, सिद्धारमैया खेमे ने कैबिनेट फेरबदल की मांग तेज कर दी है. इसे राजनीतिक पर्यवेक्षक प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने और 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले संदेश को रीसेट करने की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं. बताया जा रहा है कि सिद्धारमैया समर्थक करीब 30 विधायक दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल करने की वकालत कर रहे हैं. दूसरी ओर, शिवकुमार समर्थक भी चुनाव परिणाम आने के बाद दिल्ली जाने की तैयारी में हैं, जहां वे नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर पार्टी आलाकमान पर दबाव बना सकते हैं. ऐसे में कैबिनेट विस्तार या फेरबदल कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों को काफी हद तक बदल सकता है. मौजूदा समय में सरकार को कोई खतरा नहीं है, लेकिन प्रतीकात्मक बदलाव भी राजनीति में बड़ा असर डालते हैं.
ऊपर से सब ठीक, पर अंदर सुलग रही आग
दिलचस्प बात यह है कि दोनों खेमों ने सार्वजनिक रूप से टकराव से बचने की कोशिश की है. सिद्दारमैया ने साफ कहा है कि वह पार्टी आलाकमान के फैसले का पालन करेंगे, जबकि शिवकुमार भी लगातार पार्टी अनुशासन पर जोर दे रहे हैं. हालांकि, उनके समर्थकों के बयानों से अटकलों का दौर जारी है. विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि 4 मई के चुनाव नतीजे कांग्रेस की राष्ट्रीय स्थिति का संकेत देंगे, जिसका असर कर्नाटक में नेतृत्व संबंधी फैसलों पर पड़ सकता है. अगर पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहता है तो कुछ गुटों का आत्मविश्वास बढ़ सकता है, वहीं कमजोर प्रदर्शन की स्थिति में स्थिरता और निरंतरता की मांग जोर पकड़ सकती है.
दोनों नेताओं का मजबूत आधार
आने वाला महीना कर्नाटक कांग्रेस के लिए अहम साबित होने वाला है. Siddaramaiah और DK Shivakumar दोनों के अपने-अपने मजबूत सामाजिक और राजनीतिक आधार हैं. जहां सिद्दारमैया अहिंदा (AHINDA) वर्गों में प्रभाव रखते हैं, वहीं शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय और संगठनात्मक ढांचे में मजबूत पकड़ रखते हैं. अब देखना होगा कि पार्टी आलाकमान इन प्रतिस्पर्धी दावेदारियों के बीच संतुलन कैसे बनाता है. फिलहाल उसकी रणनीति वेट एंड वॉच की बनी हुई है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
